जीएसटी के चलते मिली महारत खाड़ी देशों में बड़ी भारतीय टैक्स पेशेवरों की मांग

नई दिल्ली। भारत में जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती दौर में भले ही टैक्स प्रफेशनल्स कह रहे थे कि यह बेहद जटिल है, लेकिन अब वे इसके मास्टर हो चुके हैं। यहां तक कि उनकी जीएसटी में महारत के चलते खाड़ी देशों तक से उन्हें अवसर मिल रहे हैं। जीएसटी की उनकी विशेषज्ञता के चलते अब भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी टैक्स एक्सपर्ट्स की खासी डिमांड है। असल में कई खाड़ी देश 1 जनवरी से अपने यहां वैट (वैल्यू ऐडेड टैक्स) लागू करने जा रहे हैं, ऐसे में वहां टैक्स के मामलों के जानकारों की खासी जरूरत है। खाड़ी देशों के कारोबारी वैट की समझ रखने वाले कारोबारियों की तलाश में हैं। हालांकि वैट जीएसटी की तरह जटिल नहीं है। कच्चे तेल से होने वाली इनकम में लगातार आ रही गिरावट के चलते खाड़ी देश अब अप्रत्यक्ष करों के जरिए कमाई बढ़ाने के विकल्प तलाश रहे हैं। भारत में जीएसटी को टैक्स प्रफेशनल जटिल अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था मान रहे हैं, लेकिन इसमें महारत के बाद अब खाड़ी देशों में भी उनकी मांग बढ़ गई है। कच्चे तेल से कमाई घटने पर बढ़ाया टैक्स : सैकड़ों ऐसे चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जो लगातार यूएई के दौरे कर रहे हैं। यही नहीं कुछ अकांउंटेंट्स तो वहीं कैंप कर रहे हैं। हालांकि वैट के चलते भले ही भारत के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को यूएई में जमकर रोजगार मिल रहा है, लेकिन इससे भारत के प्रवासियों को नुकसान होगा। वैट लागू होने के बाद खाड़ी देशों में रहना बेहद महंगा हो जाएगा, इसके अलावा नौकरियों के अवसरों में भी कमी आ सकती है। 2014 में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाइ में बड़ा इजाफा होने के चलते कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी।इसके बाद से ही सऊदी अरब समेत तमाम खाड़ी देश कमाई के नए तरीके ईजाद करने में जुटे हैं।

 

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