पेमेंट कंपनियों की भारत में इनकम पर लग सकता है टैक्स

 

मुंबई। वीजा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी ग्लोबल पेमेंट कंपनियों को भारत में अपनी इनकम पर लगभग 15 पर्सेंट टैक्स चुकाना पड़ सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इन कंपनियों से डेटा स्टोरेज के लिए देश में सर्वर रखने को कहा है और इस वजह से ये कंपनियां टैक्स के दायरे में आ सकती हैं। क्रक्चढ्ढ ने पेमेंट्स कंपनियों को 15 अक्टूबर से भारत में होने वाली सभी ट्रांजैक्शंस के लिए देश में ही डेटा स्टोर करने का ऑर्डर दिया है। वीजा, मास्टरकार्ड ने बताया है कि उन्होंने इस नियम का पालन करने के लिए कदम उठाए हैं। ये कंपनियां अभी भारत में टैक्स के दायरे से बाहर हैं क्योंकि इनके पास देश में ‘स्थायी प्रतिष्ठान’ नहीं है। ये कंपनियां सिंगापुर जैसे देशों में मौजूद ऑफिस से यहां अपना बिजनस चलाती हैं। ये अपना डेटा अमेरिका और आयरलैंड जैसे देशों में मौजूद सर्वर्स पर स्टोर करती हैं। स्थायी प्रतिष्ठान या बिजनस का स्थान टैक्सेशन में एक कॉन्सेप्ट है जो यह तय करता है कि किसी एंटिटी को टैक्स चुकाने की जरूरत है या नहीं। भारत में सर्वर लाने के बाद इन कंपनियों को यहां एक स्थायी प्रतिष्ठान रखने वाला माना जाएगा और उन्हें देश में टैक्स चुकाना होगा। टैक्स एक्सपर्ट दिलीप लखानी ने बताया, विभिन्न देशों के साथ भारत की कर संधियों के अनुसार, जिस सर्वर पर डेटा या सॉफ्टवेयर स्टोर किया जाता है और जिसके जरिए यह एक्सेस होता है, वह फिजिकल लोकेशन वाला इक्विपमेंट है। ऐसी लोकेशन को उस एंटरप्राइज के बिजनस का निश्चित स्थान माना जा सकता है जो सर्वर की मालिक है या लीज पर लेती और ऑपरेट करती है। भारतीय कंपनियों पर 30 पर्सेंट की दर से कॉर्पोरेट टैक्स लगता है, जबकि मास्टरकार्ड एवं वीजा जैसी पेमेंट कंपनियों पर लगभग 15 पर्सेंट की दर से टैक्स लगाया जा सकता है। 15 पर्सेंट का रेट उन कंपनियों के लिए है जिन्होंने भारत के साथ कर संधि रखने वाले सिंगापुर जैसे देशों के जरिए अपनी यूनिट्स में इन्वेस्टमेंट किया है। सूत्रों ने बताया कि अधिकतर बड़ी पेमेंट कंपनियां टैक्स की संभावित देनदारी से निपटने के तरीकों पर विचार कर रही हैं। अडवाइजरी फर्म रूत्रक्च के पार्टनर जितेन्द्र भंडारी ने बताया, भारत में अपने सर्वर लगाने पर पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स के लिए टैक्स देनदारी बढ़ जाएगी। अधिकतर कंपनियां स्पेशल पर्पज वीइकल बना सकती हैं या ऐसी किसी भारतीय कंपनी के सर्वर का इस्तेमाल कर सकती हैं जिसके साथ उनका संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि पेमेंट कंपनी रेंट चुकाकर सर्वर का इस्तेमाल करेगी जिससे कोई स्थायी प्रतिष्ठान नहीं होगा। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि कोई टैक्स नहीं लगेगा। भंडारी ने बताया, ‘भारत में सर्वर रखने पर निश्चित तौर पर टैक्स की देनदारी होगी। इस बारे में ईटी की ओर से भेजे गए प्रश्नों का मास्टरकार्ड ने उत्तर नहीं दिया। वीजा और अमेरिकन एक्सप्रेस ने कहा कि उन्होंने क्रक्चढ्ढ के नियमों का पालन करने के लिए योजना जमा कर दी है। इस बारे में जानकारी के लिए भेजी गई ईमेल का क्रक्चढ्ढ से उत्तर नहीं मिला।

 

 

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