जुलाई 2019 के बाद बनी गाडिय़ों में एयरबैग्स और पार्किंग सेंसर होंगे अनिवार्य

नई दिल्ली। सड़क हादसों में हर साल बड़ी संख्या में लोग जान गंवाते हैं। ऐसे में रोड इंजीनियरिंग के लिहाज से जरूरी सुधार करने के साथ ही गाडिय़ों में भी सुरक्षा मानकों पर जोर दिया जा रहा है।सड़क परिवहन मंत्रालय ने एक जनादेश पारित किया है। जिसके तहत एक जुलाई 2019 के बाद से देश में बनी सभी गाडिय़ों में एयरबैग्स, सीट बेल्ट रिमाइंडर, रिवर्स पार्किंग सेंसर्स लगाना अनिवार्य कर दिया है। वहीं सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम के लिए मैनुअल ओवरराइड भी अहम होगा।मंत्रालय ने इन प्रणालियों को लागू करने की समयसीमा पहले ही तय कर दी है, जो कि आधिकारिक रूप से कुछ दिनों में अधिसूचित कर दी जाएगी।सरकार ने सुरक्षा को लेकर दी मंजूरी- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क दुर्घटनाओं में मौतों को देखते हुए पैसेंजर और पैदल यात्री सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कई अहम परिवर्तनों को मंजूरी दी है। शहर के सड़कों पर दौड़ रहीं कई बजट कारों में इनमें से एक से ज्यादा सेफ्टी फीचर्स मौजूद नहीं है। परिवहन मंत्रालय का निर्णय वैश्विक सुरक्षा मानकों के अनुसार है, जिसमें कहा गया है कि कोई भी वाहन मौत का जाल नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही मौजूदा कार मॉडल्स को 1 अक्टूबर 2019 तक सुरक्षा उपायों को पालन करना होगा।हर साल लाखों सड़क हादसों में गंवाते हैं जान- हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं, अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2016 में डेढ लाख सड़क दुर्घटनाओं में से 74 हजार सिर्फ तेज रफ्तार की वजह से हुई। ऐसा इसलिए, क्योंकि आम गाडिय़ों में बेहतर सेफ्टी फीचर्स नहीं रहते हैं।इसलिए अब सभी गाडिय़ों में स्पीड लिमिट तय की जाएगी। ताकि किसी भी सूरत में गाडिय़ों की रफ्तार अस्सी किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ज्यादा न हो। इसके साथ ही जब भी गाड़ी टर्न ले रही होगी या कहीं पार्किंग में खड़ी होने जा रही होगी तो एक सिग्नल शो किया जाएगा, ताकि गाड़ी रिवर्स करते वक्त किसी से न टकराए। सरकार ने ऐसे ही कई तरह से सेफ्टी फीचर्स को ध्यान में रखा है।

 

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