जी.एस.टी से अतिरिक्त आय के साथ मण्डी शुल्क की आय में भी वृद्धि: यशवन्त

जयपुर। राज्य में जी.एस.टी. एवं मण्डी शुल्क के संग्रहण की समीक्षा के संबंध में शुक्रवार को वाणिज्यिक कर आयुक्त प्रीतम बी. यशवन्त की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई। जिसमें चीनी से प्राप्त जी.एस.टी. एवं मण्डी शुल्क के आंकड़ों पर विस्तार से चर्चा की गयी। बैठक में वाणिज्य कर आयुक्त ने बताया कि ई-वे बिल व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य को जी.एस.टी से अतिरिक्त आय के साथ मण्डी शुल्क की आय में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि हाल ही में कर चोरी के कुछ बड़े प्रकरण सामने आये हैं जिसमेें विभिन्न दल गठित कर अनुसंधान किया जा रहा है साथ ही राज्य के बाहर की फर्मो की भी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के कई स्थानों पर इस प्रकार के प्रकरण भी सामने आये है कि कुछ फर्मो द्वारा जी.एस.टी. का भुगतान किया गया है किन्तु संदर्भित फर्मो द्वारा मण्डी शुल्क नहीं चुकाया गया है। ऐसी भी फर्मे हो सकती है जिनके द्वारा जी.एस.टी. एवं मण्डी शुल्क दोनों की कर अदायगी नही कर करों की चोरी की जा रही है। बैठक में निर्णय लिया गया कि वाणिज्यिक विभाग एवं राजस्थान कृषि विपणन विभाग जी.एस.टी. तथा मण्डी शुल्क से संबंधित आंकडों का आदान प्रदान करेंगे एवं अन्तरविभागीय बैठक एवं कार्यवाही कर जी.एस.टी एवं मण्डी शुल्क की प्रभावी वसूली सुनिश्चित करेंगे। वाणिज्यक कर विभाग के पंजीकृत व्यापारियों द्वारा चुकाये गये जी.एस.टी की सूचना मण्डी समितियों को नियमित रूप से दी जावेगी तथा मंडी समितियों द्वारा उनके अनुज्ञापत्रधारी व्यापारियों द्वारा किये गये सव्यवहारों एवं चुकाये गये मण्डी शुल्क के संबंध में आंकडे वाणिज्य कर विभाग के संबंधित अधिकारियों एवं चुकाये गये मण्डी शुल्क के संबंध में आंकडे वाणिज्य कर विभाग के संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराये जायेंगे। क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा इस प्रक्रिया की सतत् निगरानी रखी जायेगी। आवश्यकता होने पर दोनों विभागों द्वारा संयुक्त रूप से कर अपवंचना की सूचना पर एन्टीविजन दल गठित कर कार्यवाही की जायेगी।बैठक में आयुक्त वाणिज्य कर विभाग व निदेशक कृषि विपणन विभाग द्वारा प्रतिमाह दोनों विभागों की संयुक्त बैठकें आयोजित करने पर भी सहमति व्यक्त की गई। जिससे कर चोरी के माफियाओं पर प्रभावी कार्यवाही की जा सके।बैठक में कृषि विपणन विभाग के निदेशक श्री ताराचंद मीना सहित कृषि विपणन विभाग एवं वाणिज्यिक कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

 

 

 

 

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