केबल टीवी नेटवर्क के जरिये गांवों में मिल सकती है इंटरनेट सेवा

नई दिल्ली। देश के सुदूरवर्ती इलाकों में ब्रॉडबैंड सेवा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने मौजूदा केबल नेटवर्क के जरिये इंटरनेट सेवा प्रदान करने के लिए एक प्रस्ताव को नया रूप दिया है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि टेलिविजन सेट रखने वाले लगभग 19 करोड़ परिवारों को इंस्टैंट इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए यह प्रस्ताव बेहद अहम हैं। इनमें से लगभग 10 करोड़ परिवारों ने पहले से ही केवल टीवी सब्सक्रिप्शन की सुविधा ले रखी है। हाल में देशभर के तमाम केबल ऑपरेटर्स के साथ किए गए विचार-विमर्श में ट्राई के चेयरमैन आर.एस. शर्मा ने कहा था कि इस कदम से फिक्स्ड लाइन नेटवर्क के जरिये इंटरनेट कनेक्टिविटी को वैश्विक औसत 46 फीसदी की तुलना में मौजूदा सात फीसदी से बढ़ाने में मदद मिल सकती है। केबल टीवी सेवा के साथ ब्रॉडबैंड की सुविधा का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को बस एक नया सेट टॉप बॉक्स लगाना होगा। इस प्रक्रिया में मंत्रालय की इंजिनियरिंग शाखा बीईसीआईएल केबल टीवी सेवा प्रदाताओं को मदद करेगी। इस राह में आठ फीसदी सालाना ऐनुअल जनरल रेवेन्यू (एजीआर) आड़े आ रहा है। वर्तमान में केबल ऑपरेटर्स इस रकम का भुगतान दूरसंचार विभाग को करते हैं। जब केबल टीवी के साथ इंटरनेट सुविधा शुरू हो जाएगी, तो उन्हें केवल ब्रॉडबैंक सेवा के लिए भुगतान करना चाहिए या दोनों ही बिजनस से होने वाली आय के लिए भुगतान करना चाहिए यह सवाल उठ खड़ा हुआ है। लाइसेंसिंग को लेकर चिंता के अलावा, केबल ऑपरेटरों के बीच इस बात को लेकर भी चिंता है कि कुल कमाई पर एजीआर के भुगतान से उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है। दिसंबर मध्य में मंत्रालय तथा ट्राई की सेवा प्रदाताओं के साथ बैठक के दौरान शर्मा ने इसी तरह का प्रस्ताव लागू करने वाले और अपने केबल सेवा प्रदाताओं को एजीआर से छूट देने वाले दक्षिण कोरिया का हवाला देते हुए कहा था कि इसके लागू होने के बाद फिक्स्ड लाइन नेटवर्क के जरिये इंटरनेट कनेक्विटविटी के 93 फीसदी तक पहुंच जाने का आकलन है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय और केबल ऑपरेटर दोनों प्रस्ताव को लागू करने के इच्छुक हैं। इसे लागू करने के लिए प्रस्ताव को एजीआर से छूट जैसी वित्तीय समस्याओं को सुलझाना होगा।

 

 

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