भारत का आधुनिकीकरण के लिए आधुनिक जल प्रबंधन जरूरी : राष्ट्रपति

नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर (एजेंसी)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत का आधुनिकीकरण जल प्रबंधन के आधुनिकीकरण पर निर्भर करता है और इस दिशा में गांव के सशक्तिकरण के लिये ‘स्थानीयकृत जल प्रबंधन पहल जरूरी है। राष्ट्रपति ने कहा कि अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और मानवीय समानता की व्यवस्था के लिये जल बुनियादी जरूरत है। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के मद्देनजर यह विषय महत्वपूर्ण बन गया है। पांचवें भारत जल सप्ताह 2017 को संबोधित करते हुए कोविंद ने कहा, ”मैं एक ऐसे जल प्रबंधन पहल की वकालत करता हूं जो स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हो। यह ऐसी व्यवस्था हो जहां जल संसाधनों के प्रबंधन, आवंटन और उसके महत्व को समझने की क्षमता हो। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की जल नीति में ”जल की अहमियत के सिद्धांत को रेखांकित किया जाना चाहिए। इसमें समुदाय समेत सभी पक्षों को जल के महत्तम सदुपयोग के बारे में प्रोत्साहित किया जाए। कोविंद ने कहा कि भारत में सरकार की कुछ महत्वाकांक्षी परियोजनओं में जल का प्रमुख स्थान है। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी अगर यह कहा जाए कि भारत का आधुनिकीकरण उसके जल संसाधनों के आधुनिकीकरण पर निर्भर करता है। यह इसलिये आश्चर्यजनक नहीं है कि हमारे देश में दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी और मात्र चार प्रतिशत जल संसाधन है। उन्होंने कहा कि ऐसे में जल का बेहतर और प्रभावी उपयोग हमारे देश की कृषि और उद्योग की दृष्टि से चुनौती है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में 54 प्रतिशत लोग अपनी आजीविका के लिये खेती पर निर्भर हैं। हालांकि राष्ट्रीय आय में उनकी हिस्सेदारी केवल 14 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि कृषि को और लाभकारी बनाने तथा कृषक समुदाय की समृद्धि के लिये सरकार ने ”हर खेत को पानी, ”हर बूंद अधिक फसल जैसी पहल के साथ साल 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने समेत कई नयी योजनाएं शुरू की हैं।कोविंद ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया अभियान के तहत भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विनिर्माण क्षेत्र की वर्तमान हिस्सेदारी को वर्तमान 17 प्रतिशत से बढ़ाकर साल 2025 तक 25 प्रतिशत करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया कार्यक्रम का जोर इलेक्ट्रानिक हार्डवेयर, कम्प्यूटीकरण और मोबाइल फोन उद्योगों पर है जहां काफी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। राष्ट्रपति ने कहा कि अभी भारत में 80 प्रतिशत पानी का उपयोग कृषि क्षेत्र में होता है जबकि उद्योग में 15 प्रतिशत पानी का उपयोग होता है। आने वाले वर्षो में यह अनुपात बदलेगा। उन्होंने कहा कि पानी की कुल मांग बढ़ेगी। ऐसे में पानी का उपयोग और पुन: उपयोग के बारे में औद्योगिक परियोजनाओं का खाका तैयार किया जाना चाहिए। इस बारे में समाधान निकालने में कारोबार और उद्योग को हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी भारत में प्रति दिन 40 अरब लीटर गंदा जल निकलता है। ऐसे में जल के हानिकारक तत्वों को कम करने के लिये प्रौद्योगिकी को अपनाना महत्वपूर्ण है। सिंचाई और अन्य उद्देश्यों के लिये भी प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाना चाहिए। कोविंद ने कहा कि इस विषय को शहरी योजना कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि एक तरफ भूजल स्रोत का काफी दोहन हो रहा है और कुछ उत्तरी एवं पश्चिमी राज्यों में इसका स्तर गिरा है। दूसरी ओर पूर्वऔर पूर्वोत्तर के राज्यों में नदियों का जल स्तर बढऩा और बाढ़ आना भी एक चुनौती है। साल दर साल इसके कारण लोगों को त्रासदी का सामना करना पड़ता है, लोगों के आवास को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि इससे निपटने के लिये बहुपक्षीय और बहु स्तरीय पहल की जरूरत है। देश के छह लाख गांव के साथ शहरी इलाकों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना न केवल एक परियोजना प्रस्ताव है बल्कि पवित्र प्रतिबद्धता है।

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