फर्जी वसीयत मामले मेें पहली गिरफ्तारी – दिवंगत भाई की दूसरी पत्नी को हक से वंचित करने का मामला

श्रीगंगानगर, 15 मई (का.सं.)। मटीलीराठान थाना क्षेत्र के एक बहुचर्चित मामले में लगभग दो वर्ष तक जांच-पड़ताल करने के बाद पुलिस ने मंगलवार को पहली गिरफ्तारी की। यह बहुचर्चित मामला एक दिवंगत व्यक्ति की फर्जी वसीयत बनाकर उसकी दूसरी पत्नी को उसके हक से वंचित करने का है। पुलिस ने इस दिवंगत व्यक्ति के भाई ताराचंद पुत्र सहीराम जाट निवासी मिर्जेवाला को गिरफ्तार कर मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि धोखाधड़ी, जालसाजी, अमानत में खयानत के सबूत षडय़ंत्रपूर्वक नष्ट करने का यह मामला 2016 में मटीलीराठान थाना में गिरदावरीदेवी निवासी चक 34 एलएनपी ने दर्ज करवाया था। इस प्रकरण की सबसे पहले जांच तत्कालीन थानाप्रभारी पीडी शर्मा ने की। इसके बाद तत्कालीन डीएसपी बचन सिंह और मौजूदा डीएसपी (ग्रामीण) दिनेश मीणा ने की। फिलवक्त इस मामले की जांच डीएसपी (शहर) तुलसीदास पुरोहित कर रहे हैं। इस मामले मेें ताराचंद के दिवंगत भाई देवीलाल की पहली पत्नी जैतादेवी की एक पुत्री मग्गोदेवी तथा एक गवाह भी वांछित हैं। पुलिस ने बताया कि देवीलाल के पहली पत्नी जैतोदेवी से दो संतान मग्गोदेवी व मंचोदेवी हैं। जैतादेवी का निधन हो जाने पर देवीलाल ने गिरदावरी देवी से दूसरी शादी की, जिससे उसके एक पुत्री इमरतीदेवी हुई। देवीलाल का वर्ष 2006 में निधन हो गया। गिरदावरीदेवी अपनी पुत्री इमरतीदेवी को लेकर पति का देहांत होने से सवा 17 वर्ष पहले ही पीहर चली गई थी। देवीलाल के हिस्से में 18 बीघा जमीन थी, जिसे उसने अपनी पहली पत्नी से दोनों पुत्रियों, दूसरी पत्नी व उससे हुई पुत्री को बराबर साढ़े 4-साढ़े 4 बीघा दे दी। इसका इंतकाल भी इनके नाम दर्ज करवा दिया। पुलिस के अनुसार मग्गोदेवी ने वर्ष 2008 में एसडीएम के समक्ष एक वसीयत की फोटो कॉपी पेश करते हुए दावा किया कि उसके पिता ने अपनी 18 बीघा में से 13 बीघा जमीन उसके नाम तथा पांच बीघा जमीन उसकी बहन के नाम कर दी थी। गिरदावरीदेवी और उसकी पुत्री को उसके पिता ने इस कारण जमीन का हिस्सा नहीं दिया, क्योंकि वह कईं वर्ष पहले उसके पिता को छोड़कर अपनी पुत्री सहित चली गई थी। यह दावा अदम पैरवी खारिज हो गया। इस दावे को रिस्टोर करने के लिए 2013 में मग्गोदेवी द्वारा फिर से प्रार्थना पत्र दिया गया। इस बीच गिरदावरीदेवी ने 2016 में बपनं पकम देवीलाल के भाई ताराचंद, मग्गोदेवी व एक गवाह के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करवा दिया कि इन सबने षडय़ंत्र रचकर उसके पति के नाम की फर्जी वसीयत तैयार की है, जिसके जरिये उसके हक से उसे वंचित करने का षडय़ंत्र रचा जा रहा है। पुलिस ने बताया कि इस पूरे मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि मग्गोदेवी ने 2008 में एसडीएम के समक्ष दावे के साथ जो वसीयत की फोटो कॉपी पेश की थी, उसकी मूल कॉपी जांच-पड़ताल के दौरान पेश ही नहीं की गई। महज फोटो कॉपी के आधार पर ही मग्गोदेवी पूरी जमीन पर हक जमाने लगी थी। पुलिस के अनुसार मृतक देवीलाल की 18 बीघा भूमि को उसका भाई ताराचंद ही काश्त करता था, लेकिन जब गिरदावरीदेवी ने मुकदमा दर्ज करवा दिया और पुलिस की जांच-पड़ताल में फर्जीवाड़ा पकड़ में आने लगा, तब इसमें से 9 बीघा जमीन गिरदावरीदेवी और उसकी पुत्री इमरतीदेवी को सौंप दी। इस 9 बीघा जमीन पर इस मंा-बेटी का कब्जा बताया जाता है, लेकिन फर्जी वसीयत बनाने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तारियां शुरू कर दी है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *