राजस्थानी की सर्वप्रथम गजल की म्युजिकल कंपोजिशन का आज होगा लोकार्पण

श्रीगंगानगर, 9 अक्टूबर (का.सं.)। राजस्थानी भाषा, संस्कृति, और संगीत प्रेमीयों के लिए एक खुश खबर । राजस्थानी भाषा का संगीत वैसे तो किसी परिचय का महोताज नहीं । इस के कई कलाकारों संगीतकारों गायकों नें अपनी प्रतिभा का परचम देश विदेश में लहराया है। पर गीत संगीत की इतनी समृद्ध विरासत संजोए हुए भी राजस्थानी संगीत में किसी संगीतकार द्वारा गजल के कंपोजिशन की कमी महसूस की जाती थी। उसी कमी को पूरा किया है हैदराबाद के संगीत निर्देशक रामावतार दायमा ने।दायमा ने राजस्थानी में नरपत वैतालिक द्वारा लिखी खूबसूरत गजल का स्वरांकन किया है। जयपुर की कोकिलकंठी गायिका शिखा माथुर ने इस गजल को अपना सुंदर स्वर दिया है। साथ ही मयंक शर्मा ने इसमें संगीत दिया है। संगीत संयोजन गषिकेश सोनी ने किया है। इस गीत का वीडियो फिरोज मीरडा ने निर्देशित किया है। इस गजल का उद्भव नरपत आसिया द्वारा राजस्थानी के पहले व्हाटसप ग्रुप थार थळी में किया गया था।।थार थळी में अब तक कई नए प्रयोग राजस्थानी साहित्य को लेकर हो चुके हैं।मूल राजस्थान निवासी और हैदराबाद के गजल कंपोजर रामावतार दायमा ने बताया कि गजल इरान और अरबस्तान की धरती से हजारों साल पहले निकली थी । आज लगभग हर जुबान बोली में रम गई है। हर भाषा में कवियों ने इसे कहा है और संगीतिक स्वरांकन भी होते रहे हैं।पर अरबस्तान के रेगिस्तान और राजस्थान के रेतीले धोरों में समानता होते हुए भी इस का सांगितीक प्रचलन राजस्थानी भाषा में अब तक नहीं है।सो कल यह आधिकारिक रूप में यूट्यूब पर लांच होगी।कवि नरपत वैतालिक जिन्होंने इसे अपने शब्दों से संजोया है,ने बताया कि वैसे तो कवि सम्मेलनों मंचों पर राजस्थानी कविता,राजस्थानी गजलें.खूब सुनाते हैं,पर इसका अबतक किसी संगीतकार द्वारा स्वरांकन देखने में नहीं आया है। इसलिए इस विरल घटना का राजस्थानी संगीत और भाषा में दुरोगामी सकारात्मक परिणाम आने की आशा है।दूसरे संगीतकार भी राजस्थानी की मिठास से भरी गजल को स्वरांकित करेंगे।राजस्थानी भाषा की सांस्कृतिक और महान संगीत की धरोहर को संजोने आगे आएँगे।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *