छह माह तक ट्रायल सेवाएं दे सकेंगी नई मोबाइल कंपनियां

 

नई दिल्ली। टेलीकॉम कमीशन ने मोबाइल सेवा के कॉमर्शियल लांच से पहले मोबाइल कंपनियों के लिए नेटवर्क टेस्टिंग के नियमों को मंजूरी दे दी है लेकिन उसने टेस्टिंग फेज यानी ट्रायल सेवाएं देने की अवधि 180 दिन के लिए सीमित कर दी है। संचार मंत्रालय के निर्णय लेने वाले शीर्ष संगठन टेलीकॉम कमीशन ने फिक्स्ड लाइन सेवाओं के लिए टेस्टिंग संबंधी नियम बनाने के लिए टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई को निर्देश देने का फैसला किया है।टेलीकॉम सचिव अरुणा सुंदरराजन ने कमीशन की बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि ट्राई की सिफारिशों पर ट्रायल मोबाइल सेवा के लिए फैसला लिए गए हैं। ट्राई ने ट्रायल की अवधि 90 दिनों से आगे बढ़ाने के लिए दूरसंचार विभाग को निर्णय करने की सिफारिश की थी लेकिन कमीशन ने इसके बारे में स्पष्ट रूप से 180 दिनों के लिए ट्रायल सेवाओं की अनुमति दी है। रिलायंस जियो की सितंबर 2016 में सेवाएं लांच होने से पहले टेस्टिंग के दौरान ही उसके नेटवर्क से 15 लाख ग्र्राहक जुडऩे पर समूचे उद्योग में तूफान आ गया था। उस समय पहले से स्थापित मोबाइल कंपनियों ने नियमों के उल्लंघन का मामला उठाते हुए आरोप लगाया था कि जियो ट्रायल लांच के बहाने ग्र्राहकों को पूरी सेवाएं मुफ्त दे रही है। इन कंपनियों ने ट्रायल सेवाओं के लिए नियम बनाने की मांग की। इसके बाद पिछले साल दिसंबर में ट्राई ने निमयों को सिफारिशें दीं। सुंदरराजन ने कहा कि ट्रायल सेवाओं के लिए विस्तार स्वत: ही नहीं मिलेगा। बल्कि 90 दिनों के आगे ट्रायल सेवाओं के लिए ट्राई स्पष्ट गाइडलाइन तय करेगा।

 

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