अनचाहे गर्भाधान को रोकने के सही और सुरक्षित तरीकों के बारे में जानिए

परिवार में नन्हे-मुन्ने की किलकारियां कौन नहीं चाहता, लेकिन इसका एक समय होता है, जो पति-पत्नी के जोड़े को तय करना होता है। जिस अवधि में यह जोड़ा बच्चों को जन्म नहीं देना चाहता उस वक्त उन्हें बर्थ कंट्रोल के लिए (सहवास के समय) गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना जरूरी होता है। सही और सुरक्षित गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना एक समझदारी भरा काम होता है। लेकिन गर्भनिरोधकों के चुनाव और इस्तेमाल को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी हैं। बीती 25 अक्तूबर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अनचाहे गर्भाधान और गर्भनिरोधकों के इस्तेमाल (दुरुपयोग कहना ज्यादा ठीक होगा) पर 32 देशों में किए गए अध्ययन की रिपोर्ट जारी की। डब्ल्यूएचओ न्यूज द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 56 प्रतिशत भागीदारों ने कहा कि गर्भवती होने से पहले पिछले पांच साल में उन्होंने किसी भी तरह के गर्भनिरोधक का इस्तेमाल नहीं किया। 10 प्रतिशत ने कहा कि वह अब भी परंपरागत तरीकों का ही इस्तेमाल करते हैं।
डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि निम्न से मध्यम आय वाले देशों में 7.4 करोड़ महिलाएं अनचाहे गर्भाधान का शिकार होती हैं। परिणाम 2.5 करोड़ असुरक्षित गर्भपात और शिशु के जन्म के वक्त हर साल तकरीबन 47 हजार माताओं की मौत।
डॉ. शहनाज जफर के मुताबिक अगर आप परिवार बढ़ाना नहीं चाहते, तो आपको एक नियमित गर्भनिरोधक तरीके का चयन करना चाहिए। समझने की कोशिश कीजिए कि अनवांटेड 72 (शारीरिक संबंध बनने के 12 से 72 घंटे बाद ली जाने वाली गोली) बार-बार लेने से आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। हां, हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग सामान्य है। अनवांटेड में हार्मोन्स होते हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकॉलॉजिस्ट) डॉ. जफर दिन में दर्जनों बार टेलीफोन पर ऐसी सलाह देती रहती हैं। समस्या की जड़ है-गर्भनिरोधक के इस्तेमाल को लेकर सभी ओर फैली ढेर सारी भ्रांतियां। डॉ. जफर कहती हैं,योजनाबद्ध तरीके से किया गया गर्भाधान खुशहाल और स्वस्थ संबंधों का प्रतीक हो सकता है। कंडोम, गर्भनिरोधक गोली, इंट्रायूटेरिन उपकरणों जैसे अनेक विकल्प मौजूद होते हुए भी लोग यही तय नहीं कर पाते कि उनके लिए क्या बेहतर होगा।वह बताती हैं, “सच्चाई तो यह है कि हर तरीके के कुछ फायदे हैं। तो देखें डॉ. जफर की राय में आज उपलब्ध लोकप्रिय गर्भनिरोधक तरीके कौन से हैं ताकि आपका चयन का काम आसान हो सके:
इंट्रायूटेरिन डिवाइस- कॉपर टी के नाम से मशहूर यह पुर्जा कैसे और क्यों गर्भाधान रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसके लिए इसे डॉक्टर से समझ लेना चाहिए। मामला थोड़ा तकनीकी है इसलिए डॉक्टर से इस संबंध में पूरी बात करनी चाहिए। अगर आपका अगले पांच साल तक गर्भवती होने का कोई इरादा न हो तो इंट्रायूटेरिन डिवाइस (आईयूडी) एक बेहतर विकल्प है। यह टी के आकार का प्लास्टिक का एक उपकरण होता है, जो आपके गर्भाशय के छिद्र (यूटेरिन कैविटी) में लगा दिया जाता है। आईयूडी दो तरह की होती हैं-कॉपर आईयूडी और हार्मोनल आईयूडी। कॉपर आईयूडी शुक्राणु को मारकर या उसके तैरने का तरीका बदलकर भ्रूण को पनपने से रोकती है। हार्मोनल आईयूडी में सर्विक्स में मकस को गाढ़ा करने के लिए प्रोजेस्टिन हार्मोन रिलीज करती है, ताकि शुक्राणु डिंब से न मिल सके या कुछ साल के लिए डिंबक्षरण (ओव्यूलेशन) को रोक देता है (यह आपके द्वारा इस्तेमाल उपकरण पर निर्भर है)। आईयूडी 99 प्रतिशत कारगर होते हैं। गर्भाशय के भीतर होने के कारण वह आपकी जरुरत के वक्त वहां मौजूद होते हैं। एक अन्य विकल्प बर्थ कंट्रोल इम्प्लांट्स है, जिसमें हार्मोन प्रोजेस्टिन होता है। यह ऊपरी बांह में इम्प्लांट किया जाता है।
गर्भनिरोधक गोलियां-ठीक हार्मोनल आईयूडी की तरह गर्भनिरोधक गोलियों में हार्मोन, मुख्यतया प्रोजेस्टिन और एस्ट्रोजेन होते हैं। ये भी गर्भाधान को रोकने में 99 प्रतिशत तक कारगर होती हैं। आपकी जरूरत के मुताबिक स्त्री रोग विशेषज्ञ या गायनाकॉलॉजिस्ट आपको एक कॉम्बिनेशन (जिसमें प्रोजेस्टिन व एस्ट्रोजेन दोनों हो) या फिर मिनी पिल (केवल प्रोजेस्टिन) गोली दे सकता है। डॉ. जफर कहती हैं, इन हार्मोन्स के प्रति संवेदनशील लोगों को हम कम डोज भी देते हैं। कई मर्तबा मरीज इन गोलियों के साइड इफेक्ट्स को लेकर चिंतित होते हैं। गर्भनिरोधक गोलियां 1950 के दशक से इस्तेमाल की जा रही हैं- इनमें बहुत ज्यादा रिसर्च उन्हें सुरक्षित बना रहा है। गर्भनिरोधक गोलियां ओवेरियन कैंसर की आशंका को भी कम कर देती हैं। गायनेकॉलॉजिस्ट्स तो पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीओसीडी) के लक्षण वाली महिलाओं को भी यह गोलियां देती हैं।
कंडोम- गर्भाधान और यौन संबंधों से होने वाली बीमारियों (एसटीडी) को रोकने के लिए कंडोम एक बाधा की तरह काम करता है। कंडोम की कामयाबी की दर थोड़ी कम यानी तकरीबन 98 प्रतिशत होती है, क्योंकि यौन संबंधों के दौरान सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किए जाने पर यह फट भी सकता है। डॉ. जफर कहती हैं, कृपया याद रखिए, कंडोम दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
गोली बनाम आईयूडी- इन दोनों में किसका चयन किया जाना चाहिए। डॉ. जफर ने दोनों के नफे औऱ नुकसान का खुलासा किया है ताकि आप बेहतर विकल्प को चुन सकें:
– गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल स्तनों को नरम बना सकता है। आईयूडी नहीं।
– आईयूडी के कारण मासिक धर्म दो-तीन महीने अनियमित हो सकता है-दरअसल वह गर्भाशय के भीतर अच्छी तरह से स्थापित होने के लिए कुछ वक्त लेते हैं।
– आईयूडी के कारण आपको हर रोज याद रखने की जरूरत नहीं, जबकि गोलियों में तो आपको हर रोज तय समय पर गोली लेनी ही पड़ेगी।
– अगर आप पेल्विक इन्फेक्शन, एसटीडी, यूटेरियन या सर्विकल कैंसर की शिकार हैं या अंतिम तिमाही में आपका गर्भपात हो चुका है तो आईयूडी लगाना आपके लिए ठीक नहीं है।
– आईयूडी हाइपरटेंशन की मरीज महिलाओं के लिए बेहतर है, क्योंकि कुछ गर्भनिरोधक गोलियों से कार्डियोवेस्कुलर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। किसी भी तरीके के चयन से पहले अपनी गायनेकॉलॉजिस्ट की सलाह जरूर ले लें।
– गोलियों या हार्मोनल आईयूडी से मिलने वाले अतिरिक्त हार्मोन नहीं चाहने वाली या सहन कर पाने वाली महिलाओं के लिए कॉपर आईयूडी ज्यादा प्रभावी तरीका है। आपका डॉक्टर कॉपर आईयूडी के बाद भी अतिरिक्त सावधानी के तौर पर आपको गर्भनिरोधक गोली दे सकता है।
आप जो चाहें तरीका अपनाएं, लेकिन एसटीडी से बचने के लिए तो कंडोम का इस्तेमाल ही सबसे कारगर तरीका है।

 

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