ई-वे बिल की हार्ड कॉपी रखना जरूरी नहीं

इंदौर। ई-वे बिल किसी तरह के नाके की व्यवस्था नहीं है। असल में यह जीएसटी लागू होने के बाद कर चोरी रोकने के लिए बनाया गया एक सिस्टम मात्र है। ई-वे बिल के लिए यदि ऑनलाइन औपचारिकता पूरी कर दी है तो हार्ड कॉपी गाड़ी में रखने की जरूरत नहीं होगी। बुधवार को शहर के सैकड़ों ट्रांसपोटर्स गुरुवार से लागू हो रही ई-वे बिल व्यवस्था को समझने पहुंचे। जहां कर सलाहकारों-वकीलों ने उन्हें यह जानकारी दी।एमटी टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन व एसोसिएशन ऑफ पार्सल ट्रांसपोटर्स एवं फ्लीट ऑनर्स ने निशुल्क कार्यशाला आयोजित की थी। इसमें मौजूद दो सौ से ज्यादा ट्रांसपोटर्स को कर सलाहकार तन्मय वर्मा, अमर माहेश्वरी ने ई-वे बिल की जरूरत, उसकी वैधानिकता के साथ उसकी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि शुरुआती तौर पर अभी राज्य के बाहर माल भेजने पर इसका पालन करें। मार्च से राज्य के भीतर भी कुछ स्थितियों में इसे अपनाना होगा।टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अनुराग लखोटिया ने ई-वे बिल ऑनलाइन जनरेट करने से लेकर उसके अलग-अलग हिस्सों में दर्ज होने वाले विवरण की जानकारी दी। उन्होंने कहा ई-वे बिल जनरेट करना रजिस्टर्ड व्यापारी की जवाबदारी है। सीए सुनील पी जैन ने कहा कि जीएसटी कानून के तहत ट्रांसपोटर्स को कई स्थितियों में जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेना जरूरी नहीं है। हालांकि माल परिवहन के लिए ई-वे बिल जनरेट करने के लिए पोर्टल पर पंजीयन होना जरूरी हो जाता है। यदि एक गाड़ी में एक से ज्यादा अलग-अलग कंसाइनमेंट होने पर एक ही ई-वे बिल जनरेट किया जा सकेगा। कार्यशाला की शुरुआत में एसोसिएशन ऑफ पार्सल ट्रांसपोर्ट एंड फ्लीट ऑनर्स के अध्यक्ष राकेश तिवारी ने कहा कि नई व्यवस्था में अब माल परिवहन में ट्रांसपोर्ट्स पर भी नियम पालन करवाने का दायित्व आ गया है। ट्रांसपोटर्स पहले कानून समझेंगे तो ही माल भेजने वाले व्यापारी से उसका पालन करवा सकेंगे। मप्र टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विन लखोटिया, सीटीपीए अध्यक्ष एके गौर समेत वरिष्ठ कर सलाहकार भी कार्यशाला में मौजूद थे।

 

 

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