राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग : खुली सुनवाई के माध्यम से सुलझेंगे दलित अत्याचारों के मामले

जयपुर, 18 जनवरी (कासं.)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा गुरुवार को जयपुर में हरिश चन्द्र माथुर लोक प्रशासन संस्थान में दलित अत्याचारों और उनकी समस्याओं से जुड़े मामलों के त्वरित न्यायिक समाधान के लिए आयोजित दो दिवसीय खुली सुनवाई का उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एच एल दत्तु ने कहा कि आयोग द्वारा 18 व 19 जनवरी को खुली सुनवाई के माध्यम से समाज के पिछड़े हुए तबके की समस्याओं को सुनकर उन्हें तत्काल न्याय दिलाने का कार्य किया जा रहा है।
जस्टिस दत्तु ने कहा कि खुली सुनवाई के माध्यम से न्याय से वंचित हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के आवाज उठाने का मंच मिल रहा है। उन्होंने कहा कि देश भर में कारागार, पुलिस, बाल सुधार गृहों, बाल श्रम, बुजुर्गों, महिलाओं, बंधुआ मजदूरों के अधिकारों के रक्षा से जुड़े मामले आयोग द्वारा सुने जाते हैं। इसके अतिरिक्त आयोग द्वारा मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के क्रियान्वयन से संबंधित मामलों की भी निगरानी की जाती है। उन्होंने बताया कि कुछ गंभीर मामलों में आयोग द्वारा विशेष कार्यवाही भी की जाती है। जैसे कि खदानों में काम कर रहे मजदूरों में सिलिकोसिस बीमारी एक चिन्ताजनक स्थिति है, इसलिए इस संबंध में आयोग द्वारा कुछ सिफारिशें राज्यों को भेजी गई हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि देश में मानवाधिकार एक संस्कृति के रूप में विकसित हो और इसके लिए स्कूल व कॉलेजों के स्तर पर मानवाधिकार के बारे में पढ़ाया जाना चाहिये।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के महासचिव अम्बुज शर्मा ने कहा कि आयोग द्वारा देश भर में 20 से भी अधिक राज्यों में जनसुनवाई का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में जहां स्थिति ज्यादा गंभीर है, वहां कोर ग्रुप और स्पेशल ग्रुप काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एलजीपीटी मुद्दे के लिए भी नया कोर ग्रुप बनाया जाएगा। अम्बुज ने कहा कि आयोग का प्रयास है कि देश के हर नागरिक तक न्याय पहुंचे और प्रत्येक व्यक्ति अपने मानवाधिकारों के प्रति जागरूक हो। उन्होंने बताया कि खुली सुनवाई के माध्यम से पुराने केसेज के साथ साथ नए केसेज की सुनवाई भी की जाएगी। मुख्य सचिव एन सी गोयल ने कहा कि राज्य सरकार आमजन के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए गंभीर है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक नागरिक तक सभी प्रकार की योजनाओं का लाभ पहुंचे उन्हें और न्याय पाने में किसी भी प्रकार के भेदभाव का सामना ना करना पड़े। गोयल ने कहा कि सम्पर्क पोर्टल, जनसुनवाई, रात्रि चौपालों और सीएम हैल्पलाइन के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान बिना जाति, धर्म, सामाजिक स्तर या अन्य किसी भी प्रकार के भेदभाव के किया जा रहा है। खुली सुनवाई के तहत तीन बैंचों के माध्यम से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एच एल दत्तु, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य जस्टिस पी सी घोष एवं जस्टिस डी मुरुगेसन की अध्यक्षता में विभिन्न मामलों की सुनवाई की जा रही है। इन एकल बैंचों में लगभग 168 नए और पुराने मामलों की सुनवाई की जाएगी। दूसरे दिन शुक्रवार 19 जनवरी को जस्टिस दत्तु की अध्यक्षता में आयोजित फुल बैंच में भी प्रकरणों की सुनवाई की जाएगी। इस अवसर पर राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया, आयोग के सदस्य, पुलिस महानिदेशक ओपी गल्होत्रा सहित पुलिस विभाग के विभिन्न अधिकारी एवं विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।

 

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