देश में सबसे सस्ती एलएनजी का आयात शुरू, पहली खेप भारत पहुंची

दाहेज। रूसी कंपनी गैजप्रॉम से 20 वर्षों के करार के तहत सबसे सस्ती द्रवित प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की पहली खेप सोमवार को गुजरात के दाहेज बंदरगाह पर पहुंच गई। गेल इंडिया लिमिटेड और गैजप्रॉम के बीच करार के तहत नाइजीरिया से 3.4 लाख करोड़ एमएमबीटीयू एलएनजी लदा एलएनजी कानो नामक कार्गो सोमवार सुबह दाहेज पहुंचा।सबसे सस्ती गैस की पहली खेप का स्वागत करने गए पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे स्वर्णिम दिन करार दिया। प्रधान ने कहा, सबसे पहले हमने कतर से गैस के दाम पर दोबारा मोलभाव किया। उसके बाद ऑस्ट्रेलिया से हो रही आपूर्ति के भाव पर दोबारा काम हुआ और अब रूस से भी दोबारा तय हुई शर्तों और भाव पर गैस की आपूर्ति शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि देश को गैस-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की ओर कदम बढ़ाते हुए ईंधन जरूरतों में गैस की हिस्सेदारी 15 फीसद पर पहुंचाने की कोशिशें जारी हैं। वर्तमान में देश की ईंधन खपत में गैस की हिस्सेदारी 6.2 फीसद है। हालांकि प्रधान ने आयातित गैस का भाव नहीं बताया। लेकिन सूत्रों का कहना है कि आपूर्ति की जा रही गैस का डिलिवर्ड भाव सात डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) से भी कम है। यह भाव ना केवल देश के सबसे पुराने आपूर्तिकर्ता कतर के भाव से करीब 1.5 डॉलर कम, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से खरीदी जा रही गैस के भाव से भी एक से डेढ़ डॉलर कम है।गौरतलब है कि गेल ने नई शर्तों पर 20 वर्षों के लिए गैजप्रॉम से सालाना 25 लाख टन एलएनजी खरीद का करार किया है। पहले यह करार वर्ष 2012 में किया गया था। लेकिन गैजप्रॉम उस करार के तहत बैरेंट्स सागर की अपनी स्टॉकमैन परियोजना से एलएनजी आपूर्ति में विफल रही। गैजप्रॉम की इस विफलता का फायदा उठाते हुए गेल ने ना केवल गैस के दाम पर दोबारा मोलभाव किया, बल्कि 25 लाख टन सालाना गैस की पूरी खेप लेने से भी इन्कार कर दिया। दोनों पक्षों की बातचीत के बाद कांट्रैक्ट की अवधि तीन वर्षों के लिए बढ़ाई गई और पूरी अवधि के लिए पांच करोड़ टन गैस आपूर्ति की मात्रा में भी 20 लाख टन का इजाफा किया गया।

 

 

 

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