लिप सर्जरी की बात पर भड़कीं Mouni Roy

जल्द ही रोमियो अकबर वॉल्टर में जॉन अब्राहम की हिरोइन के रूप में नजर आनेवाली मौनी रॉय ने फिल्म के बारे में काफी बातें कीं और जब उनकी लिप सर्जरी के बारे में पूछा गया तो जानिए उन्होंने क्या जवाब दिया।
गोल्ड में अक्षय कुमार की हिरोइन बनीं मौनी जल्द ही रोमियो अकबर वॉल्टर’ में जॉन अब्राहम की हिरोइन के रूप में नजर आएंगी। इस खास मुलाकात में वह अपनी फिल्म, अक्षय, जॉन, रिलेशनशिप, आउटसाइडर जैसे मुद्दों पर खुलकर बात करती हैं, मगर लिप सर्जरी के नाम पर भड़क उठती हैं।
गोल्ड में अक्षय जैसे बड़े स्टार के साथ काम करने के बाद जॉन जैसे अनुभवी ऐक्टर के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
लोग मुझसे पूछते हैं कि दोनों में फर्क क्या है? मैं कहती हूं समानताएं ज्यादा हैं। अक्षय सर और जॉन सर दोनों ही अच्छे दोस्त हैं। दोनों ही ऐक्शन हीरो रहे हैं, मगर सेट पर दोनों मजाकिया और फनी बने रहते हैं। दोनों बहुत प्रैंक्स करते हैं। दोनों की खूबी यह है कि सुपरस्टार होने के बावजूद दोनों बेहद ही विनम्र हैं। बस दोनों के डायलॉग बोलने का अंदाज अलग है और अभिनय अदायगी भी। यह मैंने सभी बड़े स्टार्स के साथ महसूस किया। चाहे वह अमिताभ बच्चन, आलिया, रणवीर, राजकुमार हों या नवाज सर सभी बहुत ही हम्बल हैं। अक्षय और जॉन सर दोनों ही निर्देशक के अदाकार हैं। समय के पाबंद हैं। समर्पण दोनों में ही कूट-कूट कर भरा है। मैंने इनसे काफी कुछ सीखा।
आपकी लिप सर्जरी को लेकर कई अफवाहें चल रही हैं?
(उत्तेजित होकर) देखिए, न तो इसके लिए आपने पे किया है और न ही आपके जाननेवाले ने इसके पैसे दिए हैं। यह बहुत ही निजी चीज है। जो लोग इस पर ट्रोल करते हैं या तरह-तरह की बातें बनाते हैं, मुझे नहीं लगता कि उनका इससे कुछ लेना-देना भी है। मैं इतना ही कहूंगी कि एक औरत होने के नाते यह अपलिफ्टमेंट है, क्योंकि अगर यह ट्रोल का विषय है, तो फिर कायदे से औरतों को आइलाइनर और लिपस्टिक भी नहीं लगानी चाहिए। यह मेरा पेशा है और मुझे यह लगाना पड़ता है। मैं क्या आपको पूछ रही हूं कि आपने इतने बड़े इयररिंग्ज क्यों पहने हैं/ (हमारे झुमको की ओर इशारा करते हुए)। मुझे लगता है, यह बातें मेरी गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।
रोमियो अकबर वॉल्टर इंडिया और पाकिस्तान के खुफिया एजेंट्स पर आधारित है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद चारों तरफ देशभक्ति की लहर दौड़ रही है। क्या इसका फायदा फिल्म को मिलेगा?
पिछले साल जब फिल्म की घोषणा हुई थी तो पहले से अंदाजा था कि इन तारीखों में यह आएगी। मैं इसके साथ फिल्म को नहीं जोडऩा चाहूंगी। जहां तक फायदे-नुकसान की बात है, तो पुलवामा में जो हुआ वह बहुत ही दुखद था। मगर सर्जिकल स्ट्राइक बहुत बहादुरी का काम था और मुझे खुशी है कि सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
युद्ध के बारे में आप क्या सोचती हैं? पिछले दिनों देश में युद्ध के हालात भी पैदा हो गए थे?
आप अगर किसी भी नागरिक को युद्ध के बारे में पूछेंगे तो वह यही कहेगा कि वो वॉर नहीं चाहता। कोई भी युद्ध नहीं चाहता, मैं भी नहीं। मगर यदि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध करने की नौबत आए तो वह हमें जरूर करना पड़ेगा। अगर किसी देश ने किन्ही टेररिस्ट को पनाह दी हुई है, तो उन आतंकवादियों को वहां नहीं होना चाहिए।
आप एक गैरफिल्मी पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखती हैं, तो इंडस्ट्री में अपना मेंटॉर किसे मानती हैं?
इंडस्ट्री में मेरा सिर्फ एक ही मेंटॉर है और वह हैं एकता मैम (एकता कपूर)। कृष्णातुलसी, नागिन जैसे किरदारों पर काम करने का अनुभव कमाल का रहा। वह जब नरेशन देती हैं या रोल अथवा कहानी के बारे में बताती हैं, तब आपको महसूस होता है कि आप पर उनका कितना प्रभाव है। उनमें कहानी और किरदार को पकडऩे की गजब की समझ है। वह समझ उन्होंने मुझे दी है। हार्ड वर्क भी मैंने उनसे सीखा है।
आलिया, सोनाक्षी, श्रद्धा जैसे स्टार किड्स के बीच इंडस्ट्री में खुद को आउटसाइडर महसूस करती हैं?
हां, मैं आउटसाइडर हूं। हमेशा से। जब मैं दिल्ली में पढ़ती थी और मैंने घर छोड़ा तब मैं मात्र 16 साल की थी और तभी से आउटसाइडर हूं। दिल्ली में मैं कई जगहों पर रही, फिर मुंबई में अलग-अलग जगहों पर रही। मुझे आउटसाइडर कहलाने से कोई गुरेज नहीं। मेरी परवरिश और पढ़ाई-लिखाई ने मुझे एक अलग व्यक्तित्व दिया। मैं अपने गुण जानती हूं। मुझे अहसास है कि मैं यहां तक कैसे पहुंची हूं। मैं अपना काम करने आती हूं और फिर घर चली जाती हूं। सच तो यह है कि हमारे क्षेत्र में इतनी असुरक्षा और अनिश्चितता है कि फालतू बातों को सोचने के बजाय अगर हम खुद को प्यार करने में वक्त लगाएं, तो अपने भीतरी डर को दूर कर पाएंगे। तब जिंदगी बहुत खूबसूरत हो जाएगी। मैंने पूरे दस साल टीवी पर 16-16 घंटे काम किया है, तो अब जब फिल्मों में काम करते हुए मुझे खुद को प्यार करने का मौका मिलता है तो मैं वकेशन पर निकल पड़ती हूं।
करोड़ों दिल की धड़कन होने के बावजूद आप सिंगल हैं?
मुझे सिंगल हुए लंबा अरसा हो गया, मगर इससे क्या फर्क पड़ता है? आपको सही शख्स भी तो मिलना चाहिए। सिंगल होकर मैं बहुत खुश हूं। बहुत समय बाद मैं खुद के साथ वक्त बिता पा रही हूं। मैं खुद पर काम कर रही हूं। मेरे लिए सही लड़के की परिभाषा है, अच्छा इंसान। जिस दिन वह मिल जाएगा, मैं मिंगल हो जाऊंगी।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *