आलस नहीं सेहत के लिए बेहतर है पावर नैप

आलसी नहीं होते पावर नैप लेने वाले : अगर आप दोपहर में नींद लेने को गलत आदत मानते हैं तो आप गलत हैं। दरअसल दोपहर में बीस से तीस मिनट की नींद सेहत के लिए बेहद जरूरी है। भारत में भले ही इस तरह से सोते हुए लोगों को आलसी माना जाता हो लेकिन दक्षिणी यूरोप में दोपहर के समय नैप या सिएस्ता की परंपरा लंबे समय से है। आज भले ही कामकाज के आधुनिक माहौल में पावर नैप कहीं खो चुका हो लेकिन वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर दोपहर में कुछ देर का पावर नैप लिया जाए तो इससे शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है और इसका प्रभाव कामकाज पर भी पड़ता है।
क्यों आती है दोपहर में नींद : वैज्ञानिकों के मुताबिक दोपहर के आसपास शरीर का थकना और एकाग्रता में कमी आना बहुत ही सामान्य जैविक प्रक्रिया है। ऐसा शरीर की बायोरिदम के चलते होता है। कई लोगों को दोपहर बाद जम्हाइयां भी आने लगती हैं। इसी वजह से स्पेन, पुर्तगाल और इटली समेत कई देशों में दोपहर में एक छोटी सी झपकी मारना आम आदत है।
एक घंटे से ज्यादा न हो पावर नैप: वैज्ञानिकों के मुताबिक दोपहर के समय पावर नैप लेना बेहतर है लेकिन यह 20 से 30 मिनट ही होना चाहिए। अगर ज्यादा नींद आती हो तब भी एक घंटे से ज्यादा किसी भी कीमत पर नहीं सोना चाहिए क्योंकि उससे शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित होगी और रात की नींद में खलल पड़ता है।
होता है फायदा
दिल की बीमारी होने का खतरा कम होता है।
पावर नैप से एकाग्रता बेहतर होती है।
सेरोटॉनिन की बढ़ी मात्रा से मूड भी बढिय़ा रहता है।

 

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