ज्यादा नहीं बढ़ेगी दवाओं की कीमत, नीति आयोग ने की ऐसी व्यवस्था

नई दिल्ली। सरकार ने दवाओं की कीमत कम करने और जरूरी दवाओं को आम लोगों की पहुंच में लाने के लिए नई नीति बनाई है। दवाओं की खुदरा कीमतों को कम रखने के लिए सरकार निर्माता के स्तर पर आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने का फैसला किया है। इसी स्तर पर दवाओं की कीमत कम होने से स्टॉकिस्ट, थोक व्यापारी, वितरक या अस्पताल तक दवाएं पहुंचने पर उनकी कीमत नहीं बढ़ेगी।इसके अलावा डॉक्टरों, अस्पतालों और वितरकों द्वारा दूसरों ब्रांड की दवाओं की सिफारिश करने पर उनके लाभ में कटौती करने का कदम भी उठाया जा रहा है। वर्तमान में सभी आवश्यक दवाओं के मूल्य खुदरा विक्रेता स्तर पर नियंत्रित होती हैं, जिनकी बाजार में हिस्सेदारी एक फीसद से भी कम है।वहीं, रिटेलर का मार्जिन एमआरपी तक पहुंचते पहुंचते 16 फीसद तक हो जाता है। इसका सीधा असर स्टॉकिस्ट, थोक व्यापारी, अस्पताल तक पड़ता है। जिसका खर्च आखिरकार मरीज के परिजनों को उठाना पड़ता है। नीति आयोग के द्वारा प्रस्तावित नए नियम के अनुसार, दवा निर्माता के यहां से दवाएं निकलने के बाद एमआरपी का 24 फीसद फिक्स ट्रेड मार्जिन ही दिया जाएगा। इससे दवाओं पर होने वाली जबरदस्त मुनाफाखोरी पर लगाम लगेगी। साथ ही सप्लाई-चेन के आधार पर कस्टमर को डिस्काउंट मिलेगा। बताते चलें कि वर्तमान में सरकार सीधे तौर पर 850 से अधिक आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है। नई प्रणाली के तहत एक लाख करोड़ रुपए से अधिक के घरेलू दवा बाजार का लगभग 17 फीसद सीधे तौर पर सरकारी मूल्य नियंत्रण में आ जाएगा।इस प्रकार उपभोक्ताओं की चिकित्सा लागत कम हो जाएगी।

 

 

 

 

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