जिन मुद्दों पर सहमति बनी थी उन पर तुरंत कार्रवाई हो : पायलट

पायलट के सुर फिर बगावती हुए

जयपुर (कासं.)। सचिन पायलट खेमे की पिछले साल जुलाई में बगावत और फिर अगस्त में हुई सुलह के बाद बनी सुलह कमेटी की सिफारिशों पर एक्शन टेकन का अब तक इंतजार है। सचिन पायलट ने अब कमेटी में बनी सहमति के बिंदुओं पर तत्काल अमल करने की बात उठाई है। पायलट ने बुधवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पीसीसी में मीडिया से बातचीत में कहा- कई माह पहले एक कमेटी बनी थी। दुर्भाग्यवश अहमद पटेल का स्वर्गवास हो गया और उस पर आगे काम नहीं हो पाया। मुझे विश्वास है कि अब और ज्यादा विलंब नहीं होगा। जो चर्चाएं की थीं और जिन मुद्दों पर आम सहमति बनी थी, उस पर तुरंत प्रभाव से कार्यवाही होनी चाहिए। ऐसा होगा मुझे लगता है। पायलट ने कहा कि मुझे सोनिया गांधी पर पूरा विश्वास है, उनके आदेश पर ही कमेटी बनी थी। अभी कमेटी में दो सदस्य हैं। उपचुनाव भी अब दो दिन में खत्म हो जाएंगे, पांच राज्यों के चुनाव थे, वह भी समाप्त होने को हैं । मुझे नहीं लगता कि अब कोई ऐसा कारण है कि उस कमेटी के निर्णयों के क्रियान्वयन में और अधिक देरी होगी। जहां तक मेरा अपना मानना है कि सरकार को ढाई साल हो चुके हैं, घोषणा पत्र में जो वादे किए थे, कुछ पूरे भी किए हैं। बचे हुए कार्यकाल में वादों को पूरा करने के लिए और गति से काम करना होगा। इसमें राजनीतिक नियुक्तियां हैं, मंत्रिमंडल का विस्तार है। उसमें पार्टी और सरकार मिलकर एकराय बनाएंगे।
रमेश मीणा और अन्य विधायकों के दलित आदिवासी विधायकों के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाने पर पायलट ने समर्थन किया है। पायलट ने कहा- नाराजगी की बात नहीं है जो व्याव?हारिक और सामाजिक मुद्दे हैं, उन्हें हर जनप्रतिनिधि, चाहे वह सरपंच हो प्रधान हो या सांसद विधायक हो, उसे समय-समय पर उठाते रहते हैं। मुझे उम्मीद है जनप्रतिनिधियों ने जिन बातों को उठाया था, उस पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई होनी चाहिए। ये ऐसे मुद्दे हैं जो किसी एक व्यक्ति के नहीं हैं, पूरे समाज से जुड़े हैं। पायलट ने कहा कि दलितों पर अगर अत्याचार या शोषण होता है, उनके साथ भेदभाव होता है तो यह हमारे समाज के लिए आइना हैं । हम सब लोगों को अपने मतभेद भुलाकर दलित समाज के लोगों को वह मान-सम्मान देना पड़ेगा। यह किसी पर दया या अहसान नहीं है, वे इस देश के नागरिक हैं। जहां भी दलितों पर ज्यादती हो, ऐसा सुरक्षा कवच प्रदेश में बनना चाहिए कि वे लोग खुले माहौल में निडर होकर जीवन व्यतीत कर सकें। सचिन पायलट के दोनों बयानों की बुधवार को सियासी हलकों में गूंज रही। लंबे अरसे बाद पायलट ने सुलह कमेटी और खुद के समर्थक विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर खुलकर राय रखी है। पायलट ने इशारों में यह भी कह दिया है कि मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में अब देर नहीं करनी चाहिए। जुलाई में बगावत के बाद खुद पायलट को डिप्टी सीएम पद से और उनके दो समर्थकों विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था। सचिन पायलट खेमा अब मंत्रिमंडल में अपने समर्थक विधायकों के लिए 5 से 6 मंत्री पद बनाने की दावेदारी कर रहा है तो राजनीतिक नियुक्तियों में भी बराबर की भागीदारी मांग रहा है।विधानसभा सत्र के दौरान सचिन पायलट समर्थक विधायक रमेश मीणा, मुरारी मीणा और वेदप्रकाश सोलंकी ने दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के विधायकों की आवाज दबाने के लिए बिना माइक की सीटें देने और विकास में भेदभाव बरतने का आरोप लगाया था। पायलट समर्थक हेमाराम चौधरी और बृजेंद्र ओला ने उनके क्षेत्र में विकास के काम मंजूर करने में जानबूझकर भेदभाव का आरोप लगाया था। पायलट ने बुधवार को बयान देकर उन आरोपों का समर्थन कर दिया है। पायलट के बयान से यह भी साफ हो गया है कि उनकी खेमे की मांगों को नहीं माना गया तो टकराव बढऩे के आसार हैं।

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