ऑर्गैनिक साड़ी: इको फ्रेंडली होने के साथ ही ट्रेंडी भी

 

अगर फैशन ऐसा हो, जो इको फ्रेंडली होने के साथ-साथ ट्रेंडी भी हो, तो बात कुछ खास है। इन दिनों महिलाएं अपना फैशन स्टेटमेंट कायम कर रही हैं ऑर्गैनिक साड़ी से। हाल के सालों में ऑर्गैनिक शब्द सुनने को मिला, जिसकी पहुंच बढ़कर अब फूड से लेकर साडिय़ों तक हो गई है। इन दिनों ऑर्गैनिक साड़ी का क्रेज काफी बढ़ गया है और जवां से लेकर मध्यम उम्र की महिलाएं तक इसे पहनना पसंद कर रही हैं। खास बात ये है कि इन साडिय़ों को उस कपास से तैयार किया जा रहा है, जिसमें किसी तरह के केमिकल फर्टिलाइजर का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। क्या है ऑर्गैनिक साड़ी: इन दिनों ऑर्गैनिक साड़ी का क्रेज बढ़ रहा है। ऑर्गैनिक का मतलब है पहले जमीन को ऑर्गैनिक तरीके से तैयार करना। 3 साल तक उसे नैचरल खाद से उपजाऊ बनाया जाता है। जब यहां कपास उगती है, तो वह ऑर्गैनिक हो जाती है। फिर इसी से साड़ी तैयार की जाती है, जो ऑर्गैनिक साड़ी कहलाती है। इन्हें पहनकर आप जमीं से एक अलग ही जुड़ाव और निकटता महसूस करती हैं। इनके डिजाइंस इतने खूबसूरत होते हैं कि आप देखती रह जाएंगी।केमिकल नहीं, नैचरल: जब कॉटन को ऑर्गैनिक तरीके से उगाया जाता है, तो इनसे बनने वाले कपड़े भी ऑर्गैनिक होते हैं। इन्हें डाई करते वक्त केमिकल फ्री, नैचरल और वेजिटेबल रंगों का इस्तेमाल होता है। ये रंग फूलों, पत्तियों और बीज से बनाए जाते हैं। ऐेसे में ये साड़ी नॉन एलर्जिक और नॉन टॉक्सिक होती हैं। ऑर्गैनिक साडिय़ों के प्रॉडक्शन से जुड़ी कंपनी एथिकस की को-फाउंडर और क्रिएटिव डायरेक्टर विजयलक्ष्मी नायर बताती हैं, ‘कॉटन की साड़ी में आयरन और स्टार्च मुश्किल से होता है। इसी वजह से हमने ऐसा टेक्सचर बनाया कि साड़ी बंधने पर कड़ी न होकर शिफॉन या जॉर्जट की तरह लुक दे। इनके रंग पक्के होते हैं और स्टार्च की जरूरत नहीं होती। इसे मेंटेन करना आसान है। इनके डिजाइंस में इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि ये आजकल की आधुनिक महिलाओं के टेस्ट के हिसाब से हों। इनकी कीमत 4 हजार से शुरू होकर 40 हजार तक हैं। हम हर साल 2 क्लेक्शन भी लेकर आते हैं, जिनसे सब इनसे रूबरू हो पाएं। हाल ही में ‘मुंबई मेरी जान’कलेक्शन लॉन्च हुआ, जिसकी प्रेरणा मुंबई शहर से मिली थी। इसमें विक्टोरिया टर्मिनल, बॉलिवुड, गेटवे ऑफ इंडिया, लोकल ट्रेन, वन बेडरूम चॉल जैसी आइकॉनिक डिजाइंस हैं।’वर्किंग वुमन, डॉक्टर, टीवी प्रजेंटर, लॉयर्स, टीचर्स वगैरह इसे काफी पहन रही हैं। स्कूल टीचर अनामिका मिश्रा बताती हैं कि तीज पर उन्होंने साड़ी खरीदी, तो स्टोन या एम्ब्रॉयडरी वाली न लेकर ऑर्गेनिक साड़ी खरीदी। सोशल नेटवर्किंग से जुड़ीं: पिछले 45 सालों से कॉटन पहनने वाली लेखिका सुनीता बुद्धिराजा को हैंडलूम में कॉटन और सिल्क साड़ी काफी पसंद है। अब वह ऑर्गैनिक साड़ी को पहनने पर तव्वजो देती हैं। खास बात ये है कि उन्होंने अपना एक फेसबुक ग्रुप सिक्स यार्ड्स एंड 365 डेज भी बनाया है, जिस पर देश-विदेश से 20 हजार से ज्यादा महिलाएं जुड़ गई हैं। ये सारी महिलाएं कॉटन साड़ी पहनने पर जोर देती हैं और रोज नए-नए लुक में अपनी फोटोज पोस्ट करती हैं। वहीं, हैंडलूम सेक्टर की कंपनी परिसरा की सीईओ विनुथा सुब्रह्मण्यम का कहती हैं, ‘बदलाव लाने के लिए बदलाव का हिस्सा बनना पड़ता है। अगर हम ये साड़ीज खरीदते हैं, तो इससे बुनकरों को भी फायदा होगा। उन्हें एक साड़ी बनाने में कई दिन लग जाते हैं, तो उन्हें मजबूत करने के लिए अगर इन साडिय़ों की डिमांड बढ़ती है, तो अच्छा है।
स्किन फ्रेंडली है ये साड़ी: ऑर्गैनिक साडिय़ां हमारी स्किन को नुकसान नहीं पहुंचाती। इस बारे में बीएलके के डर्मेटॉलजिस्ट डॉ. नितिन वालिया कहते हैं, ‘सिर्फ ऑर्गैनिक साड़ी ही नहीं, अगर आप कुर्ती, स्टोल या जो भी कपड़ा पहनते हैं, ये आपके लिए कंफर्टेबल होता है। सिंथेटिक फाइबर से एलर्जी या दूसरी प्रॉब्लम्स हो सकती हैं, लेकिन ऑर्गैनिक से आप हर तरह की स्किन प्रॉब्लम से बच जाते हैं। पसीना आने पर रेडनेस, एलर्जी या दूसरी स्किन प्रॉब्लम्स भी नहीं होतीं।

 

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