सिंगल ब्रैंड रिटेलिंग के लिए हट सकती है लोकल सोर्सिंग की शर्त

 

ज्यादा विदेशी निवेश का रास्ता बनाने के लिए सरकार लोकल सोर्सिंग की शर्त नरम कर सकती है या इसे पूरी तरह हटा सकती है। वर्ष-दर-वर्ष की बंदिशों को आसान बनाने की जरूरत है। वार्षिक जरूरत की शर्त में छूट दी जा सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिंगल ब्रांड रिटेल में लोकल सोर्सिंग से जुड़े नियमों में छूट दी जाएगी।
नई दिल्ली। देश में सिंगल-ब्रैंड रिटेलिंग के लिए लोकल सोर्सिंग की शर्त हट सकती है क्योंकि सरकार ऐपल जैसी कंपनियों की ओर से देश में इन्वेस्टमेंट में बढ़ोतरी चाहती है। फाइनैंस सेक्रटरी सुभाष गर्ग ने बताया, यह स्पष्ट कहा गया है कि सिंगल ब्रांड रिटेल ट्रेडिंग के लिए लोकल सोर्सिंग की शर्त पुराने समय की एक व्यवस्था जैसी है। इसकी अब जरूरत नहीं है।यह पूछने पर कि क्या इस शर्त को हटाया या कमजोर किया जाएगा, गर्ग ने कहा कि दोनों ही विकल्पों पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने बताया, ‘सिंगल ब्रांड रिटेलिंग से लोकल सोर्सिंग की शर्त को पूरी तरह हटाने का प्रपोजल हो सकता है। इसके अलावा इसमें कुछ छूट दी जा सकती है जिससे इन कंपनियों के लिए काफी आसानी होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आम बजट से जुड़े भाषण में बताया था कि सिंगल ब्रैंड रिटेल में लोकल सोर्सिंग से जुड़े नियमों में छूट दी जाएगी। फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट पॉलिसी में सिंगल-ब्रांड रिटेल में ऑटोमैटिक रूट के जरिए 100 पर्सेंट विदेशी निवेश की अनुमति है, लेकिन इसके लिए निवेशक को बेचे जाने वाले गुड्स की वैल्यू के 30 पर्सेंट हिस्से के बराबर कीमत का माल भारत से ही खरीदना होता है। इस शर्त को पहला स्टोर खोलने के वर्ष में 1 अप्रैल से पांच वर्ष के लिए खरीदे गए गुड्स की वैल्यू के एक औसत के तौर पर पूरा करना होता है। इसके बाद से यह शर्त सालाना पूरी करनी होती है। यह स्पष्ट कहा गया है कि सिंगल ब्रांड रिटेल ट्रेडिंग के लिए लोकल सोर्सिंग की शर्त पुराने समय की एक व्यवस्था जैसी है। इसकी अब जरूरत नहीं है। शर्त को पूरी तरह हटाने का प्रपोजल हो सकता है या इसमें कुछ छूट दी जा सकती है।
-सुभाष गर्ग, फाइनैंस सेक्रटरी
इस पॉलिसी में इन्वेस्टर्स को अपने ग्लोबल बिजनस के लिए की गई सोर्सिंग को लोकल आउटलेट्स के लिए 30 पर्सेंट की शर्त के बदले इस्तेमाल करने की भी अनुमति है। हालांकि यह केवल शुरुआती पांच वर्षों के लिए है और इसके बाद 30 पर्सेंट सोर्सिंग केवल भारत के बिजनस के लिए करनी होगी।
सालाना जरूरत की शर्त में छूट!
डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री ऐंड इंटरनल ट्रेड के एक अधिकारी ने कहा कि वर्ष-दर-वर्ष की बंदिशों को आसान बनाने की जरूरत है। वार्षिक जरूरत की शर्त में छूट दी जा सकती है। डायरेक्ट फॉरेन इनवेस्टमेंट मामलों से जुड़े एक विशेषज्ञ ने कहा, वर्ष-दर-वर्ष की शर्त ठीक नहीं है और बड़े एक्सपोर्टर्स को इससे नुकसान होता है। अगर कोई कंपनी सोर्सिंग की जरूरत पूरी कर रही है तो इससे फर्क नहीं पड़ता कि वह देश में गुड्स बेच रही है या एक्सपोर्ट कर रही है। 2018-19 में देश में स्नष्ठढ्ढ इक्विटी इन्फ्लो 1 पर्सेंट घटकर 44.4 अरब डॉलर रहा, जो इससे पिछले फाइनैंशल इयर में 44.8 अरब डॉलर था। इसमे छह वर्षों में पहली बार गिरावट आई है। रिटेल ट्रेडिंग सेक्टर में अप्रैल 2000 से मार्च 2019 के बीच 1.65 अरब डॉलर का स्नष्ठढ्ढ आया था।

 

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