अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पदक जीतने वाले खिलाडिय़ों को अब उप्र में मिलेगी नौकरी

लखनऊ, 24 सितम्बर (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश में पहली बार खेल जगत की किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कोई भी पदक जीतने वाले खिलाड़ी को प्रदेश सरकार अब सीधे द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी (सेकंड क्लास गजेटेड आफिसर) पद की नौकरी देगी। इसके लिये सरकार के खेल विभाग ने 11 सरकारी विभागों का चयन कर लिया है, जहां इन खिलाडिय़ों को समायोजित किया जायेगा। यहीं नहीं प्रदेश के पुलिस विभाग में पिछले करीब 15 साल से खेल श्रेणी की बंद पड़ी दो फीसदी रिक्तियों को एक बार फिर खोल दिया गया है और इन पदों पर केवल राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों का ही चयन किया जायेगा।उत्तर प्रदेश के खेल मंत्री चेतन चौहान ने बातचीत में कहा, ”उत्तर प्रदेश का कोई भी खिलाड़ी ओलंपिक, राष्ट्रमंडल, एशियाई खेलों या किसी भी विश्वस्तरीय खेल प्रतियोगिता में कोई भी पदक जीतता है तो उसे प्रदेश सरकार द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित ?अधिकारी के पद पर नियुक्ति देगी। पदक जीतने वाले पुरूष या महिला खिलाड़ी का स्नातक होना जरूरी है। यदि कोई खिलाड़ी स्नातक नहीं है तो उसे स्नातक पाठयक्रम पूरा करने को कहा जायेगा, उसके बाद उसे नौकरी दी जायेगी। प्रदेश के खेल निदेशक आर पी सिंह ने बताया कि जिन 11 विभागों में इन खिलाडिय़ों को द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी की नौकरी दी जायेगी, उनका भी चयन सरकार ने कर लिया है। इन विभागों में व्यापार कर, युवा कल्याण विभाग, पुलिस विभाग, राजस्व विभाग, खेल विभाग, बिजली विभाग, परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग, वन विभाग, पंचायती राज्य विभाग तथा समाज कल्याण विभाग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उप्र में ऐसा पहली बार हो रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाडिय़ों को सीधे द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी के पद पर नौकरी दी जायेगी। चौहान ने कहा कि इसके अलावा पुलिस भर्ती में दो प्रतिशत खेल कोटा होता था जिन पर राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों को भर्ती किया जाता था लेकिन इस कोटे के तहत पिछले करीब 15 साल से खिलाडिय़ों की भर्ती पर रोक लगी थी। लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार ने अब पुलिस भर्ती में खेल कोटे से लगी रोक को हटा दिया है और अब यह दो फीसदी पद राज्य या राष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों के जरिये भरे जायेंगे। चौहान ने कहा कि प्रदेश के खिलाडिय़ों में उत्साह भरने के लिये सरकार ने फैसला लिया है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पदक जीतने या किसी विश्व स्तरीय प्रतियोगिता जीतने में किसी खिलाड़ी को जितनी धनराशि का पुरस्कार केंद्र सरकार देगी उतनी ही धनराशि का पुरस्कार राज्य सरकार भी देगी। उन्होंने उदाहरण देते हुये बताया कि जैसे ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर केंद्र सरकार किसी खिलाड़ी को छह करोड़ रूपये की धनराशि देती है तो अब अगर उत्तर प्रदेश का कोई खिलाड़ी ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतेगा तो छह करोड़ रूपये प्रदेश सरकार भी देगी। इसी तरह रजत पदक पर केंद्र सरकार के समान चार करोड़ रूपये तथा कांस्य पदक जीतने पर दो करोड़ रूपये सरकार देगी। खेल मंत्री ने बताया कि सरकार पूर्व खिलाडिय़ों को भी पर्याप्त सम्मान दे रही है। इसके तहत खेल के क्षेत्र में खेल रत्न, अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री पुरस्कार तथा द्रोणाचार्य पुरस्कार पाने वाले खिलाडिय़ों को प्रदेश सरकार 20 हजार रूपये प्रति महीने की पेंशन दे रही है।यह पेंशन ऐसे पूर्व खिलाडिय़ों को दी जा रही है जो खेलों से संन्यास ले चुके हैं और इनमें से कोई एक पुरस्कार उन्हें मिला हो और वे उत्तर प्रदेश के मूल नागरिक हों। इसके अलावा खेलों से संन्यास ले चुके उत्तर प्रदेश के खिलाडिय़ों को भी सरकार प्रत्येक माह पेंशन दे रही है। इसमें राज्य स्तर के खिलाडिय़ों को चार हजार रूपये प्रतिमाह, राष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों को छह हजार रूपये प्रति माह तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों को 10 हजार रूपये प्रतिमाह पेंशन देने का प्रावधान है।

 

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