तेल में उछाल से मांग बढऩे के साथ बढ़ेगी महंगाई,पेट्रोल-डीजल के दाम करने का बस यही एक उपाय

नई दिल्ली। पिछले 19 दिनों से पेट्रोल-डीजल के दाम में आग लगी हुई है। दिल्ली में डीजल पहली बार पेट्रोल से महंगा होकर 80 रुपये के पार चला गया है। ऐसे में महंगाई बढऩे के पूरे आसार हैं। इसके बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से फौरी तौर पर ज्यादा असर नहीं पड़ता नहीं दिख रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में मांग बढऩे के साथ महंगाई भी बढऩे का खतरा है। कीमतों में यह बढ़ोतरी अगले कुछ दिनों तक और जारी रह सकती है। अर्थशास्त्री अरुण कुमार के अनुसार, इसकी वजह ईंधन पर केंद्र द्वारा उत्पाद शुल्क और राज्यों द्वारा वैट में वृद्धि है।उनका कहना है कि डीजल के दाम तेजी से बढऩे पर अमूमन महंगाई बढ़ती है क्योंकि माल ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले ट्रक डीजल से ही चलते हैं लेकिन मौजूदा स्थिति थोड़ी अलग है। डीजल की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बावजूद बाजार में मांग बहुत ही कम है। इससे तत्काल महंगाई बढऩे का खतरा नहीं है। जब मांग बढ़ेगी तब ही कीमत में बढ़ोतरी होगी। शायद, इसलिए भी सरकार डीजल की कीमत में बढ़ोतरी पर चुप बैठी है। इससे अपस्फीति (संकुचन) रोकने में भी मदद मिलेगी।पेट्रोल-डीजल की कीमत में 64 फीसदी हिस्सा यानी करीब 50.69 रुपये प्रति लीटर ग्राहक टैक्स के तौर पर चुका रहे हैं। पेट्रोल पर केंद्र का उत्पाद शुल्क 32.98 रुपये और 17.71 रुपये राज्यों के बिक्री कर का है। डीजल पर टैक्स कीमत का 63 फीसदी यानी करीब 49.43 रुपये प्रति लीटर है। इसमें 31.83 रुपये केंद्रीय उत्पाद शुल्क और 17.60 रुपये राज्यों का वैट है।

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