नई लड़कियों को डरने की जरूरत नहीं तापसी पन्नू

तापसी पन्नू न सिर्फ बिग स्क्रीन पर दमदार रोल निभाती हैं, बल्कि रियल लाइफ में भी बेबाकी से अपनी राय रखती हैं। हाल ही में उन्होंने तनुश्री दत्ता-नाना पाटेकर विवाद में तनुश्री को खुलकर सपॉर्ट दिया। हाल ही में दिल्ली आईं तापसी ने तनुश्री, ऐक्टिंग और सेंसर के बारे में खुलकर बात की:
तनुश्री दत्ता के केस में आपने उन्हें काफी स्ट्रॉन्ग सपॉर्ट दिया है। कुछ लोग उन्हें गलत ठहरा रहे हैं? इस केस के बाद बॉलिवुड की जो इमेज बन रही है, उससे नई लड़कियां बॉलिवुड में आने से डरेंगी?
मैंने ही नहीं, मुझसे ज्यादा स्ट्रॉन्ग सपॉर्ट तनुश्री दत्ता को और लोगों से भी मिला है। मुझसे पहले भी बहुत लोगों ने उनका साथ दिया है और यह बहुत जरूरी है कि हम उनको सपॉर्ट करें। नई लड़कियों को डरने की जरूरत नहीं है। क्या हम जैसे उदाहरण काफी नहीं हैं उनके सामने! मुझे नहीं लगता कि एक चीज से सबको जनरलाइज करना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए, न तो पॉजिटिव चीजों के लिए और न नेगेटिव बातों के लिए।
आप दिल्ली की लड़की हैं, यहां के फेवरिट स्पॉट कौन से हैं जहां का खाना आप मिस नहीं करना चाहतीं?
मैं यहां आती रहती हूं, मेरे पैरंट्स यहीं रहते हैं, लेकिन खाना मैं घर पर ही खाती हूं, जो भी खाने का मन होता है, सब घर पर ही आ जाता है।
फिल्म कोई भी हो, आपका किरदार उसमें दमदार ही होता है। क्या आप खुद को खुशकिस्मत मानती हैं कि इतने दमदार रोल आपको मिल रहे हैं?
हां, कुछ हद तक खुशकिस्मत मानती हूं क्योंकि किस्मत के बिना तो कुछ होता नहीं है। मेहनत जरूरी है लेकिन किस्मत का होना भी उतना ही जरूरी है। आप अगर पावरफुल किरदारों की बात करते हैं, वुमन सेंट्रिक भूमिकाओं की बात करें, तो मेरी पर्सनैलिटी ऐसी है कि मैं ऐसे किरदार कर लूं तो लोगों को कन्वींसिंग लगता है। इसलिए मुझे इस तरह के रोल ऑफर होते हैं। मैं ऐसी भूमिकाओं से खुद भी काफी कनेक्ट करती हूं।
पिंक, मनमर्जियां या रनिंग शादी, आप हमेशा ऐसे किरदार कैसे चुन लेती हैं जिसमें लड़कियों को काफी आजादी चाहिए?
बहुत आजादी की बात नहीं है लेकिन मुझे लगता है कि लड़की को अपने फैसले लेने की छूट होनी चाहिए। गलतियां करके इंसान सीखे तो अच्छा है। मैं खुद की गलतियों से सीखना पसंद करूंगी न कि दूसरों की गलतियों से। इससे अच्छी सीख मिलती है।
मनमर्जियां को लेकर जैसी कंट्रोवर्सी हुई उसके बाद क्या ऐसा लगता है कि ऐप बेस्ड सिनेमा करना अच्छा है क्योंकि वहां कोई सेंसर नहीं है?
सेंसर ने तो ये भी नहीं किया था। उन्होंने हमारी फिल्म के सीन नहीं काटे थे। सेंसर को ऐसा करना होता तो फिल्म रिलीज से पहले हो गया होता, इसलिए सेंसर से मुझे कोई समस्या नहीं है।
तो क्या अब पब्लिक ही सेंसर का काम करने लगी है?
सबको अटेंशन चाहिए होता है। सबको मशहूर होना है, फिल्में इसके लिए लोगों को आसान टार्गेट लगती हैं। अब जिनको चाहिए था, उनको मिल गया, उनका नेम-फेम मुबारक हो उन्हें।
कभी ऐसा हुआ कि किसी ने कहा हो, इतनी नाजुक सी लड़की है, ये ऐक्शन सीन कैसे कर लेगी?
नहीं, अपनी डेलिकेटनेस दिखाने का मौका भी मुझे मिलता है, लेकिन लडऩे की क्षमता हर लड़की में होती है जिसका इस्तेमाल उसे कर लेना चाहिए।
अगर आपको किसी एक गैजेट के साथ अकेला छोड़ दिया जाए तो वह क्या होगा? मोबाइल फोन या लैपटॉप?
अगर नेटवर्क हो तो मोबाइल फोन क्योंकि आजकल मोबाइल में इतना कुछ है कि आप सारे काम कर सकते हैं और किसी गैजेट की जरूरत ही नहीं होती। लैपटॉप या मोबाइल में से हमेशा मोबाइल ही मेरी पसंद है।
गैजेट्स हो या रोल, कहते हैं कि थोड़ा रुक जाते तो और अच्छा मिल जाता…!
गैजेट्स आते ही रहेंगे, जिस ब्रैंड को आपने चुना है, वही कुछ दिन बाद कुछ नया लॉन्च कर देगा। आप इंतजार नहीं कर सकते। जहां तक रोल की बात है, तो मुझे लगता है कि मुझे तो शायद ऐसी शिकायत करनी ही नहीं चाहिए। मुझे अब तक काफी अच्छे रोल मिल रहे हैं। जितना अच्छा मैं कर रही हूं, उससे और अच्छे रोल मिलते जा रहे हैं। लोगों को लगता है कि अगर तापसी ने ये कर लिया तो शायद ये वाला रोल भी कर सकती है। इससे मेरी अपनी हिम्मत भी बढ़ती जा रही है कि मैं और रिस्क लूं। इसलिए जो भी करियर में मेरे साथ हो रहा है, उससे मैं काफी खुश हूं।

मैंने ही नहीं, मुझसे ज्यादा स्ट्रॉन्ग सपॉर्ट तनुश्री दत्ता को और लोगों से भी मिला है। मुझसे पहले भी बहुत लोगों ने उनका साथ दिया है और यह बहुत जरूरी है कि हम उनको सपॉर्ट करें। नई लड़कियों को डरने की जरूरत नहीं है। क्या हम जैसे उदाहरण काफी नहीं हैं उनके सामने! मुझे नहीं लगता कि एक चीज से सबको जनरलाइज करना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए, न तो पॉजिटिव चीजों के लिए और न नेगेटिव बातों के लिए।

 

 

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