रुपये को राहत देेंगे एनआरआई, 2 करोड़ प्रवासी भारतीय करते हैं विदेश में काम

नई दिल्ली। प्रवासी भारतीयों द्वारा स्वदेश भेजे जाने वाली रकम यानी रेमिटेंस अर्थव्यवस्था पर रुपये की मार को कम करने में मदद करेगी। इस साल रेमिटेंस के रूप में रिकॉर्ड 76 अरब डॉलर की रकम भारत को मिल सकती है, जिससे अतिरिक्त विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी। विदेश में करीब दो करोड़ प्रवासी भारतीय काम करते हैं और देश के चालू खाते के घाटे को कम करने में बड़ी मदद करते हैं। विदेशी मुद्रा पर नजर रखने वाली अमेरिकी कंपनी एबिक्सकैश की रिपोर्ट के मुताबिक, रुपये में गिरावट एनआरआई के लिए निवेश का बड़ा अवसर साबित हो रही है। वहीं वित्तीय विश्लेषक फर्म कैपिटल इकोनॉमिक्स के अनुसार, रेमिटेंस की रकम को छोड़ दें तो भारत का चालू खाते का घाटा पांच फीसदी हो सकता है, लेकिन इससे यह जीडीपी के दो फीसदी तक सीमित रहेगा। एबिक्सकैश के ट्रेजरी हेड एमपी हरिप्रसाद का कहना है कि जब रुपये में अवमूल्यन होता है, तो विदेशी स्रोतों से प्रवाह तेज हो जाता है। इससे डॉलर की कमी पूरी होती है और निवेशकों को रुपये के तौर पर ज्यादा रकम मिलती है। हरिप्रसाद का कहना है कि दिसंबर तक रुपये में गिरावट बनी रहेगी, यह 75 के आसपास बना रह सकता है।
रुपया आठ पैसा और मजबूत -रुपया बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 19 पैसे कमजोर होकर 73.35 पर खुला। हालांकि शाम को यह 0.08 पैसे मजबूत होकर 73.23 रुपये पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में कमी रुपये में बहुत अधिक गिरावट को रोकने में मदद मिली।
30 अरब डॉलर जुटा सकती है आरबीआई – इंडिया रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, अगर आरबीआई 2013 की तरह इस साल भी एनआरआई से 30 अरब डॉलर की रकम जुटा पाती है तो रुपये को संभाला जा सकता है। इससे भारतीय मुद्रा दूसरी छमाही में डॉलर के मुकाबले औसतन 69.79 तक रह सकती है। पहली छमाही में यह 8.3 फीसदी की गिरावट के साथ 68.57 पर रही है। 2013 में आरबीआई ने एनआरआई से 25 अरब डॉलर जुटाए थे।
कच्चे तेल ने भारतीय मुद्रा को हिलाया-गौरतलब है कि कच्चे तेल में उछाल की वजह से रुपये में पिछले छह माह में भारी गिरावट आई है। इससे स्टॉक और बॉंड बाजार से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा की निकासी भी है। रिजर्व बैंक ने इस स्थिति को संभालने के लिए हस्तक्षेप भी किया था और सरकार ने तमाम वस्तुओं के आयात पर शुल्क भी बढ़ाया था, लेकिन इससे भी मुद्रा में गिरावट को रोका नहीं जा सका है। हालांकि आरबीआई द्वारा तेल कंपनियों को विदेशी से उधारी के नियमों में ढील देने से रुपये में राहत मिली है। .

 

 

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