अगले 20 साल तक आठ फीसदी से तेज रहेगी भारत की रफ्तार- यूएन एक्सपर्ट

वाशिंगटन। भारत की अर्थव्यवस्था में तेज विकास की व्यापक क्षमता है। अगर सरकार सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पूरी क्षमता का उपयोग कर सकी, तो अगले दो दशक तक इस देश की विकास दर आठ फीसद के ऊपर बनी रह सकती है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में आर्थिक मामलों के अधिकारी सेबेस्टियन वरगेरा ने यह बात कही है।यूएन ने अपनी हालिया रिपोर्ट में 2018 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.2 फीसद और 2019 में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। वरगेरा ने भारत की आर्थिक स्थिति को व्यापक पैमाने पर सकारात्मक और विकास के अनुकूल बताया है। उनका कहना है कि देश को क्षमता के पूर्ण दोहन के लिए सुधारों की दिशा में अगला कदम बढ़ाना होगा।वरगेरा के मुताबिक, ‘इस पर विचार करने की जरूरत है कि कैसे लंबी अवधि में विकास को बरकरार रखा जाए। हमारे आकलन से भारत अगले कुछ साल ही नहीं, बल्कि 20 साल तक आठ फीसद से ज्यादा की विकास दर की क्षमता रखता है। इसके लिए भारत को सुधारों की अगली श्रृंखला लानी होगी। उदाहरण के तौर पर निवेश का बढ़ावा देने और लोगों के जीवनस्तर को बेहतर करने के कदम उठाने होंगे।पिछले हफ्ते यूएन की वार्षिक रिपोर्ट में 2017 के लिए भारत की विकास दर 6.7 फीसद रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। वरगेरा का कहना है कि आर्थिक स्थितियां अनुकूल होने के बावजूद अभी विकास दर पहले के अनुमानों से कम रह सकती है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी ने निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को लेकर भारत सरकार के प्रयासों की तारीफ की है।उन्होंने कहा, ‘अल्प अवधि में विकास को बढ़ावा देना और मध्य अवधि में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ साल में एक के बाद एक नियामकीय सुधारों ने भी विकास को गति देने में भूमिका निभाई है। नोटबंदी ने निश्चित रूप से 2017 के शुरुआती महीनों में असर दिखाया था। बाजार में लिक्विडिटी की परेशानी हुई थी, लेकिन यह अस्थायी था। जैसे-जैसे वक्त बीता, कई कदम उठाए गए।छोटे उद्यमियों को क्रेडिट सपोर्ट जैसे वित्तीय राहत के फैसले लिए गए। इससे नोटबंदी से लगे झटके से छोटे उद्यमियों को उबरने में मदद मिली। दूसरी ओर, नोटबंदी ने बैंकिंग सेक्टर को फायदा पहुंचाया। इससे टैक्स बेस बढ़ा। इसलिए हमारा मानना है कि मध्यावधि में यह कदम अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा।’ वरगेरा ने 2017 को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सुधारों का वर्ष बताया।दो साल बाद दिखेगी अर्थव्यवस्था में तेजी- प्रमुख ग्लोबल बैंक एचएसबीसी ने वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.6 फीसद रहने का अनुमान जताया है। बैंक के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था दो तरह की सूरतों में आगे बढ़ रही है। पहली, शॉर्ट टर्म में नरमी व धीरे-धीरे रिकवरी तथा दूसरी, मीडियम टर्म में तेजी।अभी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद की उठापटक से कई अहम सेक्टर उबरने के प्रयास में लगे हैं। 2017-18 और 2018-19 में इसका असर दिखेगा। वहीं, 2019-20 और इसके बाद विकास दर में तेजी आएगी। मध्यावधि में अकेले जीएसटी ही जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि दर में 0.40 फीसद तक के इजाफे की वजह बनेगा।
जीएसटी और रेटिंग में सुधार बड़ी उपलब्धियां- वित्त मंत्रालय ने जीएसटी लागू करने, वर्ल्ड बैंक की ओर से भारत की ईज ऑफ डूइंग रैंकिंग में बढ़ोतरी और मूडीज की ओर से रेटिंग बढ़ाने को 2017 की बड़ी उपलब्धियों में गिना है।शनिवार को साल की बड़ी उपलब्धियों मे इनका जिक्र किया गया।मंत्रालय ने कहा कि लोगों का जीवनस्तर बेहतर बनाना सरकार का प्राथमिक लक्ष्य रहा है। सरकार ने सातवां वेतन आयोग लागू किया, जिससे 48 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों को फायदा हुआ। मंत्रालय ने नोटबंदी के बाद वित्तीय तंत्र में साफ-सफाई होने की बात भी कही।

 

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