निजी निवेश को पटरी पर लाना, बैंकों को मजबूत करना एक चुनौती- अरुण जेटली

मुंबई। सरकार सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के उपायों पर विचार कर रही है. ऐसे में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि निजी निवेश को पटरी पर लाना और बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करना इस समय सबसे बड़ी चुनौती है. वित्त मंत्री ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) की सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ”वास्तविकता यह है कि हमारे समक्ष दो प्रमुख चुनौतियां हैं. पहली चुनौती निजी निवेश को प्रोत्साहन देने की है और दूसरी हमारी बैंकिंग प्रणाली की क्षमता में सुधार के बारे में है, जिससे वृद्धि को समर्थन दिया जा सके.उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में लचीलापन और उद्यमशीलता की दृष्टि है. वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि सरकार में सुधारों को आगे बढ़ाने की इच्छाशक्ति है. जेटली ने कहा कि पूर्व में वैश्विक सुस्ती के मद्देनजर क्षेत्र आधारित उपाय किए गए हैं. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वैश्विक संभावनाएं सुधर रही हैं. उन्होंने कहा कि ये दो मुद्दे प्रक्रिया में संभावित बाधा हैं. पिछली छह तिमाहियों से देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर लगातार नीचे आ रही है. जून तिमाही में यह घटकर तीन साल के निचले स्तर 5.7 प्रतिशत पर आ गई है.निजी निवेश निचले स्तर पर है और बैंकरों की शिकायत है कि नई परियाजनाओं के लिए मांग नहीं है. प्रणाली में ऋण की मांग घट रही है. संपत्ति की गुणवत्ता में गिरावट और ऊंची गैर निष्पादित आस्तियों की वजह से पूंजी पर दबाव बैंकिंग प्रणाली में सबसे बड़ी बाधा है.सरकार अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए प्रोत्साहन पैकेज पर विचार कर रही है. कुछ रपटों में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सरकार 40,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज दे सकती है. जेटली ने कहा, ”एक गतिशील और प्रगतिशील समाज के रूप में हमें सर्वश्रेष्ठ समाधान ढूंढना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हम इन मुद्दों को हल कर पाएं.
अरुण जेटली ने कहा, आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए उठाए जाएंगे जरूरी कदम: इससे पहले केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार (21 सितंबर) को कहा था कि सरकार आर्थिक सुस्ती के बीच स्थिति की समीक्षा कर रही है और इससे निपटने के लिए जल्द ही ‘उपयुक्त कदम’ उठाए जाएंगे. जे.पी. मोर्गन की ओर से आयोजित दूसरे ‘भारत इंवेस्टर समिट’ को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा, पहले दिन से ही यह सरकार अग्रसक्रिय है. हमलोग आर्थिक संकेतकों की समीक्षा कर रहे हैं और सही समय पर सही कदम उठाया जाएगा. निजी निवेश में समस्या है. सरकार ने समस्या सुलझा लिया है, बहुत जल्द ही इस पर कदम उठाएंगे. उन्होंने कहा कि बैंकों ने अतीत में अत्यधिक ऋण दिया था. बैंकों के लिए पूंजी का प्रस्ताव भी लंबित है.सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और औद्योगिक उत्पादन के साथ चालू खाते में गिरावट के बाद वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज पर विचार कर रही है. विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती के कारण चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की दर घटकर 5.7 फीसदी पर आ गई है, जो साल 2014 में मोदी के सत्ता संभालने के बाद की सबसे कम दर है.जेटली ने कहा कि सरकार के पास चालू वित्तवर्ष में इस समस्या से निपटने के लिए महत्वाकांक्षी योजना है. उन्होंने कहा, यहां तक कि गुरुवार को भी एयर इंडिया विनिवेश की बैठक थी. गत कुछ वर्षों में, बाजार में काफी उथल पुथल रहा है, इसलिए सरकार को विनिवेश के लिए सही समय का इंतजार करना पड़ेगा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तकनीकी मुश्किलों का जिक्र करते हुए वित्तमंत्री ने व्यापारियों को रिटर्न जमा कराने की अंतिम तिथि से चार-पांच दिन पहले ही इसे अंतिम दिनों की परेशानी से बचने के लिए जमा करवाने की सलाह दी. जीएसटी में ज्यादा से ज्यादा सामग्रियों को शामिल करने पर उन्होंने कहा कि रियल स्टेट को इसमें शामिल करना सबसे आसान होगा।

 

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