एक हजार करोड़ की लागत वाली पेयजल योजना का शीघ्र क्रियान्वयन

झुंझुनूं जिले को मिलेगा हिमालय का मीठा पानी
जयपुर, 29 सितम्बर (कासं)। जलदाय विभाग के प्रमुख शासन सचिव रजत मिश्र ने 27 और 28 सितंबर को झुंझुनूं जिले के मलसीसर, जिला मुख्यालय एवं खेतड़ी का दौरा कर पेयजल योजना के प्रोजेक्ट का जायजा लिया और प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की। गौरतलब है कि झुंझनू जिले में पेयजल समस्या के स्थाई समाधान के लिए तारानगर से झुंझनूं फिर खेतड़ी और गोठड़ा तक एक हजार करोड़ की लागत वाली पेयजल योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। जल्दी हीं योजना के पूर्ण होने पर झुंझुनूं जिले के बाशिंदों को स्थाई रूप से हिमालय का मीठा पेयजल मिलना शुरू हो जाएगा। योजना की क्रियान्विति के लिए जलदाय विभाग की ओर से युद्धस्तर पर कार्य किए जा रहा है।एकीकृत तारानगर-झुंझुनू-सीकर-खेतड़ी पेयजल योजना के अन्तर्गत तारानगर से झुंझुनू तक 86 किलोमीटर की बड़ी पाइपलान के द्वारा लगभग 157 मिलीयन लीटर मीठे पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इस परियोजना में यु़द्धस्तर पर कार्य चल रहा है। परियोजना के मलसीसर कार्यालय में झुंझनूं जिले के कलक्टर दिनेश कुमार यादव की उपस्थिति में प्रमुख शासन सचिव ने जलदाय विभाग की ओर से योजना पर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। 595 करोड़ रुपए की व्यय से क्रियान्वित इस योजना में दस वर्ष के रखरखाव का व्यय भी शामिल है।
प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि तारानगर से पानी के संग्रहण के लिए 120 हैक्टेयर में 6200 मिलीयन लीटर की क्षमता वाले 2 विशाल जलाशयों का निर्माण किया गया है। जिनमें पेयजल की आवाक शुरू भी हो गई है। योजना के पूर्ण होने पर तारानगर से मलसीसर एवं मलसीसर से झुंझुनूं में शुद्ध पेयजल पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि झुंझुनूं में जलदाय विभाग के कार्यालय परिसर में दो बड़े जलाशयों में यह जल संग्रहित होगा, जिससे पंपिंग के द्वारा झुंझुनू शहर को पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। झुंझुनु के उक्त जलाशयों से खेतड़ी शहर एवं गोठड़ा तथा 85 गांव एवं 700 ढ़ाणियों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति जल्दी ही शुरू हो जाएगी। मिश्र ने खेतड़ी के निकट खरकड़ गांव में 50 लाख लीटर के जलाशय का निरीक्षण किया गया, जिससे खेतड़ी को बिना पंपिंग पानी आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने बताया कि झुंझुनूं से खेतड़ी की पेयजल परियोजना का क्रियान्वयन लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है, जिसके क्रियान्वयन पर पेयजल संकट का सामना कर रहे खेतड़ी को स्थाई राहत मिलेगी।

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