पहली नजर का प्यार कहावत नहीं हकीकत

मनोवैज्ञानिकों ने कहा- कभी न भुलाया जा सकने वाला एहसास पाया

पहली नजर का प्यार सिर्फ कहावत नहीं बल्कि हकीकत है। दार्शनिक तो सुंदरता के इस जादू से सदियों से इत्तेफाक रखते ही थे लेकिन अब मनोवैज्ञानिकों ने भी एक ताजा अध्ययन मे पहली नजर के प्यार को सच और कभी न भूलाया जा सकने वाला एहसास पाया है। पहली नजर के प्यार का एहसास अपनी पसंदीदा मिठाई को मुंह में रखने से मिलने वाले आनंद से भी अधिक होता है और यह तेजी से असर भी करता है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में हुए नए शोध में मनोविज्ञानियों ने दावा किया है कि पहली नजर का प्यार एक मिनट, एक दिन से लेकर, जीवन भर तक के लिए उत्साहित कर सकता है। शोध में दावा किया गया कि यह बस उस एक पल की बात होती है जिसमें देखने वाले को एहसास होता है कि उसे सुंदरता दिख गई है और वह उसमें खोकर अनंत सुख का अनुभव करना चाहता है।
भूल जाता है सब कुछ -हिंदी सिनेमा का मशहूर गीत है ‘भूल गया सब कुछ याद नहीं अब कुछ। शोध में शामिल न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर डेनिस पेली कहते हैं कि जब इंसान को अपने पहले प्यार का पहला दीदार होता है तो वह सबकुछ भूल जाता है। वह कहते हैं कि इस पल व्यक्ति अपने मुंह में पड़ी उसकी पसंदीदा टॉफी के सुख को भुलाकर अपने प्यार की ओर ध्यान लगा लेता है। उसकी सुंदरता ही उसे परम आनंद देती है।
एक सेकेंड का समय-न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया कि सुंदरता को महसूस करने में सिर्फ एक सेकेंड का समय लगता है। हालांकि पहले के शोध में कहा जाता था कि इसे मापना संभव नहीं है। इसमें बताया गया था कि जब कुछ सुंदर दिखाई देता है तो इससे तीव्र आनंद का अनुभव होता है। डेनिश पेली ने बताया कि सुंदरता को देखने के बाद आप अपनी पंसदीदा वस्तु को भी भूल जाते हैं।
विशेष प्रकार की खुशी मिलती
यह शोध करेंट बॉयोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया गया है कि सुंदरता को कैसे मापते हैं। साथ ही यह दिन प्रतिदिन के जीवन में हमारे कार्यों को कैसे प्रभावित करती है। डेनिश ने बताया कि लंबे समय से दार्शनिकों का मानना है कि सुंदरता की भावना एक विशेष प्रकार की खुशी मिलती है। उन्होंने बताया कि शोध के विश्लेषण से पता चलता है कि सुंदरता की भावना से परम आनंद की आनुभूति होती है, लेकिन विशेष कुछ नहीं।
2500 साल पुराने लेखों और शोध का विश्लेषण-पहली नजर के प्यार के विश्लेषण के लिए 2500 साल पुराने लेखों और शोध पत्रों का विश्लेषण किया गया। इसमें ग्रीस के दार्शनिक प्लेटो से लेकर 18वी सदी के जर्मन दार्शनिक अलेक्जेंडर बामगार्टन, 19वीं सदी के नाट्य लेखक ऑस्कर वाइल्ड और मनोवैज्ञानी गुस्तोव फेचनर समेत तंत्रिका विज्ञान के लेख और शोध पत्र शामिल हैं।

 

 

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