निवेशकों के लिए विश्व बैंक रैंकिंग से भी ज्यादा आकर्षक है भारत : पनगढिय़ा

वाशिंगटन। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री अरविंद पानगडिय़ा ने कहा है कि विश्व बैंक ने हाल में कारोबारी सुगमता पर भारत की जो रैंकिंग बताई है, वास्तव में कारोबार के लिए भारत कहीं ज्यादा आकर्षक है। उन्होंने कहा कि भारत को 30 स्थान के छलांग के साथ जो रैंकिंग मिली है, वह काफी पहले ही मिल जानी चाहिए थी।पानगडिय़ा ने एक इंटरव्यू में कहा कि आमतौर पर निवेशक वहां जाते हैं जहां कारोबारी माहौल सबसे अच्छा होता है, न कि वहां जहां के आंकड़े विश्व बैंक एकत्रित करता है। विश्व बैंक सिर्फ मुंबई और दिल्ली के आंकड़े एकत्रित करता है जबकि कारोबारी सुगमता के माहौल में सर्वश्रेष्ठ स्थान आंध्र प्रदेश और गुजरात हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई सुधार लागू किये हैं। विश्व बैंक की रैंकिंग में अभी उन्हें शामिल नहीं किया गया है। देश को मिली रैंकिंग पहले ही मिल सकती थी।उन्होंने कहा कि औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआइपीपी) ने सिर्फ एक बिंदु पर खास ध्यान दिया। वह बिंदु था विश्व बैंक के उन मानकों पर काम करना जिन पर वह रैंकिंग का निर्धारण करता है। डीआइपीपी ने इन मानकों की विस्तृत सूची बनाई और इस पर गौर किया कि संबंधित विभाग आवश्यक कदम उठाये। नीति आयोग में रहते हुए हमने डीआइपीपी को राज्यों के साथ जोडऩे में यथासंभव मदद की।पानगडिय़ा के अनुसार मौजूदा सरकार के आने के बाद से सुधार के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान यानी विश्व बैंक से मान्यता मिलने से अच्छा संदेश जाएगा। हालांकि पश्चिमी मीडिया भारत में हो रहे बदलावों को काफी देरी के बाद महसूस करता है। रैंकिंग सुधरने से निवेशकों को भरोसा होगा कि कारोबार के लिए भारत तेजी से बदल रहा है।उन्होंने उम्मीद जताई कि देश में कुछ वर्षों से हो रहे सुधारों के चलते अगले साल रैंकिंग में और सुधार होगा। वर्ष 2018 की रैंकिंग में और भी सुधार हो सकता था। लेकिन कई सुधारों को क्रियान्वयन और मान्यता मिलने में देरी होने के कारण रैंकिंग में शामिल नहीं किया जा सका। ऐसे में अगले साल यानी 2019 की रैंकिंग और तेजी से सुधरने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की रैंकिंग शीर्ष 50 के भीतर लाने का जो लक्ष्य रखा है, उसे हासिल किया जा सकता है। लेकिन इसमें आने वाली कठिनाइयों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा बड़ा लक्ष्य लेकर चलते हैं। जब वह कोई बड़ा लक्ष्य रखते हैं तो शुरू में असंभव लगता है लेकिन वास्तव में उसे हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश में प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन, अनुबंधों को प्रभावी बनाने, कारोबार शुरू करने, कंस्ट्रक्शन का परमिट पाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सुधार करने की काफी गुंजाइश है।

विकास दर पर दिया यह जबाब-

विकास दर पर उन्होंने कहा कि पिछले पूरे तीन साल में औसत विकास दर 7.5 फीसद रही है जबकि यूपीए सरकार के आखिरी दो साल के दौरान विकास दर 5.9 फीसद रही थी। वर्ष 2019 में विकास दर में सुधार होने की संभावना है।

कारोबारी भरोसे में भारत की रैंकिंग फिसली-

कारोबारी आशावादिता सूचकांक में भारत की रैंकिंग सितंबर तिमाही में गिरकर सातवें स्थान पर रह गई। एक सर्वे के मुताबिक पिछली तिमाही में देश दूसरे स्थान पर था। ग्रांट थॉर्नटन इंटरनेशनल बिजनेस रिपोर्ट के अनुसार सितंबर तिमाही में इंडोनेशिया पहले, फिनलैंड दूसरे, नीदरलैंड तीसरे, फिलीपींस चौथे, ऑस्ट्रिया पांचवें और नाइजीरिया छठवें स्थान पर रहा।अगले 12 महीनों में राजस्व प्राप्ति पर हुए सर्वे में भारत का रैंकिंग गिरी है। लाभप्रदता में भी भरोसा कम हुआ है। पहले 69 फीसद लोगों को मुनाफे की उम्मीद थी। ऐसे लोगों का अनुपात घटकर 54 फीसद रह गया।

 

 

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