#MeToo  में लड़कियों को जस्टिस नहीं पब्लिसिटी चाहिए पल्लवी जोशी

#MeToo अभियान पर निर्देशक विवेक अग्निहोती की पत्नी और जानी-मानी अभिनेत्री पल्लवी जोशी ने कहा है कि इस पूरे अभियान में सिर्फ तीन से चार केसेस में ही सच्चाई है, बाकी सब पब्लिसिटी के लिए किया गया ड्रामा है। वह कहती हैं कि उन्हें पब्लिसिटी के लिए औरतों की इस घटिया हरकत पर शर्म आती है। अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने जब #MeToo  अभियान की शुरुआत की थी तब उन्होंने नाना पाटेकर के अलावा निर्देशक विवेक अग्निहोत्री के खिलाफ भी बयान दिया था कि वह फिल्म चॉकलेट की शूटिंग के दौरान कपड़े उतारकर फिल्म के हीरो के साथ डांस करने को कहा था। हालांकि विवेक ने तनुश्री की बातों को सिरे से नकार दिया था। अब #MeToo अभियान पर बात करते हुए विवेक अग्निहोत्री की पत्नी और जानी-मानी अभिनेत्री पल्लवी जोशी ने कहा है कि इस अभियान के तहत आई तमाम शिकायतों में सिर्फ तीन से चार शिकायतें सही हैं, बाकी सब आरोप लड़कियों ने पब्लिसिटी पाने के लिए किए हैं। राजकुमार हिरानी पर आरोप पर पल्लवी कहती हैं, राजकुमार हिरानी पर जब यौन शोषण का आरोप लगा तो मैं शॉक्ड हो गई। इस#MeToo अभियान को लेकर मेरी सोच थोड़ी अलग है। महिलाओं का असली शोषण यूपी के कई गांव में होता है। कई इलाकों में लड़कियों का घर से निकलना मुश्किल है, जैसे ही लड़कियां घर से बाहर निकलती हैं, रोड साइड रोमियों उन्हें देखते ही गंदे और घटिया कॉमेंट करने लगते हैं। वे महिलाएं हर दिन यही लाइफ जीती हैं। #MeTooअभियान पर बात करते हुए पल्लवी ने कहा, वाकई में महिलाओं की सुरक्षा और उनकी प्रताडऩा को लेकर आवाज उठानी है तो उन गांव की महिलाओं के लिए उठाइए। जब वहां के चीफ मिनिस्टर ने उन रोड साइड रोमियो को जेल में डालने की कोशिश की तब भी विरोध हुआ। उस समय कहा जाता है कि लड़के हैं, ऐसा ही करेंगे, लेकिन काम करने की जगह में जब को-वर्कर कहते हैं कि आप बहुत सुंदर लग रही हैं, तो लड़कियों को समस्या नहीं होती और जब वही साथी आपकी छाती को थोड़ा सा देख लिया तो आप यौन उत्पीडऩ का शिकार हो गईं? पल्लवी आगे कहती हैं, भाई मुझे बताइए कि बस, ट्रेन में सफऱ के दौरान कितनी बार आपकी छाती को देखा जाता है? मैं यह नहीं कह रही कि यह सही है, यह गलत है, हम महिलाओं को इस तरह की समस्या से हमेशा गुजरना पड़ता है। अब इसका यह मतलब तो नहीं कि वह हर आदमी, जो आपको घूर रहा है, आपके चेहरे की जगह नजर छाती पर रखता है, वह हर आदमी यौन शोषण कर रहा है। क्या इसका यह मतलब होता है। यौन शोषण की तमाम शिकायतों को पब्लिसिटी स्टंट बताती हुई पल्लवी ने कहा, महिलाओं ने इस बात #MeToo को इसलिए उछाला क्योंकि उनको पब्लिसिटी चाहिए। अगर शिकायत करने वाली महिलाओं को सच में जस्टिस चाहिए तो पुलिस स्टेशन, कोर्ट और जज के पास जाना चाहिए, कम्प्लेन कराइए। इस पूरे #MeTooअभियान में सिर्फ और सिर्फ तीन से चार केस ही सच्चे हैं, बाकी सब केस पब्लिसिटी के लिए किए गए हैं और इसी लिए यह सभी शिकायत करने वाली लड़कियां कोर्ट या पुलिस में न जाकर सीधा मीडिया के पास गई हैं। इन लड़कियों को जस्टिस नहीं, बल्कि पब्लिसिटी चाहिए। 5 मिनट की पब्लिसिटी के लिए आपने एक आदमी के माथे पर हमेशा के लिए कलंक लगा दिया न। अपनी बात समाप्त करती हुई पल्लवी ने कहा, आपने मीडिया में शिकायत करने से पहले यह कतई नहीं सोचा कि उसके घर में परिवार है, मां है, बहन है, पिता हैं, वाइफ और बच्चे हैं, जरा सोचिए बच्चों में क्या असर होता होगा जब वह सुनते हैं कि उनके पिता यौन शोषण करने वाले हैं? जबकि वह आदमी ऐसा नहीं है, लड़कियों ने झूठ कहा है। हम औरतें ही औरतों की दुश्मन बन गई हैं। पब्लिसिटी के लिए दूसरों को कटघरे में खड़ा करने से पीछे नहीं हैं। अब ऐसे माहौल में एक पुरुष कैसे रहेगा? हम औरतें जो जन्मदाता हैं, वही पब्लिसिटी के लिए किस हद तक जा रही हैं। औरतों को सबसे ज्यादा संवेदनशील कहा जाता है, हम मां हैं, हम एक नए समाज को जन्म देने वाली औरत हैं और हम ही ऐसी घटिया चीज कर रहे हैं। मुझे तो ऐसी औरतों पर शर्म आती है, जो औरतों के खिलाफ हैं और अपनी पब्लिसिटी के लिए इस #MeToo अभियान को बदनाम कर रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *