भारत घुटने की आर्थराइटिस की महामारी का सामना कर रहा है: ऑर्थोपेडिक सर्जन

 

जयपुर / 10 अक्टूबर (एजेंसी)। भारत में 15 करोड़ से अधिक लोग घुटने की समस्याओं से पीडि़त हैं, जिनमें से 4 करोड़ लोगों को टोटल नी रिप्लेसमेंट कराने की आवश्यकता है, जिससे समाज और देश पर भारी स्वास्थ्य बोझपड़ रहा है। इसके विपरीत, चीन में, करीब 6.5 करोड़ लोग घुटने की समस्याओं से पीडि़त हैं, जो भारत में घुटने की समस्याओं से पीडि़त लोगों की संख्या से आधे से भी कम है। इससे भी बदतर स्थिति यह है कि भारतीय लोगों में घुटने की आर्थराइटिस की समस्या पश्चिमी देशों की तुलना में 15 गुना से भी अधिक है। भारतीय लोगों में घुटने की आर्थराइटिस का मुख्य कारण उनका घुटने की आर्थराइटिस के प्रति अधिक संवेदनषील होना है। उनके जीवन षैली ऐसी है जिसके कारण घुटने के जोड़ों का अधिक उपयोग होता है। यह जानकारी जयपुर के शाल्बी अस्पताल में विश्व आर्थराइटिस दिवस पर आयोजित एक कार्यषाला में वरिश्ठ सर्जनों ने दी। ज्ञातव्य है कि हर साल 12 अक्टूबर को विश्व आर्थराइटिस दिवस मनाया जाता है।कार्यशाला में शाल्बी हॉस्पिटल्स के संस्थापक अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. विक्रम आई. शाह ने कहा, ”पिछले 20 सालों में भारत में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट में जबरदस्त प्रगति हुई है, फिर लेकिन अभी भी काफी अधिक लोग ज्वाइंट रिप्लेसमेंट की सर्जरी नहीं करा पा रहे हैं, जबकि उन्हें इसकी सख्त जरूरत है। देश को आर्थराइटिस की महामारी का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय आबादी में घुटने की आर्थराइटिस की समस्या पश्चिमी देशों की तुलना में 15 गुना अधिक मानी जाती है। अमेरिका में 30 करोड़ की आबादी में हर साल 7 लाख नी रिप्लेसमेंट सर्जरी होती है, लेकिन भारत के लिए, यह आंकड़ा केवल डेढ़ लाख है। 1994 में भारत में कुल 350 घुटनों की सर्जरी की गई थी, लेकिन अब इसमें अप्रत्याषित वृद्धि हुई है। लेकिन यहां की विषाल आबादी और घुटने की आर्थराइटिस के प्रति भारतीयों की संवेदनषीलता को ध्यान में रखते हुए अब देश में हर साल एक करोड़ नी रिप्लेसमेंटकराने की जरूरत होगी। इसकी तुलना में, भारत में 2022 तक हर साल लगभग सिर्फ दस लाख नी रिप्लेसमेंट ही होने की संभावना है। अच्छी खबर यह है कि ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी अग्रिम प्रौद्योगिकी के साथ लगातार आसान हो रही है। अब, इसकी संक्रमण दर भी काफी कम हो गई है और सर्जरी के बाद अस्पताल में भी कम समय तक रहना पड़ता है। षाल्बी हॉस्पिटल्स, जयपुर के आथ्र्रोप्लास्टी एंड ट्रॉमा के वरिश्ठ कंसल्टेंट डॉ. दीपक सैनी ने कहा, ”अगले एक दशक में, घुटने की आर्थराइटिसके भारत में शारीरिक अक्षमता के चौथे सबसे आम कारण के रूप में उभरने की संभावना है। देष में हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की कमी के कारण स्वास्थ्य देखभाल के इस भारी बोझ से निपटना मुश्किल होगा। घुटने की आर्थराइटिस में तेजी से वृद्धि होने का एक प्रमुख कारण यह है कि आजादी के बाद से भारत में जीवन प्रत्याशा दोगुनी हो गई है, जिसके कारणकाफी संख्या में बुजुर्ग लोग घुटने के घिसने और उसके क्षतिग्रस्त होने की समस्याओं से पीडि़त हो रहे हैं।

 

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