जिला कलक्टर ने बुलाई बैठक, बताई अड़चनें

नेता का स्मारक बन सकता है, जगजीत सिंह का नहीं

श्रीगंगानगर, 6 अप्रेल (नि.स.)। किसी नेता का भले ही किसी तरह के क्षेत्र में कोई खास योगदान न हो, लेकिन उसकी स्मृति मेें सरकारी जगह या भवन में आलीशान स्मारक बन सकता है, लेकिन किसी शख्सियत ने खास क्षेत्र में उत्कृष्ट या सर्वाेगा मुकाम हासिल किया हो, तो उसकी स्मृति को संजोये रखने के लिए नियम-कायदों की अड़चनें आ जाती हैं। ऐसा ही सुविख्यात गजल सम्राट स्व. जगजीत सिंह की जन्मस्थली पर उनके स्मारक बनाये जाने को लेकर हो रहा है। श्रीगंगानगर शहर के संगीत-कला प्रेमी, विशेषकर जगजीत सिंह के कद्रदान लम्बे समय से चाह रखे हुए हैं कि इस शहर का नाम पूरी दुनिया में अपनी गजल गायकी से मशहूर करने वाले इस शख्स की जन्मस्थली पर स्मारक बनाया जाये। इस स्मारक पर उनके कद्रदान आकर उन्हें याद करें। उनकी पुण्यतिथि व जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करे। जगजीत सिंह का जन्म यहां जिला कलक्ट्रेट के नजदीक सिविल लाइंस के एक क्वार्टर में हुआ था, जहां उनका बचपन और स्कूल जीवन के दिन बीते थे। यह क्वार्टर सरकारी कर्मचारियों को आवंटित होता रहा। धीरे-धीरे इतना जीर्णशीर्ण हुआ कि अब इस क्वार्टर का भूखण्ड खाली रह गया है। इसमें बने हुए कमरे धूल धसूरित हो गये हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का श्रीगंगानगर में जनसंवाद कार्यक्रम के लिए आगमन हुआ। इससे पहले यहां के रंगकर्मी-कलाप्रेमी सागर शर्मा ने जगजीत सिंह का स्मारक बनाये जाने के लिए पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रेषित कर दिया। उनके इस पत्र पर मुख्यमंत्री कार्यालय अब हरकत में आया। सीएमओ से आये निर्देश के तहत जिला कलक्टर ज्ञानाराम ने सागर शर्मा व अन्य संगीत-कलाप्रेमियों को इस सम्बंध में वार्ता करने के लिए शुक्रवार को कलक्ट्रेट में आमंत्रित किया। सागर शर्मा के साथ उनके बड़े भाई, संगीतकार-प्रकृति प्रेमी सुभाष शर्मा गोगी, गंगानगर कला मंच के दौलतराम अनपढ़ आदि का शिष्टमण्डल कलक्टर से मिलने के लिए पहुंचा। इस वार्ता में स्मारक बनाये जाने को लेकर विभिन्न पहलुओं पर बातचीत हुई। सागर शर्मा ने बताया कि जिला कलक्टर ने सिविल लाइंस के उसी क्वार्टर वाली जगह पर स्मारक बनाये जाने में असमर्थता व्यक्त की है, जहां जगजीतसिंह का जन्म हुआ था। कलक्टर का कहना था कि इस जगह जगजीत सिंह के स्मारक के लिए सामान्य शासन विभाग (जीएडी) मंजूरी नहीं देगा। लिहाजा यहां स्मारक बनना सम्भव प्रतीत नहीं होता। इसके बनिस्पत कलक्टर ने शिष्टमण्डल से सुझाव मांगा कि शहर में किसी ओर जगह पर जगजीत सिंंह की स्मृति में स्मारक, चौक या किसी मार्ग का नामकरण किया जा सकता है, तो वे इसका प्रस्ताव बनाकर दें। सागर शर्मा ने बताया कि वार्ता में शामिल सभी कलाप्रेमियों ने कलक्टर को अगवत करवाया है कि जगजीत सिंह का स्मारक उसी जगह पर ही बनाया जाये, जहां उनका जन्म हुआ। किसी बड़ी शख्सियत की जन्मस्थली से ही उनके चाहने वालों की भावनाएं जुड़ी होती हैं। किसी ओर जगह स्मारक, चौक या मार्ग का नाम कर देने का कोई औचित्य नहीं है। इन जगहों से भावनात्मक लगाव नहीं हो सकेगा। सागर शर्मा ने बताया कि जल्दी ही सभी कलाप्रेमियों और इस क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं की ओर से सामूहिक प्रस्ताव जिला कलक्टर को दिया जायेगा कि जगजीत सिंह का स्मारक सिविल लाइन के उसी क्वार्टर पर बनाया जाये, जहां उनका जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि नेताओं-राजनीतिज्ञों के स्मारक वहां बना दिये जाते हैं, जहां उनका जन्म भी नहीं हुआ होता। फिर किसी बड़े-महान कलाकार के समारक के लिए नियम-कायदों की अड़चनें क्यों पैदा कर दी जाती हैं। सागर शर्मा ने कहा कि प्रशासन का काम प्राप्त होने वाले प्रस्ताव को जयपुर उगााधिकारियों को भेजने का है। इसके बाद ऊपर के अधिकारियों से बात की जायेगी।
जन्मस्थली की मिट्टी लेकर गया एनआरआई अभी कुछ दिन पहले ही इंग्लैंड से आये जगजीत सिंह के एक बड़े कद्रदान आप्रवासी भारतीय यहां सिविल लाइन के क्वार्टर में जाकर वहां की मिट्टी को न केवल माथे से लगाया, बल्कि उसे अपने साथ भी लेकर गया। यह कद्रदान, जगजीत सिंह का बहुत अ’छा दोस्त-मित्र है। उसके जरिये जगजीत सिंह ने इंग्लैंड में अपने कईं कार्यक्रम प्रस्तुत किये। यहां आने पर वह जिला कलक्टर से भी मिला। सागर शर्मा ने बताया कि इस कद्रदान ने कलक्टर को यहां तक प्रस्ताव दिया कि अगर इस क्वार्टर को शासन-प्रशासन मंजूरी दे दें, तो वे यहां जगजीत सिंह का भव्य स्मारक बनायेंगे। इसका सारा खर्च वह वहन करने को तैयार है। सागर शर्मा ने आज की वार्ता में कलक्टर को इसी कद्रदान की याद दिलाते हुए कहा कि जन्मस्थली से ही कद्रदानों की ऐसी भावनाएं होती हैं। किसी दूसरी जगह स्मारक बना देने से लोगों का ऐसा भावनात्मक रिश्ता नहीं बन पायेगा।

 

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