नहीं बढ़ाने का सरकार से नहीं मिला निर्देश-OMC

नई दिल्ली। सरकारी तेल कंपनियों के बड़े अधिकारियों ने इससे इनकार किया है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें सरकार की तरफ से पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी नहीं करने का निर्देश मिला है। इंडियन ऑइल के चेयरमैन संजीव सिंह और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन एस के सुराना ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी निर्देश की जानकारी नहीं है। ब्लूमबर्ग ने इससे पहले खबर दी थी कि सरकारी ऑइल मार्केटिंग कंपनियों से कहा गया है कि वे दाम ना बढ़ाएं और इससे होने वाला घाटा बर्दाश्त करें। वहीं, इस मामले में पेट्रोलियम मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।कच्चे तेल का दाम पिछले साल के मध्य से 45 पर्सेंट बढ़कर 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। तेल की मांग दुनिया भर में बढ़ रही है और ओपेक के सदस्य देशों ने इसकी आपूर्ति घटाने का समझौता किया है। इससे तेल के दाम में बढ़ोतरी हो रही है। इसका असर देश में पेट्रोल और डीजल के दाम पर भी पड़ा है, जो अंतरराष्ट्रीय दरों से जुड़े हुए हैं। पिछले साल 1 जुलाई के बाद से पेट्रोल और डीजल के दाम में 10.89 रुपये प्रति लीटर और 11.63 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दिल्ली में हो चुकी है। यह जानकारी इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन की वेबसाइट से मिली है। बुधवार को दिल्ली में पेट्रोल का दाम 73.98 रुपये और डीजल का 64.96 रुपये प्रति लीटर था। देश में पेट्रोल के दाम पर साल 2010 में सब्सिडी खत्म की गई थी। वहीं, डीजल को डीकंट्रोल करने का फैसला साल 2014 में लिया गया था। इसके बावजूद चुनाव से पहले पेट्रोल-डीजल के दाम को सरकार नियंत्रित करने की कोशिश करती है। जानकारों का कहना है कि उसकी वजह यह है कि 90 पर्सेंट फ्यूल रिटेलिंग मार्केट पर सरकारी कंपनियों का कब्जा है। सरकारी कंपनियां चुनाव से पहले कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी का बोझ खुद उठाती हैं, जिससे उनके ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन में गिरावट आती है। हालांकि, वे इसकी भरपाई कच्चे तेल की कीमत कम होने पर कर लेती हैं। तब वे दाम में हुई कमी का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं देती हैं।

 

 

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