उपवास के दौरान अपनी डाइबिटीज का रखें विशेष ध्यान : डॉ. बलराम

 

जयपुर, 16 अप्रैल(एजेन्सी)। पूरी दुनिया में डाइबिटीज स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है, लेकिन लोग इसकी सबसे ज्यादा अनदेखी करते हैं, लेकिन अब यह इतनी खतरनाक हो गई है कि मानव इतिहास की इस सबसे बड़ी महामारी की अनदेखी नहीं की जा सकती। त्यौहारों के समय में जब लोग व्रत करते हैं तो डाइबिटीज के मरीज के लिए खतरा और अधिक बढ़ जाता है। हमारे देश में पूरा वर्ष त्यौहारों से भरा होता है। ऐसे त्यौहार भी आते हैं जब लोग काफी ज्यादा उपवास करते हैं और जब खाते हैं तो एक साथ काफी ज्यादा भोजन लेते हैं, ऐसे में एक हेल्दी डाइट प्लान धरा का धरा रह जाता है। जिन लोगों को डाइबिटीज है उनको उपवास रखने या फिर एक बार में बहुत अधिक खाने दोनों से ही खतरा है। डाइबिटीज के खतरे का अनुमान आईडीएफ डाइबिटीज एटलस 2017 के आंकड़ों से लगाया जा सकता है जिसमें कहा गया है कि ”डाइबिटीज पूरी दुनिया में हर आठ सैकंड में एक व्यक्ति की जान ले रही है। पूरी दुनिया में 45.1 करोड़ लोग डाइबिटीज सेे पीडि़त हैं, जिनमें से 7.29 करोड़ अकेले भारत में हैं। डॉ. बलराम शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, एसएमएस मेडिकल कालेज, ने बताया कि त्यौहारों में जब डाइबिटीज के मरीज व्रत करने का निश्चय करतेे हैं तो प्रैक्टिकल डाइबिटीज एंड स्प्रिचुअल फास्टिंग गाइडेंस का महत्व बहुत बढ़ जाता है। डाइबिटीज में व्रत करनेे के स्वास्थ्य को जो सबसे बड़े खतरे हैं उनमें हाइपोग्लीकेमिया, हाइपरग्लीकेमिया, डीहाइड्रेशन और अत्यधिक मेटाबोलिक कॉप्लिकेशंस जैसे डाइबिटिक कीटोएसिडोसिस शामिल हैं। उपवास के दौरान हमारा शरीर तंत्र बहुत अधिक लॉट से गुजरता है और यह व्रत की अवधि पर बहुत निर्भर करता है। जब हम व्रत करते हैं तो हमारा शरीर शुरुआत में तो ग्लूकोज के संचित स्रोतों का उपयोग करता है और बाद में यह ऊर्जा के स्रोत के लिए शरीर के फैट को तोड़कर उसका इस्तेमाल करता है। यदि व्रत की अवधि 12 घंटे से अधिक है तो इंटरमिटेंट ग्लीकोजिन डिप्लेशन और रिप्लेशन की स्थिति बन सकती है। ज्यादातर शुगर मरीज जो व्रत में अपना पहला भोजन भोर या प्रभात में लेते हैं उनमें दोपहर के बाद ग्लीकोजिन डिप्लेशन की स्थित बन जाती है और इस स्थिति में कीटोजेनेसिस बन जाता है। यदि एक वक्त का भोजन छोड़ देते हैं तो व्रत वाले दिन ग्लीकोजिन स्टोर्स और कीटोसिस का डिप्लेशन बढ़ता जाता है। डॉ.अंकुर गहलोत, सीनियर कंसल्टेंट, डाइबिटीज एंड एंडोक्राइन साइंस, रूकमणी बिरला हॉस्पिटल के मुताबिक कि टाइप 2 डाइबिटीज में लोगों में मोटापा बढ़ता है औैर पेट काफी बाहर निकल आता है। मरीज का वजन जैसे-जैसे बढ़ता है डाइबिटीज की स्थिति बदतर होती जाती है। मरीज को ज्यादा इंसुलिन लेना होता है, जिसका मतलब होता है और अधिक मोटापा और वह एक दुष्चक्र में फंस जाता है। एक आसान उपवास करना और उचित रूप से परामर्श लेकर किया गया उपवास मरीज की वजन घटाने और ब्लड ग्लूकोज, ब्लड प्रेशर एवं कोलेस्ट्रोल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। हालांकि व्रत डॉक्टर सेे परामर्श के बिना नहीं करना चाहिए।

 

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