राज्य में मूंग, उड़द, सोयाबीन तथा मूंगफली की 4.80 लाख मैट्रिक टन की होगी खरीद

उड़द के 10 खरीद केन्द्र और बढ़ाए
जयपुर, 9 अक्टूबर (कासं)। राज्य में मूंग, उड़द, सोयाबीन तथा मूंगफली की पैदावार को देखते हुए भारत सरकार ने राज्य में 1.50 लाख मैट्रिक टन मूंग, 30 हजार मैट्रिक टन उड़द, 1.50 लाख मैट्रिक टन सोयाबीन तथा 1.50 लाख मैट्रिक टन मूंगफली खरीदने का निर्णय किया है। यह जानकारी सहकारिता मंत्री अजय सिहं किलक ने सोमवार को दी।उन्होंने बताया कि काश्तकारों से खरीदे जा रहे जिन्सों का भुगतान दीपावली से पूर्व किए जाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिन खरीद केन्द्रों पर किसानों द्वारा अधिक पंजीयन करवाया गया है उन केन्द्रों पर कांटों की संख्या बढ़ाई जा रही है। सहकारिता मंत्री ने बताया कि भोपालगढ, दूदू, विजयनगर, नागौर, जायल, मेड़ता, देई, अटरू, किशनगढ़, एवं बूंदी में उड़द के लिए 10 नए खरीद केन्द्र बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में इस प्रकार अब 179 खरीद केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं। किसानों को उनकी उपज को बेचने में कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी, यदि आवश्यकता पड़ी तो अतिरिक्त खरीद केन्द्र बनाए जाएंगे।किलक ने बताया कि यदि किसी भूमि पर संयुक्त खातेदारी है तथा भामाशाह कार्ड एक ही महिला के नाम पर है तो इस स्थिति में गिरदावरी रिपोर्ट में एक से अधिक खातेधारकों के हिस्से अंकित होने पर प्रत्येक हिस्सेदार का पृथक् से पंजीयन कराने का प्रावधान कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार यदि किसी भूमि को बटाईदार को दे रखा है तो इसके लिए कृषि भूमि मालिक एवं काश्त करने वाले किसान के मध्य विधिवत रूप से 100 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर अनुबंध होना आवश्यक है।रजिस्ट्रार एवं प्रमुख शासन सचिव, सहकारिता अभय कुमार ने बताया कि किसानों को जिन्स के अनुसार गुणवत्ता संबंधी संदेश एसएमएस के माध्यम से भिजवाए जा रहे हैं ताकि किसान अपनी उपज को बेचने के हिसाब से तैयार कर के लाए तथा उसका रिजेक्शन न हो। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने प्रत्येक जिन्स के एफएक्यू मापदण्ड तय किए हैं।कुमार ने बताया कि खरीद केन्द्र पर गुणवत्ता संबंधी मापदंडों के आधार पर उपज के आकलन के समय विवाद होने की संभावना को देखते हुए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस कमेटी में संबंधित क्रय-विक्रय सहकारी समिति का व्यवस्थापक या केन्द्र प्रभारी, नेफैड द्वारा नियुक्त किस्म निरीक्षक या सर्वेयर, संबंधित कृषि उपज मंडी समिति का सचिव या उसका प्रतिनिधि तथा कृषि विभाग का संबंधित कृषि पर्यवेक्षक सम्मिलित है, जो मौके पर ही विवाद का निराकरण करेगी।प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि समर्थन मूल्य पर खरीद के समय समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए तथा गुणवत्ता जांच से संबंधित कार्य की मोनेटरिंग एवं सुचारू रूप से क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक केन्द्र पर उपखण्ड अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। कुमार ने बताया कि यदि किसान को ऑन लाईन पंजीयन में संशोधन की सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि यदि किसी कारणवश निर्धारित दिनांक को अपनी जिन्स की तुलाई नहीं करवा पाता है तो उसे आगामी शनिवार अथवा खरीद केन्द्र की सुविधा के अनुसार जिन्स की तुलाई की सुविधा की व्यवस्था की गई है।राजफैड की प्रबंध निदेशक डॉ. वीना प्रधान ने बताया कि जिन किसानों को एक से अधिक जिन्स समर्थन मूल्य पर विक्रय करना हो तो उन्हें नए सिरे से प्रत्येक जिन्स के लिए पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि इसके लिए किसान को पंजीकरण में एडिट ऑप्शन में जाकर नई गिरदावरी डालनी होगी। डॉ. प्रधान ने बताया कि राज्य में अभी तक 51 हजार से अधिक किसानों ने ऑन लाईन पंजीयन करवाया है। उन्होंने बताया कि किसान को सफलतापूर्वक पंजीयन की सूचना उसके पंजीकृत मोबाइल पर उसी दिन सूचित किया जा रहा है।

 

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