लोग कहते हैं जावेद से गानें मत लिखवाया करो-जावेद अख्तर

 

जानेमाने लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने कहा, अब लोग मुझसे गानें नहीं लिखवाते इसकी वजह है मेरे गानों की शायरी लोगों को पसंद नहीं आती है। जावेद अख्तर ने निर्देशक जे पी दत्ता फिल्म पलटन के गानें लिखे हैं। फिल्म के म्यूजिक लॉन्च पर पहुंचे जावेद अख्तर ने आज-कल के फिल्मी गानों से खत्म होते खूबसूरत गीत, सिंगर की आवाज और क्लासिकल म्यूजिक पर काफी कुछ खुलकर कहा। जावेद कहते हैं, हम शो बिजनस वालों की गलतफहमी है कि हम दर्शकों से झूठ बोलकर निकल सकते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। दिल से किया गया कोई भी काम दर्शकों को जरूर पसंद आता है। आजकल कुछ फिल्मकारों का नजरिया बदल गया है। वह फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर को कहने लगते हैं कि क्या गानें के बीच में क्लासिकल ट्यून डाल दी है, यह सब थोड़ी न चलता है आजकल, जमाना बदल गया है। वह तो सिंगर को भी गाने का तरीका सिखाते हैं।खुद की बारे में बात करते हुए जावेद बताते हैं, ‘किसी ने मेरे बारे में भी किसी से कहा कि यार जावेद अख्तर से गानें मत लिखवाया करो। वह गानों में शायरी लिख देता है। तो क्या मैं गानें में अलजबरा लिखूं, फिजिक्स लिखूं या केमेस्ट्री लिखूं। क्या लिखूं? गानों में शायरी मांगने वाले अब बहुत कम हो गए हैं। अगर आपका गाना स्पष्ट है, गानें में मीनिंग है और गानें का ग्रामर सही है, तब तो यह बहुत ही डेंजर बात है। इस जमाने में गानों में शायरी लिखवाने वाले फिल्ममेकर्स खोजने जाएंगे तो बहुत कम मिलेंगे, इन चंद लोगों में जे पी दत्ता भी हैं। आज ऐसे खूबसूरत गानों की जरूरत नहीं है। चंद लोग इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मुझे बाकी लोगों के साथ भी काम करना है।जावेद आगे कहते हैं, आज-कल के गानों में गायक की आवाज के साथ ऑर्केस्ट्रा, ड्रम, तबले और गिटार की आवाज मिक्स होती है। यह सभी संगीत साधन आवाज के ऊपर बजते हैं। इस वजह से सिंगर की आवाज नीचे दब जाती है। ऐसे में आवाज को खोदकर निकलना पड़ता है। कभी-कभी वह आवाज निकलती भी नहीं है। अब जब आवाज ही नहीं सुनाई देती तो अच्छे-बुरे का फर्क किसको पड़ता है।सिंगिंग रियालिटी शो का उदाहरण देते हुए जावेद कहते हैं, ‘यदि आज की जनरेशन को यही हल्ला-गुल्ला पसंद होता तो सिंगिंग रियालिटी शो में लगभग सारे बच्चे लताजी, रफ़ीजी, मुकेश और किशोर दा के गाने भला क्यों गाते? जे पी दत्ता की तारीफ करते हुए जावेद ने कहा, जब कोई भी आर्टिस्ट अपना क्राफ्ट अच्छी तरह सीख और समझ जाता है तब वह आधे दिमाग के साथ काम करता है, लेकिन कभी-कभी ऐसा काम सामने आता है जो आपको जगाता है क्योंकि उस काम को आपके क्राफ्ट, मिडियम में कंट्रोल और स्मार्टनेस का जरूरत नहीं, बल्कि आपकी जरूरत होती हैं। आपकी असली ईमानदारी, आपकी वास्तविक फीलिंग और गंभीरता की जरूरत होती है। जे पी दत्ता के साथ काम करने में मुझे ऐसा ही महसूस होता है। दत्ता साहब के साथ अगर आप स्मार्टनेस के साथ काम करेंगे तो लिख ही नहीं पाएंगे और लिखेंगे तो झूठ लगेगा।दत्ता की पलटन में अर्जुन रामपाल, सोनू सूद, गुरमीत चौधरी, जैकी श्रॉफ, हर्षवर्धन राणे, सिद्धांत कपूर, लव सिन्हा, ईशा गुप्ता और सोनल चौहान अहम भूमिकाओं में हैं।

 

 

 

 

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