ओपीईसी का क्रूड प्रॉडक्शन बढ़ाने से इनकार, और बढ़ेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें

 

नई दिल्ली। हर दूसरे दिन नया रिकॉर्ड बना रहे पेट्रोल-डीजल के दाम और उछल सकते हैं। इसकी वजह यह है कि प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन बढ़ाने से इनकार कर दिया है। उनके इस निर्णय से कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। ग्लोबल ऐनलिस्टों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान से आपूर्ति घटने के बाद कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के आसार नजर आ रहे हैं। मंगलवार को मुंबई में पेट्रोल की कीमत 90.22 रुपये प्रति लीटर हो गई, जबकि डीजल बढ़कर 78.69 रुपये प्रति लीटर हो गया। दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें क्रमश: 82.86 और 74.12 रुपये प्रति लीटर हो गई है। सरकार पहले ही खजाने की हालत का हवाला देकर एक्साइज ड्यूटी घटाने से मना कर चुकी है। रूस की अगुवाई में तेल उत्पादक और निर्यातक देशों (ह्रक्कश्वष्ट) और उनके सहयोगियों ने पिछले हफ्ते फैसला किया था कि वे प्रतिबंध से प्रभावित ईरान से आपूर्ति में होने वाली किसी भी कमी को पूरा करने के लिए उत्पादन नहीं बढ़ाएंगे। इसके बाद सोमवार को क्रूड ऑइल प्राइस 2 डॉलर प्रति बैरल चढ़कर 81 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। सऊदी अरब ने दलील दी है कि आपूर्ति को लेकर ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसकी वजह से उत्पादन में अतिरिक्त इजाफा करना पड़े और सभी देशों को अपनी जरूरत के मुताबिक क्रूड ऑइल मिल रहा है। ह्रक्कश्वष्ट के फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है, जो तेल की कीमतों पर काबू पाने के तत्काल आपूर्ति बढ़ाने की मांग कर रहे थे। पेट्रोलियम संबंधित प्रतिबंधों के चलते ईरान से ऑइल एक्सपोर्ट तेजी से घट रहा है, जो 4 नवंबर से प्रभावी होगा। ओपेक और सहयोगियों के उत्पादन बढ़ाने से इनकार करने के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगले साल की शुरुआत तक क्रूड ऑइल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, ट्रेफिगुरा के को-हेड (ऑइल ट्रेडिंग) बेन लुकॉक ने एक कॉन्फ्रेंस में कहा है कि क्रिसमस तक क्रूड ऑयल 90 डॉलर प्रति बैरल और 2019 की शुरुआत में $100 प्रति बैरल तक जा सकता है। गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 83 पर्सेंट क्रूड ऑइल इंपोर्ट करता है। इसकी मुश्किलें डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहे रुपये की वजह से भी बढ़ रही है। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 72.50 के स्तर पर आ गया था।
भारत घटा सकता है आयात -कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमत और गिरता रुपया दोनों ही चीज इस वक्त भारत की परेशानी बने हुए हैं। इससे निपटने के लिए आनेवाले दिनों में सरकार कोई ठोस कदम उठा सकती है। इसमें तेल के आयात में कमी करने पर भी विचार किया जा रहा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और भारत ईरान से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। रुपये को 70 से नीचे लाने के लिए उठाए जाएंगे और कदम – डॉलर की तुलना में लगातार गिरते रुपये को थामने के लिए सरकार जल्द ही नए कदम उठा सकती है। इनमें गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात पर नियंत्रण जैसे कदम शामिल हैं। सरकार रुपये को 68 से 70 प्रति डॉलर के स्तर पर लाने का प्रयास कर रही है। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने यह बात कही।उनका कहना है कि रुपये में हाल में आई 12 फीसद के लगभग की गिरावट अस्थायी है। सरकार ने इस महीने की शुरुआत में विदेश से कर्ज उठाने के नियमों ढील देने, कॉरपोरेट बांड में एफपीआइ के निवेश पर लगे प्रतिबंध हटाने और मसाला बांड पर टैक्स बेनिफिट जैसे कदमों से रुपये को थामने का प्रयास किया था। गिरते रुपये के कारण चालू खाता घाटा भी चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। पहले दौर के प्रयासों के बाद भी रुपये में गिरावट जारी रहने के सवाल पर वित्तीय मामलों के सचिव ने कहा, ‘अभी सभी कदम उठाए नहीं गए हैं।गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात पर नियंत्रण और निर्यात को बढ़ावा देने जैसे कदम अभी उठाए जाने हैं।’ गर्ग ने बताया कि केंद्र सरकार ने कुछ ऐसी गैर-जरूरी वस्तुओं की सूची तैयार की है, जिनका आयात नियंत्रित किया जा सकता है।साथ ही ऐसी वस्तुओं की सूची भी बनाई गई है, जिनमें हल्के नीतिगत हस्तक्षेप से निर्यात बढ़ाया जा सकता है। शुक्रवार को डॉलर की तुलना में 17 पैसे टूटकर रुपया 72.21 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। गर्ग ने कहा कि सरकार रुपये में गिरावट और इससे चालू खाता घाटे पर पडऩे वाले दुष्प्रभाव को लेकर सतर्क है।रुपये के लिए 68 से 70 प्रति डॉलर का स्तर ठीक है। 72 रुपये प्रति डॉलर तक का स्तर भी बहुत चिंताजनक नहीं है। हालांकि सरकार मानती है कि इसका अचानक 69 ेसे 72 प्रति डॉलर पर पहुंचना सही नहीं है।छह महीने में 10 से 12 फीसद तक टूट जाना या दो महीने में छह से नौ फीसद तक की गिरावट को सही नहीं ठहराया जा सकता। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितंबर को बैठक की थी और वित्त मंत्री ने इसे थामने के लिए कई फैसले लिए। इन उपायों को अभी लागू किया जा रहा है। गर्ग ने भरोसा जताया कि इस दिशा में उठाए जा रहे कदमों से रुपया जल्द ही अपने सामान्य स्तर पर लौट आएगा।

 

 

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