अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट नहीं भारतीय : सर्वे

 

बेंगलुरु, 27 दिसंबर (एजेन्सी)। भारतीयों के लिए अपने जीवन के प्रमुख लक्ष्यों की योजना बनाने के लिए जीवन बीमा सबसे पसंदीदा वित्तीय साधन है। जैसे घर बनाना (43 फीसदी), बच्चों की शिक्षा (38 फीसदी), सेवानिवृत्ति (49 फीसदी) और विरासत तैयार कना (50 फीसदी)। जब बच्चों के विवाह की योजना बनाने की बात आती है तो वे जीवन बीमा के अलावा सावधि जमा पर भरोसा करते हैं। 30 फीसदी उत्तरदाताओं ने स्वीकार किया कि उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि जीवन बीमा कवर कितना आवश्यक है, इससे पता चलता है कि भारतीयों के बीच अपनी सुरक्षा को लेकर कितनी लापरवाही है। उपरोक्त निष्कर्ष, एक्साइड लाइफ इंश्योरेंस की ओर से किए गए 2018 मनी हैबिट्स सर्वे के कई निष्कर्षों में से एक है। सर्वेक्षण का उद्देश्य वित्तीय जिम्मेदारी और समझ को लेकर भारतीयों की धारणाओं को सामने लाना था। एक्साइड लाइफ इंश्योरेंस में मार्केटिंग और डायरेक्ट चैनल के निदेशक मोहित गोयल ने कहा कि समझने के लिहाज से वित्तीय जिम्मेदारी एक जटिल अवधारणा हो सकती है क्योंकि वित्तीय जिम्मेदारी लगातार बदलती रहती है। वित्तीय जिम्मेदारी की अवधारणा, पर्याप्त जीवन बीमा कवर के माध्यम से सुरक्षा के विचार के साथ भी जुड़ी हुई है। आर्थिक सर्वेक्षण 2018 में कहा गया है कि भारत में वर्तमान जीवन बीमा पैठ अन्य विकासशील देशों की तुलना में 3 फीसदी से कम है। इसकी पुष्टि हमारे 2018 मनी हैबिट्स सर्वेक्षण के निष्कर्षों से भी होती है, जिसमें सर्वेक्षण में शामिल भारतीयों के 30 फीसदी के साथ व्यक्तिगत बीमा कवर को लेकर अभी भी अनिश्चितता है। भारत सरकार के साथ-साथ बीमा उद्योग द्वारा वित्तीय साक्षरता पर जोर देने के बावजूद, लोग अभी भी अपने और अपने परिवार के लिए आवश्यक सुरक्षा के स्तर को मापने में असमर्थ हैं। सर्वेक्षण में शामिल 46 फीसदी भारतीयों को लगता है कि जीवन बीमा कवर को उनकी वार्षिक आय का कम से कम 10 गुना होना चाहिए, लेकिन केवल 29 फीसदी व्यक्तियों के पास ही ऐसा कवर है।

 

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