कार्ति चिदंबरम अपने विदेशी बैंक खाते बंद कर रहे थे: सीबीआई

नई दिल्ली, 22 सितम्बर (एजेंसी)। केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने आज उच्चतम न्यायालय में दावा किया कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को विदेश जाने से रोकने के लिये उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने का निर्णय किया गया क्योंकि वह अपने अनेक विदेशी बैंक खातों को बंद कर रहे थे। शीर्ष अदालत को जांच ब्यूरो ने यह भी बताया कि जांच के दौरान अनेक मुद्दे सामने आये और अभी कई अन्य सामने आने की उम्मीद है। न्यायालय कार्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले से संबंधित एक प्रकरण की सुनवाई कर रहा है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ के समख जांच ब्यूरो अपनी जांच से संबंधित दस्तावेज सील बंद लिफाफे में पेश करना चाहता था जिसका कार्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने विरोध किया। जांच ब्यूरो की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ”उन्होंने विदेश में जो भी किया वह इस सीलबंद लिफाफे का हिस्सा है।ÓÓ सिब्बल ने लगातार तुषार मेहता के इस कथन का विरोध किया कि जांच एजेन्सी को सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज पेश करने की अनुमति दी जाये। अतिरिक्त सालिसीटर जनरल ने इस अवसर का लाभ उठाते हुये सीलबंद लिफाफे में संलग्न दस्तावेजों के अंशों के बारे में संक्षिप्त में पीठ को बताया। उन्होंने कहा, ”मैं बताना चाहता हूं कि सीलबंद लिफाफे में क्या है। वह जब विदेश में थे तो उन्होंने क्या किया। उन्होंने (पूछताछ के दौरान) बताया कि विदेश में उनका सिर्फ एक बैंक खाता है। परंतु जब वह विदेश गये तो उन्होंने अनेक बैंक खातों को बंद कर दिया। मैं यह सब नहीं बताना चाहता था क्योंकि इससे वह शर्मिंदा होते परंतु मुझे ऐसा करने के लिये बाध्य कर दिया गया।ÓÓ सिब्बल ने मेहता के कथन का प्रतिवाद किया और अतिरिक्त सालिसीटर जनरल से सवाल किया, ”क्या आपने बैंक खातों और संपत्ति के बारे में उससे एक भी प्रश्न किया? यदि वे किसी भी खाते में कार्ति के हस्ताक्षर दिखा दें, तो वे फेमा अथवा काला धन कानून के तहत उस पर मुकदमा चला सकते हैं।ÓÓ कार्ति के खिलाफ यह मामला सीबीआई द्वारा 15 मई को दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है। इस मामले में आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया को 2007 में विदेश से 305 करोड रूपए प्राप्त करने के लिये विदेशी निवेश संवद्र्धन बोर्ड की मंजूरी में अनियमितताएं हुयीं। यह मंजूरी दिये जाने के समय संप्रग सरकार में पी. चिदंबरम वित्त मंत्री थे।

 

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