भारत-म्यामां रिश्तों को और मजबूत करने की पहल, 11 समझौतों पर हस्ताक्षर

 

नेप्यीता, 7 सितम्बर (एजेंसी)। भारत और म्यामां ने विभिन्न क्षेत्रों में 11 सहमति ज्ञापनों एमओयू पर दस्तखत किए। इनमें एक समझौता सामुद्रिक क्षेत्र की सुरक्षा से संबंधित है। माना जा रहा है कि इन समझौतों से दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हो सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यामां की स्टेट काउंसिलर आंग सान सू की के बीच व्यापक महत्व के मुद्दों पर विचार विमर्श के बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। भारत और म्यामां ने सामुद्रिक क्षेत्र की सुरक्षा में सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों पक्षों ने व्हाइट शिपिंग सूचनाओं को साझा करने के लिए भी करार किया है। यह वाणिज्यिक गैर सैन्य मर्चेंट जहाजों की पहचान के बारे में अग्रिम में सूचना देने से संबंधित है। इस करार से गैर वगीकृत मर्चेंट नेवी जहाजों या कार्गो जहाजों के बारे में डेटा देने के कामकाज में सुधार होगा। इन 11 में से एक एमओयू चुनाव आयोग और म्यामां के राष्ट्रीय स्तर के चुनाव आयोग यूनियन इलेक्शन के बीच भी किया गया है।विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 2017 से 2020 के दौरान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान कार्यक्रम के लिए भी एमओयू किया गया है। भारत और म्यामां ने भारतीय प्रेस परिषद तथा म्यामां प्रेस काउंसिल के बीच सहयोग के लिए भी करार किया है। साथ ही आईटी कौशल को बढ़ाने के लिए भारत-म्यामां केंद्र की स्थापना के बारे में करार को विस्तार दिया गया है। दोनों देशों ने चिकित्सा उत्पाद नियमन तथा स्वास्थ्य और दवा क्षेत्र में भी सहयोग के लिए करार पर दस्तखत किए हैं। साथ ही म्यामां के यामेथिन में महिला पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के उन्नयन के लिए सहयोग को भी करार किया गया है।मोदी दो देशों की यात्रा के दूसरे चरण में यहां पहुंचे हैं। इससे पहले उन्होंने चीन के शहर श्यामन में वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। मोदी ने अपनी चीन यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शिन चिनफिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन तथा दुनिया के अन्य नेताओं के साथ बातचीत की थी। यह मोदी की म्यामां की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। इससे पहले वह 2014 में आसियन-भारत शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने यहां आए थे। सू की पिछले साल भारत यात्रा पर गई थीं। म्यामां भी भारत के रणनीतिक पड़ोसी देशों में आता है। इसकी 1,640 किलोमीटर की लंबी सीमा भारत के कई पूर्वोत्तर राज्यों से लगती है।

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