जयपुर में इन्फर्टिलिटी, गर्भनिरोधक और डायबिटीज संबंधी सवाल अधिक पूछे जा रहे : लाइब्रेट हैल्थस्केप इंडिया

जयपुर, 28 जून (एजेन्सी)। लाइब्रेट हैल्थस्केप इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर में डायबिटीज के साथ-साथ इन्फर्टिलिटी एवं गर्भनिरोधक जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पिछले वर्ष के दौरान लोगों ने डॉक्टरों से बहुत अधिक पूछताछ की। यह बहुत ही उत्साहजनक है और संकेत देता है कि शहर में लोग खासतौर पर मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य और लाइफस्टायल से जुड़ी बीमारियों को लेकर अधिक से अधिक जागरूक हो रहे हैं। यह आंकड़े लाइब्रेट के ऑनलाइन प्लेटफार्म पर 1 जनवरी, 2017 से लेकर 12 महीने के दौरान हुए लगभग 17 लाख इंटरैक्शन के विश्लेषण के बाद जारी किये गये हैं। इनमें लैब टैस्ट के लिए बुकिंग के अनुरोध भी शामिल हैं। भारत के पहले और सबसे बड़े ऑनलाइन डॉक्टर कंसल्टेशन प्लेटफार्म-लाइब्रेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि जयपुर में करीब 31 प्रतिशत लोगों ने इन्फर्टिलिटी और गर्भनिरोधक के लिए डॉक्टरों से परामर्श किया, जबकि 30 प्रतिशत लोगों ने डायबिटीज से संबंधित मुद्दों के लिए संपर्क किया। आंकड़े बताते हैं कि इन्फर्टिलिटी और गर्भनिरोधक अब वर्जित विषय नहीं हैं और लोग इनके बारे में खुल कर बात कर रहे हैं। यहां तक कि अब समाज क्या सोचेगा जैसी बातों का डर कम हुआ है, जो साबित करता है कि लाइब्रेट जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्मों ने गुमनामी और गोपनीयता की सुविधा प्रदान कर लोगों को खुल कर बात करने की सहूलियत प्रदान की है। हालांकि, टियर 1 शहरों के विपरीत, ऐसा लगता है कि केवल 14 प्रतिशत लोगों ने व्यावहारिक और मनोवैज्ञानिक मुद्दों पर सलाह की तलाश की है। लाइब्रेट के संस्थापक व सीईओ सौरभ अरोड़ा ने कहा कि इसे एक सकारात्मक प्रवृत्ति कहा जायेगा कि लोग अब मनोवैज्ञानिक रूप से स्वस्थ रहने के बारे में चिंतित हैं, जागरूक हो रहे हैं और हैल्थकेयर विशेषज्ञों तक पहुंच रहे हैं। यह सब इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि माता-पिता और प्रियजन भी अपने बच्चों और स्वयं को एक-दूसरे से बेहतर तरीके से जुडऩे और किसी भी व्यवहारिक मुद्दे को हल करने में मदद चाहते हैं। हम सभी अपने मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य की अनदेखी करते हैं और यह नहीं समझते कि यह हमारे समग्र स्वास्थ्य की कुंजी है। मनोवैज्ञानिक रूप से स्वस्थ होने पर हम जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचते हैं, जो देश भर में स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।

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