बैंकों का फंसा कर्ज मार्च तक कुल उधार का 10.5 फीसदी होगा

नई दिल्ली। बैंकों का फंसा कर्ज या गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) अगले साल मार्च तक कुल उधार का 10.5 फीसदी तक पहुंच जाएगा, जबकि इस साल मार्च में यह 9.5 फीसदी पर था. घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी. बैंकिंग प्रणाली 31 मार्च 2017 तक कुल फंसे कजरे (तनावग्रस्त परिसंपत्यिों) के दो-तिहाई को एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्तियां) घोषित कर चुकी है.रिपोर्ट में कहा गया, हाल फिलहाल जिसे एनपीए घोषित किया गया है, उसमें चालू वित्त वर्ष में कमी आने की उम्मीद है. लेकिन पुराने फंसे कर्जो की वजह से तनावग्रस्त परिसंपत्तियों में वृद्धि होगी. क्रिसिल रेटिंग के वरिष्ठ निदेशक कृष्णन सीतारमण ने कहा, पिछले कुछ सालों से बैंकों के फंसे हुए बड़े कर्जो की वसूली नहीं हो पाई है, जिसे बैंकों ने राइट ऑफ (फंसे कर्ज को बट्टे खाते में डालना) कर दिया. इससे एनपीए में वृद्धि हुई है.ढुलमुल आर्थिक विकास के कारण कई क्षेत्रों में मंदी छाई है, जिससे फंसे कर्जों की वसूली नहीं हो पा रही है. बैंकिंग प्रणाली के फंसे हुए कर्जे जिन क्षेत्रों में ज्यादा है, उसमें अवसंरचना, बिजली, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्र हैं. रिपोर्ट में कहा गया, ज्यादातर तनावग्रस्त परिसंपत्तियों को अब एनपीए मान लिया गया है. इसलिए बाकी बचे कर्जे मध्यम अवधि में बैंकों के लिए बेहतर प्रदर्शन करेंगे.क्रिसिल रेटिंग के अध्यक्ष गुरप्रीत चटवाल ने कहा, हालांकि एमएसएमई (छोटे, मझोले उद्योग) और कृषि ऋण में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने व ऋण छूट के कारण गिरावट दिख सकती है. लेकिन यह बैंकों की सेहत पर उतना असर नहीं डालेगा, जितना कॉर्पोरेट कंपनियों को दिए गए बैंकों का कर्ज फंसने से हुआ है क्रिसिल के मुताबिक बैंकिंग प्रणाली का कुल फंसा हुआ कर्ज करीब 11.5 लाख करोड़ रुपये है जो कुल दिए गए उधार का 14 फीसदी है।बैंकिंग सेक्टर में खत्म हो जाएंगी अगले 5 साल में 30 फीसदी नौकरियां: आज देश भर में बहुत से युवा हैं जो स्नातक करने के बाद बैंकिंग सेक्टर को एक बेहतर करियर विकल्प के रूप में देखते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि तकनीकि विकास के चलते बैंकिंग में जॉब्स कम होती जा रही हैं. सिटीबैंक के पूर्व सीईओ विक्रम पंडित के अनुसार अगले 5 सालों में 30त्न बैंकिंग जॉब्स खत्म हो जाएंगी. पंडित ने इसका कारण आधुनिकीकरण को बताया है. एक चैनल को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जिस तरह से बैंकों में आर्टिफि?शियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स का इस्तेमाल हो रहा है, उस हिसाब से नौकरी की संख्या में कमी आ सकती है.ऐसा पहली बार नहीं है कि किसी एक्सपर्ट ने बैंकिंग सेक्टर में कम होने वाली नौकरियों के बारे में आगाह किया है. इससे पहले बीसीजी ग्रुप के डायरेक्टर सौरभ त्रिपाठी ने कहा था कि अगले तीन वर्षों में निचले स्तर के कर्मचारियों (जैसे डेटा एंट्री) की जरूरत नहीं रह जाएगी.आपको बता दें कि बैंकिंग क्षेत्र में टेक्नोलॉजी लगातार एडवांस होती जा रही है. अब आप सब कुछ घर बैठे ऑनलाइन कर सकते हैं. सभी बैंकों ने इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग सेवाएं शुरू कर दी हैं. कैश लेन-देन से लेकर चेक बुक तक के लिए आप ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. इतना ही नहीं पास बुक पर एंट्री करने के लिए भी बैंक जाना जरूरी नहीं है. पैसे जमा करने के लिए भी मशीन लग गई हैं, इससे मैनपॉवर में बहुत कमी आई है.

 

 

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