मेरी फिल्मों को हमेशा याद किया जाएगा- ओनिर

ओनिर बॉलिवुड के उन डायरेक्टरों में से हैं, जिन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए समाज के उन मुद्दों को दर्शाया है, जिस पर लोग बात तक करने से हिचकिचाते हैं। ओनिर इन दिनों अपनी छवि के विपरीत आनेवाली फिल्म कुछ भीगे अल्फाज को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने हमसे इस फिल्म और बॉलिवुड के बारे में बातचीत की…

इंटर्न बनने की शर्त पर मिली स्टोरी – मैं एक स्क्रिप्ट लैब में स्क्रिप्ट मेंटेन कर रहा था। उस वक्त मेरे पास बहुत सी स्क्रिप्ट्स में से एक कहानी यह भी आई हुई थी। जब मैं यह पढऩे लगा तो मुझे काफी रोचक लगी। मुझे इस स्क्रिप्ट से प्यार हो गया था क्योंकि इसमें ताजगी के साथ-साथ मेरे लिए एक नया जॉनर था। जब इसे पढ़ रहा था तो मुझे अपने कॉलेज के दिनों वाले प्यार की याद आने लगी। इसकी कहानी पढ़ते वक्त मेरे अंदर यह भी डर था कि पता नहीं जो राइटर है वह मुझे अपनी इस कहानी पर फिल्म बनाने देगा भी या नहीं। मैंने उस राइटर अभिषेक चटर्जी को एक ईमेल भेजा था जिसमें मैंने लिखा कि क्या मुझे अपनी कहानी को डायरेक्ट करने का मौका देंगे? उनका जवाब तुरंत आया जिसमें लिखा था, ‘मैं 6 महीने पहले आपके यहां बतौर इंटर्न काम मांगने आया था लेकिन आपने मना कर दिया था तो उसकी वजह है मैंने लिखना शुरू कर दिया था। अगर आप डायरेक्ट करेंगे तो मैं बहुत खुश हूं, लेकिन मुझे आपको बतौर इंटर्न रखना पड़ेगा।
कोशिश रहती है कि नए टैलंट को मौका दूं – मैं जब से इंडस्ट्री में हूं कोशिश करता हूं कि नए लोगों को भरपूर मौका दूं क्योंकि जब मैं बाहर से यहां आया था किसी ने मुझ पर विश्वास कर मौका दिया था। इसलिए मेरी कोशिश यही रहती है कि मैं नए टैलंट को मौका दूं। रही बात मेरी इस फिल्म की तो इस फिल्म में मुझे नए चेहरे की ही जरूरत थी। मैं यह कह सकता हूं कि यह निर्णय मेरी इस फिल्म को कहीं से भी नुकसान नहीं पहुंचाएगा। मैं यह मानता हूं कि मेरे लीड किरदार जैन के परफॉर्मेंस को भी लोग वैसे ही नोटिस करेंगे। गीतांजलि थापा के बारे में यह सकता हूं कि भले ही उन्हें लोग ज्यादा नहीं जानते हों लेकिन उन्होंने अपनी ऐक्टिंग के बल पर नैशनल अवॉर्ड जीत लिया है। मैं स्टार नहीं देखता, मेरी कहानी के लिए जो जरूरी हो उसे ही तवज्जों देता हूं।

मुझे खुद पर गर्व है – मैं खुद पर गर्व महसूस करता हूं कि फिल्मों से जुड़े जो थोड़े बदलाव हुए हैं उसमें कहीं न कहीं मेरी भी थोड़ी भागीदारी रही है। मेरी अपनी पहली फिल्म ‘माई ब्रदर निखिल’ एक अलग तरह के विषय पर बनी थी। वहीं फिल्म ‘आई एम’ से क्राऊड फंड मुहिम की शुरुआत की थी। मैंने ऐसे सब्जेक्ट्स पर काम किया है जिसे कोई भी करने से पहले सोचता है। मुझे लगता है कि मैं हमेशा इन सब्जेक्ट्स को पहली बार किए जाने के लिए पहचाना जाऊंगा। भले ही मेरी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल नहीं किया हो लेकिन मेरे काम को याद किया जाएगा। मेरे लिए यह मायने रखता है।

इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर को नहीं मिलता है सहयोग – जब मैंने माई ब्रदर निखिल की थी तो उस वक्त उसे रिलीज करने के दौरान कोई दिक्कत नहीं आई थी। लेकिन अब जिस तरह से फिल्मों की मार्केटिंग और प्रमोशन किए जाते हैं ।

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *