जनजाति कल्याण से सम्बन्धित विषयों पर महत्वपूर्ण बैठक

शिथिल विभागों को चिन्हित करें, गैर जिम्मेदारों को दण्डित करें-राज्यपाल

जयपुर, 12 जुलाई (का.सं.)। राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा है कि जनजाति उपयोजना क्षेत्र में विकास कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाये। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के लिए चलाई जा रहीं योजनाओं के संचालन में किसी प्रकार की ढि़लाई बर्दाश्त नही की जायेगी। राज्यपाल सिंह ने स्पष्ट कहा कि जनजाति उपयोजना क्षेत्र के विकास कार्यों में शिथिलता दिखाने वाले विभागों को चिन्हित करें और लापरवाही करने वालो को दण्डित किया जाये। राज्यपाल कल्याण सिंह ने गुरूवार को राजभवन में जनजाति कल्याण से सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल सिंह ने अधिकारियों से कहा कि आदिवासियों के विकास कार्यों के निस्तारण में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनायें। राज्यपाल ने बैठक में ही कार्य पूरा करने की कट ऑफ डेट भी अधिकारियों से पूछ ली। उल्लेखनीय है कि संविधान के अनुच्छेद 244 व अनुसूची 5 के तहत जनजातियों के सर्वागीण विकास हेतु राज्यपालों को विशेष जिम्मेदारी मिली हुई है। राज्यपाल सिंह ने कहा कि जनजाति क्षेत्र में साक्षरता, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पौष्टिक आहार, पाठ्य सामग्री व ड्रेस पर विशेष ध्यान दिया जाये। राज्यपाल ने बताया कि अगली बैठक 31 जनवरी, 2019 को होगी। राज्यपाल सिंह ने कहा है कि जनजाति उपयोजना क्षेत्र में स्वीकृत शत-प्रतिशत पदों को भरा जाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्थानान्तरण नीति ?सी होनी चाहिए, जिसमें कर्मचारियों का इन फ्लो गैर आदिवासी क्षेत्र से आदिवासी क्षेत्र में हो। उन्होंने कहा कि जब तक यह लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाए तब तक इन-फ्लो को जारी रखते हुए आदिवासी क्षेत्र से गैर आदिवासी क्षेत्र में ट्रांसफर (आउट फ्लो) को हतोत्साहित किया जाए। राज्यपाल सिंह ने सख्त शब्दों में कहा कि फिलहाल, आदिवासी क्षेत्र से किसी कार्मिक को तब तक कार्यमुक्त नहीं किया जाए, जब तक उसका रिलीवर ज्वॉइन नहीं कर ले। इसका कड़ाई से अनुपालन किया जाए। इसका उल्लंघन करने वाले को कठोर दण्ड दिया जाए।राज्यपाल ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 में वनों में निवास करने वालों के अवशेष पट्टों के लिए ग्राम सभावार कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि जिला कलक्टर इस मामले की मासिक समीक्षा करें। जो कठिनाइयां हो, उसका निराकरण स्वंय रूचि लेकर करें। दावों के निस्तारण में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाए। सिंह ने अधिकारियों को सलाह दी कि दावा निरस्त कैसे किया जाए इसके स्थान पर दावे की पुष्टि कैसे हो, इसके रास्ते तलाशे जाए। भूमि के पट्टों के दावों के निस्तारण की कट ऑफ डेट राज्यपाल ने अधिकारियों से चर्चा के बाद 15 सितम्बर तय की। राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी पिछड़े लोग है। कई स्थानों पर तो यह लोग इंसानों जैसी जिदंगी भी नही जी रहे हैं। यह लोग सम्मानजनक जीवन-यापन कर सकें, इसके लिए हमें प्रयास करने होगें। भूमि के पट्टों के निस्तारण के लिए राज्यपाल ने सम्बन्धित विभागों से टिप्पणी मांगी है, जिसके आधार पर नियमों में संशोधन हेतु राज्य व केन्द्र सरकार से बात की जा सके। सिंह का मानना था कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब अनुसूचित जनजाति के लाभार्थी निर्मित आवासों में रहना शुरू कर देंगे। कितने आवास बनें, लाभार्थियों की संख्या क्या है, उसके साथ इस बिन्दु की भी मॉनिटरिंग की जाए कि इन निर्मित आवासों में कितने लोगों ने रहना शुरू कर दिया है। इन आवासों को परिसम्पतियाँ मानते हुए जीओ टेगिंगसिस्टम लागू करने के निर्देश राज्यपाल सिंह ने दिये हैं।राज्यपाल सिंह ने बताया कि उदयपुर के मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा बाँसवाड़ा के गोविन्द गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय द्वारा अनुसूचित क्षेत्र में गाँवों को गोद लेकर वहां ग्रामीण युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के सृजन हेतु कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग, कौशल एवं आजीविका विकास निगम, वन एवं अन्य सम्बन्धित विभाग विश्वविद्यालयों को इस कार्य में सहयोग करें। इस योजना को टी.ए.डी. द्वारा जनजातीय क्षेत्र के सभी गाँवों में लागू किया जाए।राज्यपाल सिंह ने आदिवासियों के बीमा मामले पर आये शिकायत के प्रकरणों पर कहा कि एस.ओ.जी. इन मामलों की जाँच में तेजी लाए। उन्होंने कहा कि यह जांच एक उदाहरण बनना चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार के घोटालों के लिए कोई साहस न जुटा पाए। बीमा कम्पनियों की भूमिका की भी विशेष जाँच होनी चाहिए और साथ ही बीमा क्लेम से सम्बन्धित विभाग स्वयं भी इस घोटाले के कारणों को अपने स्तर से चिन्हित् करें। उन्हें दूर करने के तरीके सोचें। ऐसे मामलों का ऐसा उपचार किये जायें ताकि भविष्य में ऐसे गलत कार्यों की पुनरावृत्ति न हो। सिंह ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में साक्षरता का प्रतिशत कम है, इसे बढ़ाने के लिए गम्भीर प्रयास किये जाएं। जनजातीय लोगों के बीच अंधविश्वासों एवं रूढि़वादी प्रथाओं के विरूद्व जागरूकता पैदा की जाए। कृषि के उन्नत एवं आधुनिक साधनों की जनजाति उपयोजना क्षेत्र के लोगों को जानकारी दी जाए और उनके उपयोग को प्रोत्साहित भी कराया जाये। राज्यपाल ने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता एवं वर्षा ऋतु में फैलने वाली बीमारियों के लिए चिकित्सा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ एवं संवेदनशील बनाये जाने की जरूरत है। राज्यपाल ने कहा कि पशुधन को आर्थिंक दृष्टि से उपादेय बनाया जाए। इस हेतु पशु चिकित्सा विभाग उन्नतशील प्रजातियों के पशु उपलब्ध करवाने, नस्ल सुधार, मौसमी बीमारियों से बचाने के लिए विशेष अभियान चलाए। सिंह ने कहा कि क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष बल दिया जाए। शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाए। बच्चों को दिये जाने वाले मिड-डे-मिल की पौष्टिकता एवं गुणवत्ता की समय-समय पर जांच हो। बच्चों को पाठ्य सामग्री एवं ड्रेस समय से एवं मानक के अनुसार मिल रहे हैं या नहीं, इसकी सतत् समीक्षा एवं मॉनिटरिंग की जाए। छात्रवृत्ति समय से मिले, इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ सतत् रूप से जनजातीय लोग उठाते रहें, इसके लिए लाभार्थियों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। जनजातीय क्षेत्रों में खेल, संस्कृति एवं शिक्षा से जुड़ी प्रतिभाओं को तराशने तथा उन्हें विशेष अवसर उपलब्ध कराने के लिए कार्य योजना बनाये जाने के निर्देश राज्यपाल िंसंह ने दिये है। बैठक में विभिन्न विभागोंं के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, महाराणा प्रताप कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्ववि़श्वविद्यालय व जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति सहित जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग व राजभवन के अधिकारीगण मौजूद थे।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *