मच्छरों की रोकथाम को जन आंदोलन बनाएं-वीनू गुप्ता

जयपुर, 14 अक्टूबर (का.सं.)। अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य वीनू गुप्ता ने कहा है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जीका, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को उत्पन्न करने वाले मच्छरों की रोकथाम को जन आंदोलन बनाकर ही जीका सहित अन्य सभी मौसमी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण कायम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला प्रशासन, नगर निगम और महिला व बाल विकास विभाग के सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों में प्रतिदिन लगभग 280 चिकित्सा दल घर-घर जाकर दौरा कर रहे हैं एवं स्क्रीनिंग कर बुखार पीडि़त व्यक्तियों तथा गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच कर रहे हैं । गुप्ता रविवार को आकाशवाणी केंद्र जयपुर द्वारा प्रदेश के सभी आकाशवाणी केंद्रों से प्रसारित कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों का जवाब दे रही थी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौसमी बीमारियों के नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों में प्रदेशवासी सहयोग कर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में महत्वपूर्ण सहयोग कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में गुप्ता के साथ ही सवाई मानसिंह चिकित्सालय के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. रमन शर्मा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक श्री गोविंद पारीक एवं आकाशवाणी केंद्र जयपुर के निदेशक श्री प्रेम प्रकाश शर्मा ने भाग लिया। कार्यक्रम का संयोजन विविध भारती जयपुर के प्रभारी अधिकारी श्री राकेश जैन ने किया। कार्यक्रम में जयपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रोताओं ने सवाल पूछे और जीका के बारे में जानकारी ली।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जयपुर शहर में जीका वायरस के नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शनिवार तक शास्त्री नगर क्षेत्र में 76 हजार से अधिक घरों में जाकर सर्वेक्षण किया जा चुका है। इनमें से लगभग 64 हजार घरों में लार्वा पाया गया। चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम व महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त दलों ने एंटी लार्वा गतिविधियां आयोजित इस लारवा को नष्ट किया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग 2 लाख कंटेनर्स की जांच की गई है। इनमें से लगभग 50 हजार कंटेनर्स में लार्वा पाया गया और दलों ने इस लार्वा को भी नष्ट किया है। गुप्ता ने बताया कि जीका वायरस से डरने और घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह वायरस जानलेवा नहीं है।हालांकि प्रथम तिमाही की गर्भवती महिलाओं पर इसके विपरीत प्रभाव पडऩे की आशंका को ध्यान में रखते हुए प्रथम तिमाही की गर्भवती महिलाओं की देखरेख पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र से बाहर गई प्रथम तिमाही की गर्भवती महिलाओं को अभी बाहर ही रखने रहने की सलाह दी गई है। क्षेत्र में रह रही प्रथम तिमाही की गर्भवती महिलाओं को मच्छरों से बचने की विशेष हिदायत दी जा रही है । वीनू गुप्ता ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दल ने भी जयपुर के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही कार्यवाही पर संतोष व्यक्त किया है। प्रभावित क्षेत्रों के साथ ही शहर के अन्य सभी क्षेत्रों में भी सतर्कता बरती जा रही है। जिला प्रशासन व नगर निगम के सहयोग से शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। डॉ. रमन शर्मा ने बताया कि जीका जानलेवा नहीं है और जीका से डरने या घबराने की जरूरत नहीं है । उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रोग छुआ छूत का रोग नहीं है और इसका कारण मच्छरों द्वारा काटना है । मच्छरों से बचकर इस रोग से सुरक्षित रहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि संक्रमित व्यक्ति को सावधानी बरतने की जरूरत है । संक्रमित व्यक्ति चिकित्सक के परामर्श से सामान्य दवाइयां लेकर वे पूर्णतया स्वस्थ हो सकते हैं। प्रदेश में अब तक जीका से संक्रमित पाए गए 55 पॉजिटिव मामलों में से लगभग 38 व्यक्ति सामान्य दवाइयां लेकर अब जीका के लक्षणों से मुक्त हो चुके हैं।

 

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