एमटीएनएल ने बढ़ाए 4-जी लांच की तरफ कदम

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) ने 4-जी सेवा लांच करने की तैयारी की है। इसके लिए कंपनी ने सरकार से दो बैंड्स के अधीन स्पेक्ट्रम आवंटन की गुजारिश की है, ताकि 4-जी सेवा शुरू की जा सके। कंपनी ने कहा है कि वह स्पेक्ट्रम बदले में सरकार को इक्विटी शेयर देने को तैयार है।एमटीएनएल के चेयरमैन व एमडी (सीएमडी) आर. के. पुरवार ने रविवार को कहा कि कंपनी ने टेलीकॉम विभाग (डॉट) को पत्र लिखकर 1,800 तथा 2,100 मेगाहर्ट्ज बैंड के तहत स्पेक्ट्रम की मांग की है। पुरवार का कहना था कि टेलीकॉम सेक्टर की मौजूदा गलाकाट स्पर्धा की स्थिति में बाजार में बने रहने के लिए कंपनी के पास 4-जी सेवा होनी ही चाहिए। गौरतलब है कि एमटीएनएल सिर्फ दो टेलीकॉम सर्किल, दिल्ली व मुंबई में सेवाएं दे रही है। पुरवार ने कहा, वर्तमान में 85 फीसद से ज्यादा डाटा डाउनलोड 4-जी के जरिये हो रहा है। ऐसे में टेलीकॉम सेक्टर में परिचालन कर रही छोटी से छोटी या बड़ी से बड़ी कंपनी के पास 4-जी स्पेक्ट्रम होना नितांत जरूरी है। हमने हाल ही में सरकार से स्पेक्ट्रम मांगा है।एमटीएनएल ने 4-जी सेवा लांच करने के लिए सरकार से दिल्ली में 10 मेगाहर्ट्ज 1,800 बैंड, जबकि मुंबई में पांच मेगाहर्ट्ज 2,100 बैंड की मांग की है। वर्तमान में कंपनी के पास 900, 1,800 तथा 2,100 बैंड्स में स्पेक्ट्रम उपलब्ध हैं। इनमें से 3-जी सेवा के लिए 1,800 बैंड के 2.2 मेगाहर्ट्ज, जबकि 2,100 बैंड के पांच हर्ट्ज स्पेक्ट्रम का उपयोग हो रहा है।पुरवार ने कहा कि कंपनी की प्रमोटर होने के बावजूद लाइसेंस प्रदाता के तौर पर सरकार कंपनी से स्पेक्ट्रम के बदले शुल्क लेने को बाध्य है। कंपनी को जरूरी स्पेक्ट्रम के लिए करीब 6,500 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। कंपनी मौजूदा बाजार भाव पर सरकार को इस रकम के एवज में इक्विटी देने को तैयार है।गौरतलब है कि सार्वजनिक क्षेत्र की दोनों टेलीकॉम कंपनियां, एमटीएनएल व भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) कई वर्षों से घाटे में चल रही हैं। इस वर्ष फरवरी में लोकसभा में टेलीकॉम मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा था कि सार्वजनिक उपक्रम विभाग (डीपीई) के मानकों के तहत दोनों कंपनियों को बीमार होने की तरफ बढ़ चुकी कंपनियों के तौर पर घोषित किया जा चुका है। हालांकि पिछले कुछ समय के दौरान पुरवार जोर देकर कहते रहे हैं कि कंपनी को उबारने की दिशा में लगातार काम चल रहा है और इसके बिकने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है। एमटीएनएल में सरकार की 56 फीसद, जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) की 19 फीसद हिस्सेदारी है। कंपनी पर फिलहाल करीब 17,000 करोड़ रुपये का कर्ज है।

 

 

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