राज्य के सभी 55 एसएनसीयू में लगेंगी नवजातों के लिए पोर्टेबल डिजिटल वेईंग मशीनें

 

जयपुर। मिशन निदेशक, नेशनल हैल्थ मिशन (एनएचएम) राजस्थान ने राज्य के मेडिकल कॉलेजेस व जिला हॉस्पिटल्स के सभी 55 एसएनसीयू (स्पेशल नियोनेटल केयर यूनिट) में पोर्टेबल डिजिटल वेईंग (वजऩ मापने की) मशीनें लगाए जाने का निर्णय लिया है। इन मशीनों को डिजाईन व विकसित चिल्ड्रन्स इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन (सीआईएफएफ) की सहायता से, आईपीई ग्लोबल द्वारा राज्य स्तर पर चलाई जा रही ‘राजपुष्ट परियोजना के अंतर्गत किया गया है। जयपुर में ‘विकास अध्ययन संस्थान में 33 जिलों के लिए मास्टर ट्रेनर्स का एक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। एनएचएम के समर्थन से आईपीई ग्लोबल द्वारा एसएनसीयू पर कार्यरत स्टाफ़ का, इन वेईंग मशीनों के सही तरह से उपयोग तथा रख-रखाव पर प्रशिक्षण भी किया गया। प्रशिक्षण में, एनएचएम की और से डॉक्टर रोमेल सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर चाइल्ड हैल्थ, सुश्री नेहा पारीक एवं आईपीई ग्लोबल की ओर से सुश्री नमिता वाधवा, सुश्री दीर्घा गक्खर एवं डॉक्टर प्रियंवदा सिंह ने भाग लिया। इस अवसर पर डॉक्टर रोमेल सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर चाइल्ड हैल्थ, एनएचएम ने कहा कि, यह पोर्टेबल डिजिटल वेईंग मशीनें, हमारे एसएनसीयू की एक बहुत बड़ी आवश्यकता को पूरा करने जा रही हैं। मशीन हमें, एसएनसीयू पर भरती हो रहे प्रत्येक नवजात शिशु का फोटो, सटीक वजऩ एवं वजऩ लेने का समय उपलब्ध करायेगी जो कि हर एसएनसीयू पर कार्यरत अधिकृत सेवा-प्रदाता के मोबाईल पर डाले गए एक विशेष एप (एप्लीकेशन) के माध्यम से सीधे क्लाउड सर्वर पर दर्ज हो जाएगा। इस अभिनव प्रयोग से हम यह सुनिश्चत कर पायेंगे कि एसएनसीयू पर सही मायनों में ‘कम वजनी और कुपोषित शिशुओं की ही भरती हो एवं वे एसएनसीयू से समुचित चिकित्सा एवं देख-भाल पाकर स्वस्थ होकर ही जाएँ। हम इस सहयोग के लिए चिल्ड्रन्स इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन (सीआईएफएफ) एवं आईपीई ग्लोबल की टीम का धन्यवाद करते हैं। इन डिजिटल वेईंग मशीनों द्वारा ना सिफऱ् शिशुओं का सही वजऩ लिया जा सकेगा बल्कि, लिए गए वजऩ और शिशु की फ़ोटो को सम्बंधित अधिकारी द्वारा इंटरनेट के माध्यम से क्लाउड आधारित सर्वर पर रीयल टाइम में रिकॉर्ड भी किया जाएगा। इससे कम वजनी और कुपोषित शिशुओं का बिलकुल सटीक वजऩ लेने, उनकी समुचित एवं समय पर चिकित्सा एवं देख-भाल को सुनिश्चित किया जा सकेगा तथा आवश्यक सुधार हेतु मोनीटरिंग पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा। साथ ही यह डाटा, एसएनसीयू सेवाओं में सुधार लाने तथा कम वजनी और कुपोषित शिशुओं की चिकित्सा एवं देख-भाल के परिणामों को सुधारने हेतु नए हस्तक्षेपों की संरचना करने में भी कारगर साबित होगा।

 

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