मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के व्यक्तिगत मृत्यु दावा भुगतान अनुपात में वृद्धि

नई दिल्ली। भारत की अग्रणी जीवन बीमा कंपनियों में से एक मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लि. ने बीते वर्ष के लिए मृत्यु दावों के भुगतान की जानकारी घोषित की है। कंपनी द्वारा 10,152 व्यक्तिगत मृत्यु दावों के लिए रु. 353 करोड़ का भुगतान किया गया है। इस तरह वित्त वर्ष 17-18 में कंपनी का दावा भुगतान अनुपात 98.26 प्रतिशत रहा। वित्त वर्ष 16-17 के मुकाबले इस अनुपात में आगे बढ़ोत्तरी हुई है, जब कंपनी को प्राप्त हुए कुल व्यक्तिगत मृत्यु दावों के लिए 97.81 प्रतिशत का भुगतान किया गया था। वित्त वर्ष 17-18 में सिर्फ 178 मृत्यु दावे खारिज किये गये और वित्त वर्ष की समाप्ति तक सिर्फ 2 मामले निपटारे के लिए लंबित थे।वी.विश्वानंद, सीनियर डायरेक्टर एवं सीओओ, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने कहा, मैक्स लाइफ के विजऩ, मिशन और सिद्धातों के अनुरूप हमने अपना दावा भुगतान सिद्धांत सबसे निष्पक्ष, तेज़ और सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखा है। यह हमारे लिए ग्राहक के साथ उचित व्यवहार सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण स्तंभ है। एक समर्पित दावा अधिकारी की नियुक्ति के जरिये हम दावाकर्ताओं को मुश्किल रहित दावा प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं। एक ऐसे देश में जहां बीमा सुरक्षा की उपलब्धता कम है, वहां दावा भुगतान का बड़ा अनुपात होने से जीवन बीमा ग्राहकों को यह भरोसा दिलाया जाता है कि किसी अनहोनी के वक्त उनके परिवार सुरक्षित रहेंगे। इस तरह बीमा ग्राहकों को शुद्ध सुरक्षा उत्पाद खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। वित्त वर्ष 2016-17 के लिए जनवरी 2018 में जारी की गई आईआरडीएआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, उल्लेखित वित्त वर्ष में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस का व्यक्तिगत मृत्यु दावा भुगतान अनुपात बेहतरीन रहा है। इसके साथ ही मैक्स लाइफ इंश्योरेंस पिछले 4 वर्षों में यानि वित्त वर्ष 14-15 से लेकर वित्त वर्ष 17-18 तक लगातार मज़बूत दावा भुगतान अनुपात बनाए रखने वाली कंपनी बनी है।पिछले कुछ वर्षों के दौरान मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने लगातार अपने दावा भुगतान अनुपात में सुधार किया है। इस प्रक्रिया में कंपनी अपने कुशल अंडरराइटिंग कंट्रोल तथा जालसाजी से निपटने हेतु ठोस उपायों के साथ कोई समझौता नहीं करती। कंपनी ने यह सब एनलिटिकल एवं तकनीकी उपायों के जरिये संभव बनाया है। जिसके तहत प्रेडिक्टिव एनलिटिकल मॉडल की शुरुआत करने के अलावा उच्च जोखिम वाले स्थानों पर पॉलिसी के आग्रह के वक्त सख्त जांच की जाती है। वहीं, कंपनी के रिस्क मैनेजमेंट यूनिट के जरिये ग्राहकों का वीडियो वेरिफिकेशन या जियो-टैग सक्षम फील्ड का इस्तेमाल भी किया जाता है।

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