दो दिन भाई के ससुराल में ठहरी थी हनीप्रीत

 

10 दिन बाद फिर हनुमानगढ़ जिले में आई थी

 

श्रीगंगानगरा, 21 सितम्बर (नि.स.)। हनीप्रीत उर्फ प्रियंका तनेजा, जिसकी पूरी देश में ही नहीं, बल्कि पड़़ोसी देश नेपाल तक में तलाश हो रही है, वह डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सीबीआई कोर्ट द्वारा सजा सुनाये जाने के बाद दो बार हनुमानगढ़ जिले में आई, लेकिन पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई। हनुमानगढ़ जिला पुलिस का इस मामले में बड़ा ही ही लचर रवैया सामने आया है। हनुमानगढ़ के सैक्टर 12 में हनीप्रीत के भाई का ससुराल है। पिछले कईं दिनों से हनीप्रीत के हनुमानगढ़ में आने और उसकी तलाश में हरियाणा पुलिस के आने को लेकर बड़ी अटकलें और चर्चाएं हो रही हैं। इस पर आज सैक्टर 12 निवासी मदन बागला ने मीडिया के सामने आकर विराम लगा दिया। उन्होंने मीडिया को बताया कि विगत 28 अगस्त को हनीप्रीत उनके यहां आई थी। उसके साथ कईं कमांडो और डेरा सच्चा सौदा से जुड़े कुछ लोग थे। हनीप्रीत उनके यहां 29 अगस्त शाम तक रुकी थी। इसके बाद वह रात को कहीं चली गई। हनीप्रीत उन्हें नहीं बताकर गई कि वह अब कहां जा रही है। तब से उनका कोई सम्पर्क नहीं है। जानकारी के अनुसार मदन बागला की पुत्री फतेहबाद में हनीप्रीत के भाई से विवाहित है। 28 अगस्त को ही सीबीआई कोर्ट पंचकूला ने साध्वी देहशोषण प्रकरण में गुरमीत राम रहीम को 20 वर्ष की सजा सुनाई थी। याद दिला दें कि 25 अगस्त को जब सीबीआई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दे दिया था, तब पंचकूला में गुरमीत राम रहीम के साथ ही हनीप्रीत चॉपर में रोहतक गई थी। वहां शाम को गुरमीत राम रहीम को रोहतक के नजदीक सुनारिया जेल में ले जाया गया। वहीं से हनीप्रीत गायब हो गई थी। बताया जाता है कि 25 की रात को हनीप्रीत सिरसा डेरे में आई और अगली सुबह वहां से गायब हो गई थी। 26 और 27 अगस्त को वह कहां रही, इसका किसी को कोई पता नहीं। इसके बाद वह गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाये जाने के दिन हनुमानगढ़ के सैक्टर 12 में अपने भाई के ससुराल में पहुंचीं। मदन बागला ने मीडिया को बताया कि उनके यहां आने के बाद हनीप्रीत कमरे में गुमसुम बैठी रहती थी या फिर रोती रहती थी। कमरे के बाहर कमांडो खड़े रहते थे। हनीप्रीत को कमांडो ज्यादातर किसी से मिलने नहीं देते थे। खुद हनीप्रीत भी किसी से मिलना नहीं चाहती थी। उनके यहां दो दिन रहने के दौरान हनीप्रीत ने खाना-पीना भी लगभग छोड़ दिया था। उसने दो-तीन बार दूध का ही सेवन किया। माना जा रहा है कि हनीप्रीत के साथ आने वाले कमांडो वही थे, जो डेरा प्रमुख को जैड प्लस सिक्योरिटी के तहत सरकार ने दे रखे थे। बकौल मदन बागला, उनके यहां हनीप्रीत ने परिवार के सदस्यों से कोई ज्यादा बातचीत नहीं की। बता देें कि जब हनीप्रीत हनुमानगढ़ में आई, तब तक हरियाणा पुलिस ने उसके विरुद्ध कहीं कोई मामला दर्ज नहीं किया था। उन दिनों पंचकूला सहित हरियाणा के विभिन्न शहरों-कस्बों तथा दूसरे राज्यों में डेरा समर्थकों द्वारा हिंसा, आगजनी की जा रही थी। हालात काफी तनावपूर्ण थे। माना जा रहा है कि इसीलिए हनीप्रीत के हनुमानगढ़ में हेाते हुए इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी गई, क्योंकि वह तब तक पुलिस को वांछित नहीं थी। मदन बागला के यहां से 29 अगस्त की रात को कहीं चले जाने के बाद हनीप्रीत के 9-10 सितम्बर की रात को संगरिया के नजदीक किशनपुरा उत्तराधा में एक डेरा समर्थक के यहां आने की पुख्ता जानकारी पुलिस को मिली, लेकिन पुलिस वहां नहीं गई। उस रात हनीप्रीत इस गांव में तीन-चार घंटे रुकी। हनीप्रीत के लिए डेरा समर्थक के परिवार वालों ने गांव में रात 12 बजे दुकान खुलवाकर मिनरल वाटर की बोतलें खरीदीं। दूसरी बार हनीप्रीत जब हनुमानगढ़ जिले में इस तरह से आई, तब तक उसके विरुद्ध हरियाणा में मुकदमे दर्ज हो चुके थे और लुकआउट नोटिस भी जारी हो चुका था।

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