खुलासा- डाइटिंग करने से घटता नहीं, बल्कि और बढ़ जाता है FAT

ज्यादातर लोग ये समझते हैं कि डायटिंग करने से ‘फैट’ कम हो जाता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की अचानक डाइटिंग शुरू करने से फैट बढऩे लगता है जो सीधा हार्ट पर असर डालता है। इस बात का खुलासा हाल ही में हुए एक अध्ययन में हुआ है।शोधकर्ताओं का कहना है कि जो लोग जल्दी वजन घटाने के लिए अचानक अपनी डाइट कम कर लेते हैं उसका असर उन पर उल्टा होता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक कड़ी डाइटिंग करने से हार्ट की मांसपेशियों में फैट बनने लगता है जो हार्ट की नली को ब्लॉक कर सकता है और सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। इस बात का खुलासा ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। उनका कहना है कि जो लोग जरूरी 2000-2500 कैलोरी की मात्रा को अचानक घटाकर 600-800 कैलोरी तक ले आते हैं उनके हृदय को इससे बड़ा खतरा है।
इस रिसर्च में पाया गया कि सिर्फ एक हफ्ते में ही कड़ी डाइट पर चल रहे लोगों में हार्ट फैट की मात्रा 44 प्रतिशत बढ़ गई। इस रिसर्च में 21 मोटे लोगों को शामिल किया गया जनका औसतन वजन 52 किलो था और फिर उन्हें कड़ी डाइट पर डाला गया। एमआरआई स्कैन के जरिए पता चला कि सिर्फ एक हफ्ते में ही कुछ लोगों का हार्ट के पास जमा होने वाला फैट 50 प्रतिशत तक बञ गया। इसके कारण हृदय की मांस्पेशियां खून का संचार ढंग से नहीं कर पा रही थीं।

ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान- दुनियाभर के एक चौथाई कैंसर के मरीज भारत में हैं। कोनकोर्ड-3 की हालिया रिपोर्ट में पाया गया है कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर से सर्वाइविंग दर 66 फीसदी है वहीं ऑस्ट्रेलिया में यह दर 89त्न है। यह कहना है रेडिएशन ऑनकॉलोजी की सीनियर कसंल्टेंट डॉक्टर सपना नांगिया का।
अधिकतर मामलों में मरीज को कैंसर के बारे में पता ही नहीं चलता अगर इसका सही समय पर इलाज हो तो इसको काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। जब जेंडर की बात आती है तो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा होता है। यही नहीं भारत में महिलाओं की इन कैंसर से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1.अवेयनेस कैंसर का सीधा संबंध मोटापे, शराब और सिगरेट पीने, हार्मोनल मामलों, सही समय पर खाना न खाना, प्रदूषण वाले एन्वॉयरमेंट में रहना से है। इसलिए सही समय पर अगर इसके लक्षणों की पहचान हो जाए तो इसका इलाज आसान और जल्दी हो जाता है। इसेक अलावा अगर परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर था तो इसके होने के चांसेस बढ़ जाते हैं इसलिए परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर वाले लोगों को इसके लेकर सतर्क रहना चाहिए।

2.महिलाएं जिनकी उम्र 20 साल से ज्यादा है उन्हें हर महीने स्तनों का खुद से परीक्षण करना चाहिए। स्तनों में देखें कहीं सूजन तो नहीं या फिर त्वचा में गड्ढे, सिकुडऩ या लालपन तो नहीं। इसी तरह सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के लिए वजाइनल ब्लिडिंग खास तौर पर पीरियड के समय में, इंटरकोर्स के दौरान पेल्विक एरिया में दर्द के लक्षणों को न नकारें।

 

 

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