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सदन में विस्फोटक मिलना बड़ी साजिश, एनआईए से जांच होगी : योगी

सदन में विस्फोटक मिलना बड़ी साजिश, एनआईए से जांच होगी : योगी

लखनऊ, 14 जुलाई (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश विधानसभा में सुरक्षा की भारी चूक सामने आयी है। विधानसभा में खतरनाक प्लास्टिक विस्फोटक पाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सदन को इसकी सूचना दिये जाने के बाद, सदन ने आम सहमति से मामले की एनआईए जांच की सिफारिश की। सदन की बैठक सुबह शुरू होते ही मुख्यमंत्री ने सूचित किया कि नेता प्रतिपक्ष राम गोविन्द चौधरी की सीट के करीब एक कागज में सफेद पाउडर लिपटा मिला। योगी ने इससे पहले सुरक्षा को लेकर एक आपात बैठक भी की थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि विस्फोटक सफाई कर्मियों को 12 जुलाई को मिला था। उन्होंने बताया कि पाउडर को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। यह खतरनाक प्लास्टिक विस्फोटक पीईटीएन यानी पेंटाएरीथ्रिटोल टेट्रा नाइट्रेट निकला। डॉग स्क्वायड भी विस्फोटक नहीं पहचान पाया। ,योगी ने कहा कि शुरूआत में हमने समझा कि यह कोई पाउडर या रसायन है लेकिन एफएसल फोरेसिंक साइंस लैब ने बताया कि यह पीईटीएन है जो उच्च गुणवत्ता का हेक्सोजीन और प्लास्टिक विस्फोटक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विस्फोटक की मात्रा 150 ग्राम निकली लेकिन जैसा कि विशेषज्ञों ने बताया कि इस विस्फोटक की 500 ग्राम की मात्रा सदन को उड़ाने के लिए काफी है। उन्होंने कहा कि विस्फोटक बेंच के नीचे पाया गया जो नेता प्रतिपक्ष के बैठने की जगह से तीसरी बेंच है। योगी ने कहा कि सदन की सुरक्षा हमारी चिन्ता का विषय है। यह खतरनाक आतंकी साजिश का हिस्सा है और इसका पर्दाफाश होना चाहिए। राज्य सरकार चाहती है कि मामले की जांच एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी करे। सरकार यह भी चाहती है कि विधान भवन में कार्य करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों का पुलिस सत्यापन कराया जाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयास करने की आवश्यकता है। योगी ने कहा कि यह खतरनाक बात है कि विधानसभा का सत्र चलते समय इसकी सुरक्षा में चूक हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार अभी तक विधानसभा के बाहर की सुरक्षा को लेकर चिन्तित थी लेकिन अब यह और गंभीर मसला हो गया है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से आग्रह किया कि वह विधानसभा के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन सुनिश्चित करायें क्योंकि 500 विधानसभा एवं विधानपरिषद सदस्यों की सुरक्षा दांव पर लगी है। योगी ने कहा कि यह ऐसा मसला है कि इसकी ना सिर्फ सदन की ओर से निन्दा किये जाने बल्कि मुंहतोड़ जवाब देने की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हम सब इस बात पर सहमत हैं कि मामले की एनआईए जांच होनी चाहिए ताकि इसके पीछे की साजिश का पर्दाफाश हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकों और मार्शलों के अलावा चूंकि किसी को सदन के भीतर आने की इजाजत नहीं है इसलिए मामला और भी गंभीर है। यह मुद्दा प्रदेश की 22 करोड़ जनता की भावनाओं से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच के दौरान हमें कोई आपत्ति नहीं होती है इसी तरह विधायकों को यहां भी सहयोग करना चाहिए। मेरा विधायकों से आग्रह है कि वह सदन में मोबाइल फोन ना लायें और अपने बैग सदन के बाहर रखें। इसके लिए एक व्यवस्था बननी चाहिए। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर कोई आतंकवादी हमला हो जाए तो सदन में उससे निपटने के लिए कोई तंत्र नहीं है। उन्होंने कहा कि त्वरित रेस्पांस टीम यानी क्यूआरटी हर गेट पर होनी चाहिए और समान सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। ष्ष्हमने ऐसी घटना की निंदा करने के लिए प्रस्ताव पारित करने का फैसला किया है। कुछ लोग बदमाशी करने पर उतारू हैं और एनआईए को ऐसे लोगों का पर्दाफाश करना चाहिए। सदन ने इसकी जांच एनआईए से करवाने को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया। योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा देश की सबसे बड़ी विधानसभा है। पूरे देश की निगाह इसकी कार्यवाही पर रहती हैं और लोग कुछ नया एवं अच्छा देखने की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने कहा कि विधान भवन की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। विधानसभा और विधान परिषद को मिलाकर कुल 503 सदस्य हैं। इसके लिए संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है। यह खतरनाक बात है कि जब सदन चल रहा हो, विधानसभा की सुरक्षा में चूक हो। मुख्यमंत्री के बयान के बाद विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने सदन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई ऐलान किये। वह मुख्यमंत्री के आग्रह के अनुरूप मामले की एनआईए जांच के लिए भी सहमत हुए। दीक्षित ने कहा कि हम सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भी बैठक कर चुके हैं। हमने सदन में किये जाने वाले कई सुरक्षा उपायों पर फैसला किया है। सभी गेटों पर पीएसी की त्वरित रेस्पांस टीमें तैनात होंगी और पूरे शरीर का स्कैन करने वाली मशीनें लगायी जाएंगी। उन्होंने कहा कि विधायकों और उनके प्रतिनिधियों को जारी सभी प्रवेश पास रद्द किये जाएंगे और विधायकों को केवल एक वाहन पास जारी किया जाएगा। दीक्षित ने कहा कि विधायकों के वाहन चालकों का सत्यापन होगा और पास रहित लोगों को विधानभवन परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायकों एवं अन्य लोगों को जारी पास भी रद्द किये जाएंगे और विधान भवन स्टाफ का पुलिस सत्यापन कराया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन के भीतर आतंकवाद रोधी स्क्वायड अर्थात एटीएस के आने की अनुमति दे दी। उन्होंने कहा कि हम एक परिवार हैं और इस पर उंगली उठाने की अनुमति किसी को नहीं है। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के निर्देशानुसार विधान भवन की सुरक्षा के लिए सभी उपाय किये जाएंगे। नेता प्रतिपक्ष राम गोविन्द चौधरी ने कहा कि उन्हें सभी उपाय स्वीकार्य हैं। किसी को सदन की सुरक्षा भंग करने की अनुमति नहीं है। बसपा के उमा शंकर सिंह ने कहा कि यह चिन्ता की बात है कि जैमर होने के बावजूद सदन के भीतर मोबाइल बज उठते हैं।

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